)
झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पिछले दो चुनावों से सत्ता से दूर है. ऐसे में बीजेपी ने सूबे में जनजातीय समाज से आने वाले प्रदेश प्रभारी गजेंद्र सिंह पटेल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन कुमार साय के जरिए, न सिर्फ पार्टी से दूर जा चुके आदिवासी वोट बैंक को जोड़ने की कोशिश में जुट रही है, बल्कि सह प्रभारियों के बल पर पार्टी अपने कोर वोटर को पार्टी की विचारधारा से जोड़ कर सूबे में पार्टी की सत्ता काबिज कराने की कवायद ने जुट गई है. वहीं, विरोधी नव नियुक्त प्रभारियों और सह प्रभारियों के बहाने बीजेपी पर तंज कस रही है.
ट्राइबल वोटर वापस हमारा साथ देंगे- प्रतुल शाहदेव
झारखंड बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि झारखंड बीजेपी की टीम बहुत शानदार है. हालांकि, पिछले कुछ चुनाव से हमारे ट्राइबल वोटर्स हमारे साथ नहीं आ पा रहे हैं. झारखंड में ट्राइबल सीट्स 28 है. 2019 के चुनाव में हमें दो सीटें मिली थी और उसके बाद आखिरी चुनाव में एक हो गई. हालांकि, 2014 के चुनाव में यही ट्राइबल वोटर ने हमें 11-12 विधानसभा सीटों पर जिताया था. इसीलिए यह जो गैप हो गया था, हम उसे दूर करने की कवायद में जुटे हैं. हमारी टीम के मेहनत की बदौलत हमारे ट्राइबल वोटर वापस हमारा साथ देंगे. ऐसे भी झारखंड सरकार ने हर मोर्चे पर इन्हें ठगने का काम किया है. इसीलिए, अब हम एक विकल्प के तौर पर सामने आ रहे हैं.
बीजेपी के सांसदों की आवाज नहीं निकलती- किशोर शाह देव
कांग्रेस नेता किशोर शाह देव ने बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा, चंपई सोरेन, गीता कोड़ा, मधु कोड़ा जैसे नेता टेस्टेड भी हैं और रिजेक्टड भी. इसीलिए बीजेपी ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के आदिवासी नेताओं को झारखंड की जिम्मेदारी दी है. आदिवासी मूलवासी और झारखंड विरोधी भारतीय जनता पार्टी कोई भी नेता बदल लें, झारखंड की जनता उन्हें स्वीकार नहीं करेगी. क्योंकि, वह झारखंडीयत की बात नहीं करते. पूरा झारखंड सरना कोड की मांग कर रहा है. बीजेपी के सांसदों की आवाज नहीं निकलती. बीजेपी हमारी महिलाओं को दिए जाने वाले सम्मान की योजना को बंद करना चाहती है. कई ऐसी चीज हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी का चरित्र झारखंड की जनता के सामने है, इसीलिए उन्हें कोई फायदा नहीं होगा.
बीजेपी यहां के संघर्ष को समझ नहीं सकती- सुप्रियो भट्टाचार्य
जेएमएम महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि वह ट्राइबल समुदाय से जरूर हैं, लेकिन वह झारखंड के आदिवासियों की समस्याओं, आकांक्षाओं और इच्छाओं को नहीं जानते हैं. यहां के आदिवासियों की भाषा-संस्कृति और रहन-सहन, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासियों से बिल्कुल अलग है. हमारे यहां के ट्राइबल के वंशज कौन है- सिधू, कान्हू, चांद, भैरव, बिरसा मुंडा, फूलो, झानो, नीलांबर, पीतांबर और टाना भगत लड़ाके और योद्धा थे. भारतीय जनता पार्टी यहां के संघर्ष को समझ नहीं सकती. भाजपा एक लेबोरेटरी के तौर पर झारखंड में टेस्ट करना चाहती है, लेकिन सफल नहीं होगी.
रिपोर्ट: धीरज ठाकुर