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झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी की तीन परीक्षाओं की नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के आदेश पर फैसला सुरक्षित रखा

हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है और अब फैसले की घड़ी आने वाली है. ऐसे में याचिकाकर्ताओं और सरकार दोनों के लिए धुकधुकी वाला समय है. अब देखना यह है कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत क्या फैसला सुनाती है.

Edited By Sunil Mishra
Published: Oct 12, 2026, 06:50 PM IST | Updated: Oct 12, 2026, 07:11 PM IST
Image Credit: झारखंड हाई कोर्ट ने जेपीएससी परीक्षाओं को रद्द करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली है. (File Photo)
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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी (झारखंड लोक सेवा आयोग) की ओर से आयोजित 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) और फूड सेफ्टी अफसर की नियुक्तियां रद्द करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली और फैसला सुरक्षित रख लिया. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने प्रार्थियों और राज्य सरकार को गुरुवार तक संक्षिप्त लिखित नोट दाखिल करने का समय दिया है. अंतिम बहस के दौरान अदालत ने कहा कि नियुक्ति परीक्षा रद्द करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्पष्ट है. अब यह विचार किया जाएगा कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं के लिए दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग-अलग किया जा सकता है या नहीं.

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अदालत ने यह भी कहा कि इस पहलू पर विचार करना होगा कि क्या परीक्षा प्रणाली इतनी दूषित हो चुकी है कि दोषियों और निर्दोषों के बीच अंतर करना संभव नहीं रह गया है. सुनवाई के दौरान प्रार्थियों, हस्तक्षेपकर्ताओं और राज्य सरकार की ओर से अपने-अपने तर्क रखे गए.

अदालत ने कहा कि तथ्यों के विश्लेषण के बाद मामले में आदेश पारित किया जाएगा. प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने दलील दी कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीडीपीएल को अनियमितताओं में संलिप्त बताकर पूरी परीक्षा रद्द करना उचित नहीं है.

उन्होंने कहा कि एजेंसी के खिलाफ साजिश में शामिल होने का निष्कर्ष अभी नहीं निकाला जा सकता और यह जांच का विषय है. मामले में अनुसंधान जारी है. प्रार्थियों ने यह भी दलील दी कि नियुक्तियां हो जाने के बाद उन्हें रद्द करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है. सफल अभ्यर्थियों की नियुक्तियां सामूहिक रूप से एक अधिसूचना जारी कर रद्द नहीं की जा सकतीं.

वहीं, हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने आरोप लगाया कि 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा और सीडीपीओ परीक्षा में टीडीपीएल के माध्यम से कथित तौर पर 50-50 लाख रुपये लेकर कई अभ्यर्थियों को पास कराया गया. राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहित राय ने अदालत को बताया कि परीक्षाओं में अनियमितताओं के संकेत कई बिंदुओं से मिले हैं और इनके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य एवं दस्तावेज मौजूद हैं.

सरकार की ओर से कहा गया कि सीआईडी की जांच में कई गिरफ्तारियां हुई हैं और जांच में परीक्षा में पैसे के लेनदेन से संबंधित तथ्य सामने आए हैं. राज्य सरकार ने अदालत में सीलबंद रिपोर्ट भी पेश की। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया.

-आईएएनएस

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इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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