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'पूर्ण राज्य' के मुद्दे पर JK में सरकार और ब्यूरोक्रेसी आमने-सामने, अफसरों ने स्पीकर को लिखी चिट्ठी; उमर अब्दुल्ला नाराज

Jammu Kashmir Full Statehood Proposal News: जम्मू-कश्मीर में 'पूर्ण राज्य' के मुद्दे पर सरकार और ब्यूरोक्रेसी आमने-सामने हैं. इस मुद्दे पर प्रदेश के टॉप ब्यूरोक्रेट्स ने असेंबली स्पीकर को चिट्ठी लिखकर प्रस्ताव का विरोध जताया.

Written By Devinder Kumar
Published: Sep 29, 2026, 04:09 AM IST | Updated: Sep 29, 2026, 04:15 AM IST
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Jammu Kashmir Full Statehood Proposal Bureaucrats Letter: जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य के दर्जे का प्रस्ताव पास होने के बाद से उथल-पुथल तेज है. सोमवार को इस मुद्दे पर जब असेंबली में चर्चा चल रही थी, उससे कुछ घंटे पहले स्पीकर अब्दुल रहीम राथेर को प्रदेश के शीर्ष नौकरशाहों की ओर से एक असाधारण पत्र मिला. उस पत्र में स्पीकर को बताया गया कि यह मामला विचाराधीन है. लिहाजा इस प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जा सकता.

मुख्य सचिव और विधि सचिव ने स्पीकर को भेजी चिट्ठी

प्रदेश के मुख्य सचिव अटल डुल्लू और विधि सचिव अचल सेठी ने विधानसभा सचिवालय को अलग-अलग ये पत्र भेजे. इसमें उन्होंने पूर्ण राज्य के दर्जे के प्रस्ताव को खारिज करने की मांग की थी. यह पत्र भेजने पर स्पीकर ने अपनी नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि संबंधित मंत्री की मंजूरी के बिना सीधे विधान सभा सचिवालय को इस तरह का पत्र भेजना नियमों का उल्लंघन है. ऐसा करके सदन को कमजोर करने की कोशिश की गई.

असेंबली के स्पीकर ने चिट्ठी का किया विरोध

विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथेर ने ब्यूरोक्रेट्स की चिट्ठी पर आपत्ति जताते हुए कहा, 'मुझे नहीं लगता कि इस तरह का कोई पूर्व उदाहरण मौजूद है, जब अफसरों ने संबंधित मंत्री की मंजूरी के बिना इस तरह पत्र लिखा हो. ऐसा करके सदन के कामकाज में बाधा डालने की कोशिश की गई.'

बताते चलें कि प्रदेश में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला प्रदेश के सीएम होने के साथ ही विधि विभाग के मंत्री भी हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें सूचित किए बिना सीधे स्पीकर को इस तरह का पत्र भेजना ठीक नहीं है. यह इस बात को दिखाता है कि राज्य के पास पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं है और नौकरशाही को कोई और नियंत्रित कर रहा है.

क्या किसी अन्य राज्य में ऐसा हो सकता है- उमर अब्दुल्ला

मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा, 'क्या किसी अन्य राज्य में ऐसा हो सकता है कि वहां पर मुख्यमंत्री कोई प्रस्ताव लाएं और उनकी सरकार के  नौकरशाह ही इसके खिलाफ काम करे. यह सिर्फ जम्मू कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेश में हो सकता है, जो सारी स्थिति की सच्चाई अपने आप बता रहा है. ऐसा करके प्रदेश के जनमत को अपमानित किया गया है.' 
 

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About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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