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Symboisis University: महाराष्ट्र में नागपुर के सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से बीते दिनों एक मामला सामने आया था, जिसमें फैकल्टी मेंबर डॉक्टर अहमर अफक के खिलाफ छात्राओं को अश्लील मैसेज भेजने और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए उकसाने का आरोप लगा था. इसको लेकर कॉलेज ने प्रोफेसर के खिलाफ जांच के लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया है.
मामला तब सामने आया जब एक छात्रा ने अपने पिता को प्रोफेसर के कुछ मैसेज दिखाए. इसको लेकर पिता ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) की लोकल यूनिट से कॉन्टैक्ट किया, जिसने कॉलेज प्रशासन और नागपुर पुलिस आयुक्त के समक्ष मामला उठाया.
छात्राओं ने आरोप लगाया कि अफाक ने उन्हें अनुचित संदेश भेजे और नमाज पढ़ने, कुरान पढ़ने और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए उकसाया. जांच पूरी होने तक प्रोफेसर को छुट्टी पर भेज दिया गया है और उन्हें कैंपस में आने या एकेडमिक एक्टिविटी में हिस्सा लेने से रोक दिया गया है. यूनिवर्सिटी प्रोफेसर के हैदराबाद स्थित सिम्बायोसिस लॉ स्कूल में नौकरी के दौरान उनपर लगे आरोपों की भी जांच करेगी. इस घटना के चलते 17 अक्टूबर 2026 को कॉलेज के नागपुर कैंपस में विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
घटना के बीच पुलिस ने प्रदर्शनकारियों और यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन के बीच बातचीत में सहयोग दिया. जांच समिति ने भी 100 से ज्यादा छात्रों की मौजूदगी में एक खुली बैठक भी आयोजित की और उन्हें आश्वासन दिया कि आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी. पुलिस ने बताया कि नई जानकारी के अनुसार, आरोपों के संबंध में कोई FIR दर्ज नहीं की गई है.
इसी बीच, छात्रों, पूर्व छात्रों और पेरेंट्स ने मामले में निष्पक्ष जांच, छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों और सबूतों को बचाने की मांग करते हुए एक ऑनलाइन अपील शुरू की है. इस शिकायत में एक अन्य फैकल्टी मेंबर साकिब रसूल भट के प्रोफेसर के साथ संबंध और उसकी भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं. हालांकि, उनके खिलाफ अभी कोई मामला सामने नहीं आया है.
बता दें कि महाराष्ट्र में इसी साल की शुरुआत में एक और मामला सामने आया था, जिसमें नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की एक यूनिट में महिला कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न और इस्लाम धर्म में परिवर्तित होने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया था. आरोपियों में शामिल निदा खान पर एक महिला सहकर्मी को इस्लामी धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करने का आरोप लगा था.