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जापान के नागोया में आयोजित पांचवें एशियन पारा गेम्स-2026 में स्वर्ण पदक जीतकर लौटे तीरंदाज विजय सुंडी का सोमवार को चाईबासा में जोरदार स्वागत किया गया. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और झारखंड का मान बढ़ाकर लौटे विजय की एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे. चाईबासा नगर परिषद के अध्यक्ष नितिन प्रकाश, उपाध्यक्ष विकास शर्मा समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उन्हें गुलदस्ता भेंट कर और माला पहनाकर सम्मानित किया. इस दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ विजय का जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया.
विजय सुंडी ने एशियन पारा गेम्स के फाइनल मुकाबले में चीन के तीरंदाजों को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया. उनकी इस उपलब्धि से पश्चिमी सिंहभूम जिले समेत पूरे झारखंड में खुशी का माहौल है. उनकी सफलता को राज्य की खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि माना जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी इस जीत ने झारखंड के खेल जगत को गौरवान्वित किया है.
विजय की यह पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता नहीं है. इससे पहले भी वह दो विश्व कप स्वर्ण पदक जीत चुके हैं. इसके अलावा, वह पांच बार राष्ट्रीय चैंपियन रह चुके हैं. एशियन पारा गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी उपलब्धियों की सूची में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है. उनकी लगातार सफलताएं उनकी मेहनत, लगन और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाती हैं.
विजय सुंडी वर्ष 2016 से अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी प्रशिक्षक महर्षि महेंद्र सिंकु के मार्गदर्शन में चाईबासा के सिकुरसाई स्थित तुरतुंग तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र में नियमित अभ्यास कर रहे हैं. निरंतर मेहनत, अनुशासन और कठिन प्रशिक्षण के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. मूल रूप से सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर थाना क्षेत्र के बड़डीह गांव के निवासी विजय चाईबासा में रहकर तीरंदाजी का अभ्यास करते हैं. यहीं उन्होंने अपने खेल को लगातार निखारा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. उनकी इस सफलता ने स्थानीय खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में नया उत्साह भर दिया है.
रिपोर्ट: आनंद प्रियदर्शी