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Exclusive Interview: बांग्लादेशी घुसपैठिए झारखंड के लिए बड़ी मुसीबत, बीजेपी के नवनियुक्त प्रभारी गजेंद्र सिंह पटेल ने किया दावा

झारखंड में बीजेपी पिछले दो विधानसभा चुनावों में जीत नहीं पाई है और 2019 से वह सत्ता से बाहर है. इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर पड़ता है. अब देखना यह है कि पार्टी के नवनियुक्त प्रभारी गजेंद्र सिंह पटेल इसमें कितना अंतर कर पाते हैं.

Written By Sunil Mishra
Published: Nov 03, 2026, 02:18 PM IST | Updated: Nov 03, 2026, 03:02 PM IST
Image Credit: झारखंड बीजेपी के नवनियुक्त प्रभारी गजेंद्र सिंह पटेल (AI Image)
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झारखंड हम सबके लिए बेहद खास प्रदेश है. जनजातीय बहुल प्रदेश है. बीजेपी के समय में कई निर्णय झारखंड के विकास को लेकर हुए, लेकिन यहां बहुत काम करने की जरूरत है. यहां काफी समय से कार्यसमिति की बैठक ही नहीं हुई थी. उसको शुरू करवाया हूं. बांग्लादेशी घुसपैठ बड़ी चुनौती है. जबसे JMM की सरकार है, घुसपैठिए लाभ उठा रहे हैं. झारखंड बीजेपी के नवनियुक्त प्रभारी गजेंद्र सिंह पटेल ने जी मीडिया से खास बातचीत में ये सब मुद्दे उठाए. गजेंद्र सिंह पटेल से खास बातचीत की जी बिहार झारखंड के स्थानीय संपादक धीरज ठाकुर ने. पढ़ें पूरा इंटरव्यू

झारखंड आपको कैसा लगा?

झारखंड हमारे लिए महत्वपूर्ण प्रदेश है. वाजपेयी जी की सरकार के समय में इसकी स्थापना की गई. यह जनजातीय प्रदेश है और उनके विकास के लिए ही अलग राज्य की स्थापना की गई थी.

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बीजेपी के नजरिए से अगर आप झारखंड को देखते हैं तो क्या महसूस करते हैं?

बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व का आभार मानता हूं कि मुझे झारखंड प्रदेश का प्रभारी बनाया. प्रभारी बनने के बाद जब मैं आया तो सबसे पहले बिरसा मुंडा जी के जन्मस्थान गया और उनका आशीर्वाद किया. अंग्रेजों के खिलाफ उन्होंने जो लड़ाई लड़ी थी, उसको याद किया. फिर लोगों से मिलना शुरू हुआ. कुछ दिनों पहले हमने प्रदेश की कार्यसमिति भी शुरू की. लंबे समय से इसकी बैठक नहीं हो पाती थी. झारखंड में विकास की बहुत संभावनाएं हैं. वाजपेयी जी ने इस प्रदेश को अलग कर सोचा था कि इसका विकास करना है. हमारी सरकार ने यहां विकास कार्य कराने शुरू किए, लेकिन पिछले कुछ समय से झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार चल रही है. अभी इस प्रदेश में विकास की बहुत आवश्यकता है. अभी वर्तमान में संगठन को ठीक से खड़ा करना, मोर्चों का गठन आदि की प्रक्रिया चल रही है.

झारखंड में बीजेपी के लिए क्या चुनौती महसूस होती है आपको, युवाओं को लेकर आप क्या कहेंगे?

एक तो झारखंड में कई प्रकार की चुनौतियां हैं. यह एक बॉर्डर प्रदेश है. बांग्लादेशी घुसपैठिए यहां की बड़ी चुनौती बन गए हैं. जब से हेमंत सोरेन की सरकार बनी है, तब से इसमें तेजी आई है. जनजातीय समुदाय यहां बड़ी आबादी में है. यहां कई सारी क्रांतियां हुई हैं. जनजातीय समुदाय को विकास से जोड़ने के लिए मोदी सरकार कोशिश कर रही है.

पार्टी और संगठन के स्तर पर क्या दिक्कत है कि 2019 के बाद आपलोग वापस नहीं आ पा रहे?

हमारी पार्टी और कार्यकर्ता मजबूती से काम कर रहे हैं. पिछले चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार लोक-लुभावन नारे देकर सरकार जीत गई, लेकिन अब वादों को पूरा नहीं कर पा रही है. परीक्षा के पेपर लीक हो गई. जेपीएससी भंग की जा चुकी है. जेएसएससी की परीक्षाएं सवालों के घेरे में है.

2019 में हेमंत सरकार आई और 2024 में रिपीट हुई, तो क्या यह माना जाए कि आदिवासी समाज बीजेपी से दूर होता जा रहा है?

निश्चित रूप से ऐसा नहीं कहा जा सकता है. आदिवासी समाज के लिए हमारी केंद्र सरकार ने बहुत काम किया. 2019 और 2024 के परिणामों की हम समीक्षा कर रहे हैं. बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा के अलावा रघुवर दास सरकार में भी आदिवासियों के लिए बेहतर काम किए गए. आने वाले समय में हम सभी विषयों को दुरुस्त करते हुए आगे बढ़ेंगे

पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने युवाओं को फोकस करने की बात कही है. इसके लिए कोई स्ट्रैटजी है क्या?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का मंत्रिपरिषद देखें तो कई सारे युवाओं को मौका दिया गया है. आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जी की टीम देखें तो उसमें भी युवाओं को वरीयता दी गई है. पार्टी हमेशा युवाओं पर फोकस करती रही है. हम हर साल एक लाख नए युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ाने का काम करेंगे. झारखंड में युवाओं के लिए बहुत सारे मौके हैं. पीएम मोदी भी मन की बात के साथ में परीक्षार्थियों से संवाद करते रहते हैं. इन सबके अलावा भी हम युवाओं से जुड़ने के नए मौके तलाशते रहेंगे. ये सब चीजें नए तरीके से करने की कोशिश भी की जाएगी. कुछ और भी आइडियाज पर काम करेंगे. झारखंड में भी युवा प्रतिभाओं को संगठन में मौका देने के बारे में सोच रहे हैं.

झारखंड में एसआईआर के काम को लेकर क्या कहेंगे?

एसआईआर एक सामान्य प्रक्रिया है. आजादी के बाद 12 बार यह प्रक्रिया हो चुकी है. 10 बार कांग्रेस के समय में और 2 बार एनडीए के समय में यह प्रक्रिया हुई है. किसी का 2 नाम बार जुड़ा है, वो कटना चाहिए. मूल निवासियों के नाम कटने नहीं चाहिए. कोई पलायन कर गया है, शिफ्ट कर ​गया है, उसका नाम कटना चाहिए. झारखंड में कई जिले ऐसे हैं, जहां मूल निवासियों से ज्यादा की संख्या में घुसपैठिए आकर रह रहे हैं. उन्होंने मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वा लिया. हमारी पार्टी इसे गंभीरता से ले रही है. आदिवासी समाज के लोगों के नाम बिल्कुल नहीं कटने चाहिए, लेकिन घुसपैठियों के नाम नहीं होने चाहिए.

राहुल गांधी और विपक्ष के लोग तो वोट चोरी की बात कर रहे हैं. ज्ञानेश कुमार के बहाने सरकार को हटाने की बात कही जा रही है?

2014 से लेकर 2026 तक देश की जनता ने देख लिया कि विकास कैसा होता है. गांवों में भी गरीब कल्याण योजनाएं पहुंच रही हैं. जनता ने देखा कि विकास के काम हो रहे हैं तो देश के 70 प्रतिशत भूभाग पर भारतीय जनता पार्टी सरकार में आ गई. पहले ये लोग ईवीएम पर निशाना साधते थे. ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाए गए, सुप्रीम कोर्ट पर आरोप लगाए गए और अब एसआईआर पर सवालिया निशान लगाया जा रहा है. चुनाव आयोग खुद से नाम नहीं काटता है. बीएलओ अगर नहीं चाहेगा, तो किसी का नाम नहीं कटेगा. यह एक सामान्य प्रक्रिया है. आज भी एसआईआर में नाम घटाने और जोड़ने की सतत प्रक्रिया है. पश्चिम बंगाल में तो इन्हीं के सभी अधिकारी थे.

ज्ञानेश कुमार आपके साथ हैं, क्या इसलिए आपलोग जीत रहे हैं?

नहीं ऐसा नहीं है. केरल में चुनाव हुआ तो हम क्यों नहीं जीत गए?

गिरिडीह में उपचुनाव होने वाले हैं. बतौर प्रभारी आपका यहां पहला चुनाव है. आपलोगों की क्या रणनीति है?

इस चुनाव को लेकर प्रभारियों की नियुक्तियां कर दी गई हैं. प्रदेश सरकार के जितने अत्याचार, अनाचार और बलात्कार को लेकर हम जनता के बीच जाएंगे. हम विश्वास दिलाते हैं कि जनता भी चाहती है कि झारखंड में परिवर्तन होना चाहिए.

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इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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