दिल्ली में BRICS, मणिपुर में अमेरिकी राजदूत... सर्जियो गोर के दौरे के पीछे क्या है अमेरिका की रणनीति?
US Ambassador Sergio Gor Manipur Visit: भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर नई दिल्ली के भारत मंडपम पर आयोजित 18वें BRICS सम्मेलन के बीच अचानक मणिपुर पहुंचे हैं. इतने बड़े समिट के बीच उनके मणिपुर जाने का क्या कारण है?
Sergio Gor Manipur Visit: भारत की राजधानी दिल्ली में 18वें BRICS सम्मेलन का आयोजन हो रहा है. एक तरफ इस बड़े मंच पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग मौजूद हैं, तो वहीं अचानक भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर मणिपुर पहुंचे हैं. उनके इस दौरे ने कूटनीतिक हलचल मचा दी है कि आखिर जब भारत इतना अहम इंटरनेशनल समिट होस्ट कर रहा है, तब सर्जियो गोर हजारों किलोमीटर दूर पूर्वोत्तर की पहाड़ी पर क्या कर रहे हैं?
अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर शुक्रवार ( 11 सितंबर 2026) को मणिपुर पहुंचे थे. इसके बाद शनिवार को उन्होंने बिष्णुपुर जिले के प्रसिद्ध लोकतक लेक का दौरा किया. यहां उन्होंने बोट राइड का आंनद लिया और वहां के लोकल कल्चर और खूबसूरती की जमकर तारीफ की.
अचानक मणिपुर क्यों पहुंचे सर्जियो गोर?
सर्जियो गोर का यह दौर BRICS की हलचल के बीच बेहद शांत और पूर्व-निर्धारित बताया जा रहा है. सोचने वाली बात ये है कि BRICS को डेड यानी इनएक्टिव बताने वाले अमिरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ये दूत अचानक भारत के उस क्षेत्र पर गए हैं, जो पहले से ही अशांति झेल रहा है. इसे एक सोची-समझी डिप्लोमैटिक स्ट्रैटजी भी कहा जा सकता है. अमेरिका न तो BRICS को आगे बढ़ते हुए देखना चाहता है और न ही वह चाहता है कि दुनिया का ध्यान दिल्ली में हो रहे इस आयोजन पर पड़े, न ही इसके चर्चा हो.
BRICS समिट में सबसे ज्यादा ध्यान डॉलर के विकल्प, ग्लोबल ट्रेड और पश्चिमी प्रभुत्व के खिलाफ विकासशील देशों की संगठित होने पर है. ऐसे में अमेरिकी डिप्लोमैट्स के दिल्ली में सुर्खियों से दूर रहना एक स्ट्रैटजिक प्रोटोकॉल और लो प्रोफाइल रखने का प्रयास है. इसके जरिए अमेरिका दिखाना चाहता कि वह भारत की गुटनिरपेक्ष और मल्टी अलाइनमेंट पॉलिसी की समझ रखता है.
क्या है अमेरिका का प्लान?
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का अचानक मणिपुर दौरा केवल पर्यटन तक ही समित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा जियोपॉलिटिकल संकेत छिपा है. मणिपुर खासतौर से भारत की ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी का मेन गेट है. यग साउथ ईस्ट एशिया और म्यांमार के पास पड़ता है. ऐसे में अमेरिका के लिए यह इंडो पैसिफिक स्ट्रैटजी के लिए भी रणनीतिक महत्व रखता है. मणिपुर में पिछले कुछ समय से जारी तनाव के बाद अब एक अमेरिकी राजूत का वहां जाना ये मैसेज देता है कि वाशिंगटन पूरे भारत समेत उसके रणनीतिक सीमाओं वाले इलाकों से डायरेक्ट रिलेशन बनाने में इंटरेस्ट रखता है.
मणिपुर पर अमेरिका की नजर?
सर्जियो गोर के लोकतक झील में नौका विहार और वहां के स्थानीय लोगों के साथ मुलाकात के जरिए अमेरिका नॉर्थईस्ट में अपनी सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. एक तरफ दिल्ली के भारत मंडपम में BRICS देशों की बैठक तो वहीं अमेरिकी राजदूत के मणिपुर का दौरा यह दिखाता है कि आज के समय में डिप्लोमैसी केवल सम्मेलन कक्षों तक ही सीमित नहीं है. अमेरिका ने इस दांव के जरिए शोर-शराबे से हटकर नॉर्थईस्ट इंडिया में अपनी जमीनी मौजूदगी और डिप्लोमैसी प्राथमिकताओं का नया मैसेज दिया है.