पश्चिम बंगाल का नाम बदलने जा रहा है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य का दावा है कि बहुत जल्द इसका प्रस्ताव विधानसभा में लाया जाएगा. भट्टाचार्य ने बताया कि पश्चिम बंगाल को निकट भविष्य में 'पश्चिम बंग' के नाम से जाना जाएगा. पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 'पश्चिम बंग भवन' बनाने के प्रस्ताव पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए भट्टाचार्य ने कोई संकेत नहीं दिया, बल्कि एकदम स्पष्ट कहा कि राज्य को 'पश्चिम बंग' कहने का फैसला 'इसे इसके इतिहास से जोड़ने के लिए' लिया गया था.
बीजेपी नेता और सरकार के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य का नया नामकरण बंगाल की धरती, इसके प्राचीन इतिहास और सांस्कृतिक पहचान को सीधे तौर पर जोड़ने के लिए किया जा रहा है.
भट्टाचार्या ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे ये भी कहा, 'अब किसी को भी 'वेस्ट बंगाल' जैसे नाम लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि राज्य सरकार बहुत जल्द या विधानसभा के इसी सत्र में हमारे राज्य का नाम 'पश्चिम बंग' करने के लिए एक बिल पेश करेगी, जो इसके इतिहास के अनुरूप होगा.'
पीएम मोदी के वाराणसी स्थित कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल से हर साल भारी संख्या में बुजुर्ग, तीर्थयात्री और पर्यटक काशी विश्वनाथ के दर्शन करने आते हैं, उन सभी तीर्थयात्रियों को सुरक्षित, आधुनिक और सस्ती आवास सुविधा देने के लिए इस भवन का निर्माण हो रहा है.
आपको बताते चलें कि पश्चिम बंगाल का नाम बदलने का प्रस्ताव पहली बार 1990 के दशक के आखिर में आया था. तब से इसका नाम बदलने की कोशिशें जारी थीं, लेकिन अब सुवेंदु सरकार के कार्यकाल में आखिरकार राज्य का नाम बदलने जा रहा है.
बंगाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आजादी के बाद पहली बार राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव ज्योति बसु की लेफ्ट फ्रंट सरकार ने पश्चिम बंगाल का नाम 'पश्चिम बंग' रखने का प्रस्ताव रखा था. हालांकि उसके पहले नया नाम 'बांग्ला' रखने की मांग उठी थी. बसु सरकार ने यह प्रस्ताव तत्कालीन केंद्र सरकार को भेजते हुए कहा था कि औपनिवेशिक दौर वाला नाम हटाकर बंगाली लोगों को उनकी पहचान वाला नाम दिया जाना चाहिए, लेकिन केंद्र से इसकी मंजूरी नहीं मिल सकी थी.
आगे ममता बनर्जी की सरकार ने भी कई बार नाम बदलने की कोशिश की लेकिन उसे भी ये यश नहीं मिला. टीएमसी की सरकार ने 'बांग्ला' नाम चुना था, उसे भी केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिल पाई थी. आज पश्चिम बंगाल में भी डबल इंजन वाली बीजेपी सरकार है, इसलिए बहुत जल्द राज्य का नाम बदल सकता है.
गौरतलब है कि हाल ही में केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने के पीछे मुख्य दलील यह दी गई थी कि राज्य के आधिकारिक और संवैधानिक नाम को स्थानीय मलयालम भाषा, संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान के अनुरूप बनाया जाए. पश्चिम बंगाल का नाम 'पश्चिम बंग' करने के लिए यही भाषाई और सांस्कृतिक आधार बनाया गया है.