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झारखंड में ये क्या हो रहा है? देवघर सर्किट हाउस में रुके बाबूलाल मरांडी के कमरे को डुप्लीकेट चाबी से खोलने की कोशिश

जब पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के कमरे का ताला खोलने की कोशिश की जा सकती है, तो फिर आम आदमी का क्या कहें. उसकी सुरक्षा तो भगवान भरोसे ही है. राज्य के सबसे वीवीआईपी लोगों में से एक मरांडी अगर यह दावा कर रहे हैं तो फिर यह बहुत गंभीर बात है.

Reported By कुमार चंदन Written By कुमार चंदन
Published: Sep 29, 2026, 03:23 PM IST | Updated: Sep 29, 2026, 03:36 PM IST
Image Credit: बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री (File Photo)
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झारखंड के देवघर सर्किट हाउस में एक बड़ी वारदात सामने आई है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी सर्किट हाउस के जिस कमरे में रुके हुए थे, वहां स्टाफ की ओर से डुप्लीकेट चाबी से उस कमरे को खोलने की कोशिश की गई. उनके गार्ड रूम को भी डुप्लीकेट चाबी से खोलने की कोशिश की गई. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि देवाधिदेव महादेव की नगरी में देश ही नहीं विदेशों से भी लोग पहुंचते हैं और सर्किट हाउस में रुकते हैं. सवाल यह नहीं है कि क्या सामान चोरी हुआ और नहीं हुआ. बड़ा सवाल यह है कि देवघर के सर्किट हाउस में अगर इस तरह की घटना घटती है तो यहां की छवि देश और विदेश में किस तरह से देखी जाएगी.

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उन्होंने कहा कि यह बाबा बैजनाथ की नगरी है और इस तरह की घटना काफी दुखदायी है. इस पर देवघर पुलिस को और अविलंब कार्रवाई करनी चाहिए. साथ ही, देवघर उपायुक्त को भी इस पर संज्ञान लेकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देवघर के सर्किट हाउस में ईमानदार व्यक्ति की बहाली हो.

वहीं, पूरे मामले की सूचना मिलते ही नगर थाना प्रभारी दल-बल के साथ सर्किट हाउस पहुंचे और मामले की जांच की. अब यह बड़ा सवाल खड़ा करता है कि किस तरह से सर्किट हाउस में पूर्व मुख्यमंत्री का भी कमरा सुरक्षित नहीं है. वही, उस कर्मचारी के बारे में अभी जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है.

बता दें कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है. इसके तहत केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान उन्हें सुरक्षा प्रदान करते हैं.

जवाब मांगते सवाल

  1. डुप्लीकेट चाबी से कमरे का ताला खोलने की कोशिश करने का मकसद क्या था?
  2. क्या चोरी करना उसका मकसद था या फिर पूर्व मुख्यमंत्री को नुकसान पहुंचाने का इराद था?
  3. जब सर्किट हाउस जैसी सुरक्षित जगह पर पूर्व मुख्यमंत्री सुरक्षित नहीं हैं तो फिर राज्य के लोगों की सुरक्षा पर सवाल क्यों नहीं उठेंगे?
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About the Author

कुमार चंदन सीनियर जर्नलिस्ट हैं. पत्रकारिता में लगभग दो दशक का अनुभव रखते हैं. मुख्यत राजनीतिक खबरों की रिपोर्टिंग करते रहे हैं. इसके अलावा, अन्य सामाजिक खबरों से पर भी पैनी नजर रहती है. झारखंड में पत्रकारिता का लम्बा अनुभव है.
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