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झारखंड में नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के आदेश पर अदालती रोक बरकरार, हाईकोर्ट ने 48 घंटे में मांगा जवाब

झारखंड में नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के आदेश पर अदालती रोक बरकरार है. हाईकोर्ट ने 48 घंटे में जवाब मांगा है. सुनवाई के दौरान अदालत ने सीआईडी जांच की गति को लेकर भी टिप्पणी की और सरकार से समयबद्ध तरीके से स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है.

Edited By Ranjana Kumari
Published: Sep 15, 2026, 04:41 PM IST | Updated: Sep 15, 2026, 04:51 PM IST
Image Credit: झारखंड हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
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झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा समेत सीडीपीओ, एफएसओ और जेएसएससी सीजीएल के अधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर लगी रोक मंगलवार को बरकरार रखी. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार को मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए 48 घंटे के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सीआईडी की ओर से की जा रही जांच की अब तक की प्रगति से संबंधित रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की जाएगी.

अभ्यर्थियों और नियुक्त कर्मियों के भविष्य से जुड़ा है मामला
सरकार की ओर से जांच की स्थिति से संबंधित शपथपत्र दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई. सरकार की ओर से एक सप्ताह का समय मांगा गया, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया और जवाब दाखिल करने के लिए 48 घंटे का समय दिया. अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि मामला बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और नियुक्त कर्मियों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसमें अनावश्यक देरी नहीं की जा सकती. सुनवाई के दौरान अदालत ने सीआईडी जांच की गति को लेकर भी टिप्पणी की और सरकार से समयबद्ध तरीके से स्थिति स्पष्ट करने को कहा. मामले में जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजोय पिपरवाल ने पक्ष रखा. प्रार्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स, चंचल जैन समेत अन्य ने बहस की.

सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता ने रखा पक्ष
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता के साथ सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने भी पक्ष रखा. यह विवाद राज्य सरकार द्वारा उन परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले के बाद सामने आया है, जिनमें परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी टीडीपीएल की भूमिका रही थी. सरकार ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं परीक्षा, जेपीएससी-सीजीएल, सीडीपीओ, एफएसओ और जेएसएससी-सीजीएल समेत अन्य परीक्षाओं से संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने का निर्णय लिया था. सरकार के इस फैसले से प्रभावित नियुक्त अभ्यर्थियों और कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का रुख किया. उनका कहना है कि नियुक्तियों को सामूहिक रूप से रद्द करने से उनके अधिकार और भविष्य प्रभावित हो रहे हैं. पिछली सुनवाइयों में हाईकोर्ट ने प्रार्थियों को अंतरिम राहत देते हुए सरकार के आदेश पर रोक लगाई थी.

-आईएएनएस

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रंजना कुमारी Zee Bihar Jharkhand की डिजिटल टीम में बतौर Sub-Editor अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं. बिहार के सिवान जिले के जीरादेई से ताल्लुक रखने वाली रंजना स्थानीय और जमीनी मुद्दों पर गहरी पकड़ रखती हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वे मुख्य रूप से राजनीति, क्राइम, यूटिलिटी और देश-दुनिया की अहम रूटीन खबरों को प्रमुखता से कवर करती हैं. Zee Media का हिस्सा बनने से पहले रंजना ने न्यूज इंडिया 24x7 में भी डेढ़ साल तक अपनी सेवाएं दी थीं. एकेडमिक की बात करें तो रंजना GJU से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं.
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