पश्चिम बंगाल उपचुनावः शुभेंदु का जलवा बरकरार! नंदीग्राम-रेजीनगर दोनों सीटों पर BJP प्रत्याशियों की बड़ी जीत
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर वोटों की गिनती जारी है. शुरुआती राउंड में ही दोनों सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों ने बड़ी जीत हासिल की. इससे बीजेपी राज्य में एक तरह से अपराजेय हो गई है.
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में वोटों की गिनती पूरी हो गई. रेजीनगर सीट पर बीजेपी उम्मीदवार शंकरावह सरकार जीत गए. वहीं , नंदीग्राम में बीजेपी कैंडिडेट हसीरानी रथ ने जीत हासिल की.
रेजीनगर में हुमायूं कबीर की विरासत खतरे में
रेजीनगर में बीजेपी उम्मीदवार की इतनी बढ़त इसलिए भी खास रही क्योंकि यह सीट अल्पसंख्यक बहुल्य है. यहां 65 प्रतिशत से अधिक मतदाता मुस्लिम समुदाय के हैं. यही वजह थी कि कांग्रेस ने इस सीट से मुस्लिम नेता मोहम्मद अब्दुल्लाहिल को मैदान में उतारा था. बता दें कि इसी साल हुए चुनाव में हुमायूं कबीर ने नाओदा और रेजीनगर, दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी. बाद में उन्होंने नाओदा सीट अपने पास रखने का फैसला किया और रेजीनगर विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था. इसी कारण इस सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा. अब उनके बेटे ही उनकी सियासी विरासत की रक्षा कर पाने में असफल साबित होते दिखाई दे रहे हैं.
नंदीग्राम में क्यों कराना पड़ा उपचुनाव?
दूसरी ओर, सीएम सुवेंदु अधिकारी की ओर से नंदीग्राम सीट छोड़ने पर उपचुनाव कराया गया है. बीजेपी ने इस सीट से सीएम शुभेंदु अधिकारी के पूर्व निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हसीरानी रथ पर दांव चला, जबकि कांग्रेस की ओर से मिलन प्रधान मैदान में हैं. पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस सीट से संचिता प्रधान डे को उतारा था, लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात करके अपना नामांकन वापस ले लिया था. इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस के मिलन प्रधान को अपना समर्थन देने की घोषणा की थी. कांग्रेस कैंडिडेट को ममता बनर्जी का साथ मिलने के बाद भी कोई खास फायदा होते नजर नहीं आया.
सत्तापक्ष-विपक्ष, दोनों के लिए अहम है यह उपचुनाव
बता दें कि दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को वोटिंग हुई थी. नंदीग्राम में 80.89 प्रतिशत और रेजीनगर में 80.08 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था. इन दोनों सीटों के लिए सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बड़े नेताओं की ओर से जोरदार चुनाव-प्रचार किया था. बीजेपी और सीएम शुभेंदु अधिकारी के लिए यह उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया था. वहीं, विपक्ष ने इस चुनाव के दौरान SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष ने चुनाव आयोग पर कथित रूप से वोट चोरी करने का बड़ा गंभीर आरोप लगाया है. यह उपचुनाव इस नैरेटिव के लिए में भी बड़ा अहम किरदार निभा सकता है.