जमशेदपुर बैंक डकैती: 24 मिनट में ₹36.43 करोड़ की लूट, पटना के सुबोध गैंग से जुड़ रहे तार
जमशेदपुर में पांच हथियारबंद बदमाशों ने महज 24 मिनट में 24 मिनट में 36 करोड़ का सोना और 43 लाख कैश लूट लिए. इस घटना के तार बिहार निवासी सुबोध सिंग के गैंग से जुड़ रहे हैं. पुलिस के मुताबिक, सुबोध सिंह अबतक बिहार समेत 6 राज्यों से करीब 400 किलो से ज्यादा सोना लूट चुका है.
जमशेदपुर में गुरुवार (24 सितंबर) को भीषण डकैती हुई है. पांच हथियारबंद अपराधियों ने शहर के गोलमुरी स्थित केनरा बैंक में धावा बोलकर भारी मात्रा में नकदी और सोना लूट लिया. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बदमाश महज 24 मिनट में 24 मिनट में 36 करोड़ का सोना और 43 लाख कैश लूट लिए. हालांकि, बैंक प्रबंधन और पुलिस ने अभी लूट की कुल रकम का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है. पुलिस अब शहर भर के सीसीटीवी को खंगालकर अपराधियों का सुराग तलाश कर रही है. इस बैंक डकैती के तार बिहार के सुबोध गैंग से जुड़ रहे हैं, क्योंकि इस लूटकांड का पैटर्न बिल्कुल सुबोध गैंग के साथ मेल खा रहा है.
सुबोध सिंह गैंग के काले कारनामे
बता दें कि बिहार निवासी सुबोध सिंह का गैंग, देशभर में गोल्ड लूट की बड़ी वारदातों को अंजाम देने के लिए कुख्यात है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले एक दशक में सुबोध ने अपनी गैंग के साथ मिलकर बिहार समेत 6 राज्यों से करीब 400 किलो से ज्यादा सोना लूटा है. गैंग के मुखिया सुबोध सिंह के खिलाफ ही लूट, हत्या और डकैती के 42 से अधिक केस दर्ज हैं. सुबोध का नेटवर्क इतना मजबूत है कि वह जेल में रहते हुए भी बड़ी-बड़ी वारदातों को अंजाम दिलाने में कामयाब हो जाता है. इसी साल 3 मई को हैदराबाद के करीमनगर के पीएमजे ज्वेलर्स से 82.02 लाख रुपए की ज्वेलरी लूटी गई थी. इस घटना में भी सुबोध सिंह का हाथ था. उसने पूर्णिया जेल के अंदर से इस वारदात को अंजाम दिलाया था. इस मामले में तेलंगाना पुलिस ने पूर्णिया जेल से उसे हिरासत में लिया था.
कौन है सोना लूटने वाला सुबोध सिंह?
सुबोध सिंह उर्फ बबुआ बिहार के नालंदा जिले के चिस्तीपुर गांव का रहने वाला है. 12वीं पास सुबोध ने साल 1999 से 2008 तक पुलिस के लिए मुखबिरी का काम किया. इस दौरान उसने पुलिस के काम करने के तरीके को करीब से देखा, पुलिस की रणनीति सीखी और उससे बचने के तरीके भी सीखे. इसके बाद उसने अपराध की दुनिया में अपने कदम रखे. शुरुआती दौर में वह छोटे अपराधों को अंजाम दिया करता था. इसका इस्तेमाल वारदात को अंजाम देने और पुलिस से बचने में करने लगा. साल 2008 में वह रायपुर में हुई बैंक डकैती केस में जेल गया. यहां उसकी मुलाकात जरायम की दुनिया के बड़े-बड़े महारथियों से मुलाकात की. जेल से बाहर आने के बाद उसने साल 2015 में अपना गैंग खड़ा किया और देशभर में सोने की लूट की घटनाओं को अंजाम देना शुरू कर दिया. साल 2018 में बिहार STF ने उसे 16.5 किलो सोने और हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था.
जमशेदपुर बैंक डकैती से क्यों जुड़ रहे तार?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शहर में हो रही झमाझम बारिश के बीच पांच शख्स रेनकोट पहनकर बैंक के अंदर पहुंचे. बारिश के कारण किसी को भी उन पर शक नहीं हुआ. बैंक के अंदर पहुंचते ही उन्होंने अपने हथियार निकाल लिए और सभी को बंधक बना लिया. इसके बाद आधे घंटे से भी कम समय में उन्होंने प्रदेश की सबसे बड़ी डकैती को अंजाम दिया. बैंक में अपराधियों ने एक कर्मचारी को रिवॉल्वर की बट से मारकर घायल भी कर दिया. उन्होंने लॉकर खुलवाकर ग्राहकों द्वारा गिरवी रखा गया सोना अपने कब्जे में ले लिया. वारदात के बाद पांचों अपराधी बैंक से बाहर निकले और पैदल ही फरार हो गए. वे कहां चले गए, किसी को भी पता नहीं चला.
अब पुलिस तलाश रही सुराग
पुलिस ने बैंक परिसर का निरीक्षण करने के साथ घटना से जुड़े साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. फॉरेंसिक और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों की टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए हैं. पुलिस बैंक और आसपास के प्रतिष्ठानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है. फुटेज के जरिए अपराधियों की पहचान और उनके भागने के रास्ते का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है. शहर के विभिन्न इलाकों में पुलिस ने जांच और चेकिंग भी शुरू कर दी है. बैंक प्रबंधन फिलहाल लूटे गए नकदी और सोने का मिलान कर रहा है. इसके बाद ही लूट की वास्तविक राशि का पता चल सकेगा. पुलिस ने अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमों का गठन कर संभावित ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है.