झारखंड में रूबेलाः पहला मरीज मिलते ही स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, जानें क्या हैं लक्षण और कितना खरतनाक है यह वायरस?
सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड की रहने वाली एक 10 वर्षीय बच्ची में रूबेला वायरस का संक्रमण पाया गया है. पहला मरीज सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग चौकन्ना हो गया है.
झारखंड में रूबेला वायरल का पहला मरीज सामने आते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है. जानकारी के मुताबिक, सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड की रहने वाली एक 10 वर्षीय बच्ची रूबेला वायरस से संक्रमित पाई गई है. रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने बच्ची के खून की जांच करने के बाद उसके संक्रमित होने की पुष्टि की है. इस सीजन में रूबेला का यह पहला केस है. बच्ची में रूबेला वायरस की पुष्टि होते ही स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब पूरे प्रदेश में एक अभियान चलाया जाएगा, जिसमें इस वायरस से बचाव की जानकारी दी जाएगी. इसके साथ ही पूरे राज्य में एंटी रूबेला टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया गया है. इतना ही नहीं राजधानी रांची में स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में राज्यस्तरीय वार रूम बनाया गया है.
क्या है रूबेला वायरस और कितना है खतरनाक?
रूबेला वायरस को जर्मन खसरा भी कहते हैं. इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों में जलन के साथ-साथ शरीर पर लाल-लाल दाने निकल आते हैं. साल 1814 में पहली बार जर्मन के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने इसे बीमारी माना था. गर्भवती महिलाओं पर इस वायरस का सबसे खतरनाक असर देखने को मिलता है. इस वायरस से संक्रमित गर्भवती महिला का गर्भपात हो सकता है या उसका बच्चा गंभीर बीमारियों के साथ पैदा होता है. 1964 में अकेले अमेरिका में ही इस वायरस से करीब 1.25 करोड़ लोग संक्रमित हुए थे. जिसके कारण 11,000 से अधिक महिलाओं का गर्भपात हुआ और 20,000 से ज्यादा बच्चे गंभीर विकृतियों (CRS) के साथ पैदा हुए थे.
कैसे फैलता है इसका संक्रमण?
यह वायरस हवा के माध्यम से फैलता है. संक्रमित व्यक्ति के छींकने और खासने से यह बड़ी तेजी से फैलता है. संक्रमित व्यक्ति से बिना मास्क लगाए बातचीत करने के अलावा संक्रमित गर्भवती महिला से उसके अजन्मे बच्चे में भी फैल सकता है. संक्रमित व्यक्ति में लाल चकत्ते दिखने के 7 दिन पहले से और चकत्ते समाप्त होने के सात दिन बाद तक यह वायरस फैल सकता है.
रूबेला वायरस का क्या इलाज है?
- संक्रमित व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए और आराम करना चाहिए.
- संक्रमण के दौरान लगातार 102-203 डिग्री तक बुखार देखने को मिलता है. ऐसे में डॉक्टर की सलाह से दवाएं लें.
- संक्रमित व्यक्ति को अन्य लोगों (विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं) से अलग रखें. गर्भवती महिलाओं के लिए यह वायरस बहुत खतरनाक है.
- बच्चों को नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोने की आदत डालें.
- सार्वनिक स्थानों पर जाते वक्त हमेशा मास्क पहनकर रखें. खांसते या छींकते समय मुंह ढकने की सलाह दें.