मुंबई के सेंट जेवियर्स के बाद दिल्ली के LSR से मास्टर्स... जानिए कौन हैं पेटल गहलोत, जो UN में दूसरी बार बनीं भारत की आवाज
UNGA में पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के झूठ की धज्जियां उड़ाने वाली IFS महिला अधिकारी ने ओसामा बिन लादेन से लेकर कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को बेनकाब कर दिया. जानिए कौन हैं पेटल गहलोत?
संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत ने राइट ऑफ रिप्लाई के जरिए जवाब दिया. भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के कश्मीर मुद्दे, आतंकवाद और वहां की राजनीतिक व्यवस्था को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई. यह लगातार दूसरा साल है, जब गहलोत ने शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत का पक्ष रखा है.
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया और सिंधु जल संधि का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अगर भारत पाकिस्तान के हिस्से के सिंधु जल को रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका रुख बदलने की कोशिश करता है, तो इसे पाकिस्तान युद्ध की कार्रवाई के तौर पर देखेगा. इसके बाद भारत ने राइट ऑफ रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के दावों पर जवाब दिया.
पेटल गहलोत का पाकिस्तान को करारा जवाब?
पेटल गहलोत ने जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान की टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि यह भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और आगे भी रहेगा. उन्होंने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. गहलोत ने कहा कि वहां की व्यवस्था सेना की, सेना द्वारा और सेना के लिए है. उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक चेहरे बदल सकते हैं, लेकिन असली फैसले कौन लेता है, इसे लेकर किसी प्रकार का भी भ्रम नहीं होना चाहिए. गहलोत ने पाकिस्तान में लोकतंत्र और मानवाधिकारों को लेकर किए गए दावों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की राजधानी में अपने ही लोगों से सुरक्षा के लिए सुरक्षा घेरा बनाया जा रहा है. भारत की ओर से सीमा पार आतंकवाद को लेकर भी सख्त संदेश दिया गया. गहलोत ने कहा कि आतंकवाद जारी रहा तो उसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.
27वें संविधान संशोधन का क्यों हुआ जिक्र?
गहलोत ने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन को भी अपने जवाब का हिस्सा बनाया. नवंबर 2025 में पारित इस संशोधन के तहत सेना प्रमुख की भूमिका और अधिकारों में बड़ा बदलाव किया गया. जनरल असीम मुनीर को चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का पद दिया गया और सेना के शीर्ष पद को लेकर कई संवैधानिक बदलाव किए गए. संशोधन में उन्हें कार्यकाल के बाद भी कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान भी शामिल था. गहलोत ने इसी बदलाव को पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था में सेना के प्रभाव के संदर्भ में उठाया.
ओसामा बिन लादेन का भी जिक्र
भारत की ओर से दिए गए जवाब में 11 सितंबर के आतंकी हमलों की 25वीं बरसी का भी उल्लेख आया. गहलोत ने ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान के एबटाबाद में पाए जाने की बात उठाई. एबटाबाद में पाकिस्तान की प्रमुख सैन्य अकादमी भी स्थित है. इस संदर्भ का इस्तेमाल उन्होंने पाकिस्तान के आतंकवाद और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को सामने रखने के लिए किया.
कौन हैं पेटल गहलोत?
पेटल गहलोत भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी हैं और फिलहाल न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र स्थित भारत के स्थायी मिशन में फर्स्ट सेक्रेटरी के पद पर तैनात हैं. अप्रैल 2026 के आधिकारिक मिशन रिकॉर्ड में भी उनका पद फर्स्ट सेक्रेटरी दर्ज है. वह जुलाई 2023 में न्यूयॉर्क स्थित भारतीय मिशन से जुड़ी थीं. इससे पहले जून 2020 से जुलाई 2023 तक उन्होंने विदेश मंत्रालय की यूरोप वेस्ट डिवीजन में अंडर सेक्रेटरी के तौर पर काम किया. सितंबर 2024 से सितंबर 2025 के बीच वह संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष के कार्यालय में सलाहकार के तौर पर भी काम कर चुकी हैं.
पढ़ाई और शुरुआती सफर
गहलोत ने मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस, सोशियोलॉजी और फ्रेंच लिटरेचर की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वुमन से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स किया. उन्होंने मिडिलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज एट मॉन्टेरी से लैंग्वेज इंटरप्रिटेशन एंड ट्रांसलेशन में भी मास्टर्स किया. संयुक्त राष्ट्र में उनकी मौजूदा भूमिका के दौरान वह कई बहुपक्षीय बैठकों में भारत का पक्ष रख चुकी हैं. अप्रैल और मई 2026 में भी वह भारत की ओर से अलग-अलग UN बैठकों में बयान दे चुकी हैं.
लगातार दूसरे साल UN में बनीं भारत की आवाज
पेटल गहलोत का इस साल का जवाब इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने लगातार दूसरे वर्ष शहबाज शरीफ के UNGA भाषण के बाद भारत की ओर से राइट ऑफ रिप्लाई दिया है. इस बार उनके बयान में कश्मीर के साथ-साथ पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था, 27वें संविधान संशोधन और सीमा पार आतंकवाद जैसे मुद्दे प्रमुख रहे.