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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मचे सियासी घमासान के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की श्रृंगेरी विधानसभा सीट से जुड़े मामले में चुनाव आयोग को जमकर फटकार लगाई है. दरअसल, श्रृंगेरी विधानसभा सीट पर 2023 में हुए चुनाव के मतगणना का वीडियो अब चुनाव आयोग के पास नहीं है. वीडियो गायब होने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव आयोग अपने ही रिकॉर्ड के खो जाने का दावा कैसे कर सकता है. कोर्ट ने साफ कहा कि अगर अगली तारीख तक रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया तो आयोग के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, कर्नाटक में 10 मई 2023 को विधानसभा चुनाव कराए गए थे. 13 मई को इसके नतीजे घोषित हुए थे. इस चुनाव में शृंगेरी विधानसभा के रिजल्ट में बड़ा उलटफेर देखने को मिला. शुरुआत में कांग्रेस के टीडी राजेगौड़ा को विजेता घोषित किया गया. उन्होंने बीजेपी कैंडिडेट डीएन जीवराज को महज 201 वोटों के मामूली अंतर से हराया था. बीजेपी प्रत्याशी ने इसे परिणाम को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दे दी. जिसके बाद अप्रैल 2026 में हाईकोर्ट ने दोबारा से पोस्टल बैलेट की गिनती करवाई, जिसमें राजेगौड़ा के वोट कम हो गए और जीवराज को विजेता घोषित कर दिया गया. 3 मई 2026 को चुनाव आयोग ने बीजेपी प्रत्याशी को विजेता घोषित कर दिया.
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस प्रत्याशी ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी. मई में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए फैसला आने तक विधायक पद पर बने रहने का आदेश जारी किया था. कांग्रेस प्रत्याशी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह 2023 की मूल मतगणना व पुनर्गणना दोनों की वीडियो रिकॉर्डिंग को देखना चाहते हैं. जब सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मतगणना के वीडियो फुटेज दिखाने को कहा तो उसकी ओर से वीडियो खो जाने की बात कही गई है. इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग यह कैसे कह सकता है कि उसका रिकॉर्ड खो गया है? आपका पूरा काम चुनाव कराना है और उसके दस्तावेज रखने हैं. कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर अगली सुनवाई में दस्तावेज नहीं दिखाएंगे, तो हम आपके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकालेंगे. हम इस तरह के कमजोर बहाने स्वीकार नहीं करेंगे.