JPSC-JSSC पर छात्रों का बड़ा ऐलान: 18 अक्टूबर तक रिफॉर्म नहीं हुआ तो होगा महापंचायत, सरकार को अल्टीमेटम
JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने सरकार को 18 अक्टूबर तक परीक्षा सुधार की प्रक्रिया पूरी करने का अल्टीमेटम दिया है. छात्र नेताओं ने कहा कि रिफॉर्म नहीं हुआ तो 18 अक्टूबर को छात्र महापंचायत बुलाई जाएगी.
Jharkhand News: JPSC-JSSC पर छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि हम लोग आंदोलन, परीक्षा रद्द, जांच और रिफॉर्म की मांग कर रहे थे. सरकार ने सभी परीक्षाओं को रद्द किया. रिफॉर्म पर सरकार ने कहा कि कमेटी बनाई जाएगी। लेकिन दो महीने का समय हम लोगों ने सरकार को दिया था. 18 अक्टूबर को हमारा अल्टीमेटम खत्म होगा. लेकिन रिफॉर्म से संबंधित आज तक सरकार ने कुछ नहीं किया. हमारी मांग थी कि आउटसोर्सिंग एजेंसी परीक्षा नहीं ले. रिजल्ट के साथ कटऑफ और स्कोर कार्ड जारी किया जाए. इसके अलावा रिफॉर्म को लेकर और भी कई मांगें थीं, लेकिन सरकार की तरफ से अब तक कोई काम नहीं हुआ है. रिफॉर्म को पूरा करके सरकार वैकेंसी लाए. लेकिन रिफॉर्म अब तक हुआ ही नहीं.
हम 18 अक्टूबर तक इंतजार करेंगे
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने ऐलान किया कि छात्र 7 अक्टूबर के बाद महाजुटान करेंगे. JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच इसका खंडन करता है. यह ऐलान मंच की ओर से नहीं किया गया है. सरकार को हमने दो महीने का अल्टीमेटम दिया है. हम 18 अक्टूबर तक इंतजार करेंगे. सरकार इस समय तक रिफॉर्म से संबंधित प्रक्रिया पूरी करे. अगर ऐसा नहीं हुआ तो 18 अक्टूबर को JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच एक छात्र महापंचायत बुलाएगा. सरकार रिफॉर्म से संबंधित जो कमेटी बनाएगी, उसमें JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच से भी लोगों को शामिल करना चाहिए. हाईकोर्ट में सुनवाई 7 अक्टूबर को है. हम सरकार से मांग करते हैं कि राज्य की जांच एजेंसी मजबूती से पूरे पक्ष को कोर्ट में रखे. CID की जांच की रफ्तार काफी धीमी है. सरकार ने अपने जवाब में यह माना है कि मास कॉपींग हुई, लेकिन अब तक केवल 36 गिरफ्तारियां हुई हैं. CID असली परीक्षा माफिया को जल्दी पकड़े.
FIR वापसी और JPSC में नियुक्ति की मांग
कुणाल प्रताप ने कहा कि जांच एजेंसी जब मास कॉपींग की बात मान रही है, तो उसे यह भी मानना चाहिए कि परीक्षा से एक दिन पहले प्रश्नपत्र लीक हुआ था. उन्होंने कहा कि इस मामले में CID के आब्जर्विंग अधिकारी से भी पूछताछ होनी चाहिए और जांच में तेजी लाकर असली मास्टरमाइंड को पकड़ा जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट में 5 अक्टूबर को CBI जांच की मांग वाली PIL पर सुनवाई होनी है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार CBI जांच से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पूरी ताकत लगा रही है. सरकार को इसी मजबूती के साथ हाईकोर्ट में भी तथ्य रखने चाहिए. उन्होंने कहा कि मस्ताना सर जेल से बाहर आ गए हैं, लेकिन अभी तक उन्हें निलंबन से मुक्त नहीं किया गया है, उन्हें निलंबन मुक्त किया जाना चाहिए. पीयूष ने कहा कि झारखंड में उनके आंदोलन के दौरान किसी तरह की हिंसा नहीं हुई, फिर भी छात्रों पर FIR दर्ज की गई. सरकार को सभी छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेनी चाहिए. उन्होंने JPSC में जल्द अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की मांग की. साथ ही कहा कि परीक्षा में सुधार को लेकर सरकार ने जो कमेटी बनाई थी, उसकी अब तक एक भी बैठक नहीं हुई है.
सरकार की मंशा अभी स्पष्ट नहीं है
वहीं, कुणाल प्रताप ने कहा कि उनकी मांग फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की थी, जिसका गठन तो हुआ, लेकिन इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ती हुई दिखाई नहीं दे रही है. उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा अभी स्पष्ट नहीं है. अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित कमेटी की अब तक एक भी बैठक नहीं हुई है. सुधीर गुप्ता अभी भी JSSC के सचिव बने हुए हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. उन्होंने सवाल उठाया कि JSSC की परीक्षाओं में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार के आरोप हैं, फिर भी सुधीर गुप्ता पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई. उन्होंने कहा कि JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच सभी 22 रद्द परीक्षाओं को लेकर अपनी बात रख रहा है. CBI जांच वाली PIL (Public Interest Litigation) में उनका भी हस्तक्षेप है और सुप्रीम कोर्ट में एक और रिट दायर की गई है. उन्होंने कहा कि CBI जांच वाली PIL में सरकार की ओर से कपिल सिब्बल पैरवी कर रहे हैं, जबकि हाईकोर्ट में सरकार की ओर से किसे लाया जा रहा है, यह भी सवाल है.
सरकार को 18 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम
कुणाल प्रताप ने कहा कि राज्य में तकनीकी रूप से अब तक सिर्फ 8 JPSC परीक्षाएं हुई हैं. सरकार को 18 अक्टूबर तक का समय दिया गया है. उन्होंने कहा कि उनके आंदोलन को साजिश के तहत खत्म कराने की कोशिश की गई, लेकिन इसके बावजूद सरकार को समय दिया गया है. अल्टीमेटम खत्म होते ही महापंचायत का आयोजन किया जाएगा और उसी दिन आगे की रणनीति तय होगी. उन्होंने कहा कि अजीत भट्टाचार्य की PA ने कई सदस्यों को पैसे दिए जाने की बात कही है और इसका नेटवर्क त्रिपुरा, नेपाल समेत कई जगहों तक फैला होने का दावा किया गया है. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की CBI जांच होनी चाहिए. अगर सरकार इसमें शामिल नहीं है तो उसे CBI जांच करा देनी चाहिए. उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार अपने फैसले पर कायम रहेगी.
रिपोर्ट: उज्ज्वल मिश्रा