)
Jharkhand Politics: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आंदोलन पर निशाना साधा और कांग्रेस को लेकर कई सीधे सवाल उठाए.उन्होंने कहा कि यह पूरा आंदोलन ज्ञानेश कुमार को हटाने का आंदोलन है. यह बांग्लादेशियों को भारत का नागरिक बनाने और उन्हें वोटर बनाने का आंदोलन है. उन्होंने कहा कि हर क्रिया की उतनी ही और वैसी ही प्रतिक्रिया होगी। राहुल गांधी जितना चाहें विरोध करते रहें. जब भारत के नागरिक खड़े होंगे और यह पहले ही असम में हो चुका है, जहां नेल्ली नरसंहार हुआ था, जिसमें बांग्लादेशियों से जुड़े आरोपों पर एक ही रात में सैकड़ों लोगों को जिंदा जलाकर मार दिया गया था, यह देश को गृहयुद्ध की ओर ले जा रहा है.
कांग्रेस में चुनाव को लेकर सवाल
निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी में पिछले 70 सालों में कौन सा चुनाव हुआ है. 1950-51 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के विरोध के बावजूद राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन वर्ष 1950 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे. नतीजा यह हुआ कि नेहरू ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी से इस्तीफा दे दिया. बाद में इंदिरा गांधी को अध्यक्ष बना दिया.
इंदिरा गांधी के समय भी हुआ था विवाद
उन्होंने कहा कि जब इंदिरा गांधी अध्यक्ष बनीं, तो उस समय एस. निजलिंगप्पा अध्यक्ष थे. उनके साथ मोरारजी देसाई से लेकर नीलम संजीव रेड्डी तक थे. उन्होंने ही इंदिरा गांधी को बाहर निकाल दिया. इसके बाद उन्होंने अपनी इंदिरा कांग्रेस बना ली. 1969 के बाद से आज तक कांग्रेस (आई) में कौन सा चुनाव हुआ है? किस डेलिगेट के आधार पर अध्यक्ष की नियुक्ति हुई? एक ही परिवार का कोई व्यक्ति अध्यक्ष होगा या लीडर ऑफ ऑपोजिशन होगा. यही हाल समाजवादी पार्टी का है. राजद का भी यही हाल है. जो लोग अपनी पार्टी में चुनाव नहीं करा सकते हैं, वे देश में लोकतंत्र की बात करते हैं.
बांग्लादेशियों को बसाने के षड्यंत्र का आरोप
वहीं, दूसरी बंग्लादेशियों को बसाने के षड्यंत्र वाले बयान पर उन्होंने कहा कि यह बंग्लादेशियों को बसाने का षड्यंत्र है. हम बहुत सी जगहों पर नहीं जाते हैं. हम हमेशा सरदार पटेल के पदचिन्हों पर चलते रहे हैं. आजादी की लड़ाई के दौरान, जब भी किसी बात का जवाब देने की जरूरत होती थी, तो सत्याग्रह किया जाता था. इसी तरह, जब भी मुझे किसी बात का जवाब देना होता है, तो मैं संथाल परगना आ जाता हूं. 1951 में आदिवासियों की जनसंख्या 45 प्रतिशत थी और यह 2011 में यह 25-26 प्रतिशत हो गई.
इनपुट: आईएएनएस