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'हमेशा के लिए प्रदर्शन स्थल को कब्जा करके नहीं रख सकते, किसान-ट्रेड यूनियन कहां जाएंगे?', प्रदर्शनकारियों से बोला सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में सीईसी ज्ञानेश कुमार के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देने वाली अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई हुई. इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हमेशा के लिए प्रदर्शन स्थल पर कब्जा करके नहीं रख सकते.

'हमेशा के लिए प्रदर्शन स्थल को कब्जा करके नहीं रख सकते, किसान-ट्रेड यूनियन कहां जाएंगे?', प्रदर्शनकारियों से बोला सुप्रीम कोर्ट
Image Credit: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन के लिए ऐसी जगह चुनी जाएं, जहां आजीविका पर संकट ना आए.

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस एक्शन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई.याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शनों के दौरान लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया, उनके साथ मारपीट की गई, और मेट्रो व ट्रेन सेवाओं पर पाबंदियां लगाकर अदालत की अवमानना ​​की गई.

सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे हर समय विरोध स्थल पर कब्जा करके नहीं रह सकते, क्योंकि अन्य प्रदर्शनकारी भी हो सकते हैं, जो विरोध प्रदर्शन के लिए उस जगह का इस्तेमाल करना चाहें.

'हमेशा के लिए कब्जा नहीं कर सकते'

सीजेआई ने कहा, 'आप हमेशा के लिए किसी जगह पर कब्जा करके नहीं रह सकते और भी प्रदर्शनकारी हैं. किसान, ट्रेड यूनियन, मजदूर आदि कहां जाएंगे? सभी को विरोध करने का अधिकार है. एक तय समय के लिए एक निर्धारित जगह दी जानी चाहिए और सभी को उन शर्तों का पालन करना होगा.

इन विरोध प्रदर्शनों में संसद की ओर मार्च करने की योजना और हिंसा की घटनाएं देखने को मिलीं. इसके साथ ही, दिल्ली के व्यापारियों ने भी एक अलग चुनौती पेश की. उनका कहना था कि लंबे समय तक चले इन प्रदर्शनों से कारोबार ठप हो गया और उनकी आजीविका पर बुरा असर पड़ा.

बेंच ने कहा कि किसी तय जगह पर विरोध-प्रदर्शन करने की अनुमति मिलने का मतलब यह नहीं है कि वहां अनिश्चित काल के लिए कब्जा कर लिया जाए.

'प्रदर्शन के कारण कारोबार को पहुंचा नुकसान'

अदालत 'किराना कमिटी दिल्ली' और व्यापारियों के अन्य संगठनों की ओ से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने इन संगठनों का पक्ष रखते हुए कहा कि राजधानी के कुछ हिस्सों में प्रदर्शनों के कारण कारोबार को नुकसान पहुंचा है, खासकर त्योहारी सीजन के दौरान. उन्होंने बेंच को बताया कि रामलीला मैदान कनॉट प्लेस के पास है और इसके आसपास के इलाके में लाखों लोग रहते हैं, साथ ही वहां कई दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी हैं.

रोहतगी ने अदालत से अनुरोध किया कि वह कोई ऐसा समाधान निकालें, जिससे व्यापार करने और आजीविका कमाने के अधिकार की रक्षा हो सके. इसमें छोटे व्यापारी, दिहाड़ी मजदूर और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर भी शामिल हैं. उन्होंने मांग की कि दिल्ली में अगले दो महीनों तक विरोध प्रदर्शनों और धरनों पर रोक लगाई जाए, चाहे वे अनुमति के साथ हों या बिना अनुमति के.

हालांकि, बेंच ने चेतावनी दी कि इस विवाद को ऐसे नहीं देखा जाना चाहिए, जिसमें किसी एक पक्ष को अपने अधिकारों का त्याग करना पड़े.

'रोजी-रोटी कमाने के अधिकार में ना आए रुकावट"

बेंच ने कहा, 'ये दो परस्पर अधिकार हैं. एक तरफ आपका व्यापार करने और आजीविका कमाने का अधिकार है, तो दूसरी तरफ किसी का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है.' उन्होंने आगे कहा कि आजीविका का अधिकार केवल व्यापार के मुनाफे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दिहाड़ी मजदूर और छोटे व्यापारी भी शामिल हैं.'
बेंच ने सुझाव दिया कि इसका हल यह हो सकता है कि विरोध-प्रदर्शनों के लिए ऐसी सार्वजनिक जगहें चुनी जाएं, जहां दूसरों की रोजी-रोटी कमाने के अधिकार में कोई बाधा न आए.

केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के लिए केवल एक दिन की अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उस जगह पर 17 दिनों तक कब्जा जमाए रखा और बाद में बिना अनुमति के संसद की ओर मार्च करने का आह्वान किया.

उन्होंने कहा कि जो लोग बंद या विरोध प्रदर्शन आयोजित करते हैं, उन्हें इसके नतीजों की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए. बेंच ने रोहतगी से कहा कि वे उन संगठनों को भी पक्षकार बनाएं, जिन्होंने प्रदर्शन आयोजित किए थे, क्योंकि अदालत के अलग-अलग दावों पर फैसला लेने से पहले उनका जवाब आना जरूरी है. अदालत ने उनसे यह भी कहा कि व्यापारियों को हुए आर्थिक नुकसान का आकलन रिकॉर्ड पर रखा जाए.

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About the Author

Rachit Kumar

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रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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