)
पिछले कुछ दशकों में भारत में वेलनेस उद्योग ने काफी बढ़ोतरी देखी गई है. पारंपरिक आयुर्वेदिक केंद्रो से लेकर आधुनिक लग्जरी स्पा तक आज के आधुनिक परिवेश और जीवनशैली के हिस्सा बन चुके हैं. हालांकि, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि देश में स्पा या मसाज सेंटर खोलने के लिए पूरे देश में एक सा कोई कानून नहीं है. राज्य के अनुरूप कानून में विभिन्नता देखने को मिलती है.
दरअसल, पिछले कुछ समय में स्पा सेंटर की आड़ में कई ऐसी गैर-कानूनी काम भी खबरें भी सामने आई हैं, जिसने कई सवाल खड़े किए हैं. कई बार लोगों के मन सवाल आता है कि क्या भारत में स्पा और मसाज पार्लर वास्तव में कानूनी है और उन्हें चलाने के लिए किन नियमों का पालन करना होगा. अपने इस आर्टिकल में हम इसके बारे में जानेंगे...
स्पा सेंटर खोलने या उसको चलाने के लिए पूरे देश में एक जैसा कोई कानून नहीं है. इसके मुख्य निमय राज्य सरकार, नगर निगम, स्थानीय पुलिस, शॉप्स एंड इस्टैब्लिशमेंट कानून (Shops and Establishment Act) के अनुसार तय किए जाते हैं. यही कारण है कि दिल्ली, महाराष्ट्र, यूपी, कर्नाटक जैसे राज्यों में संचालन और लाइसेंस की शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं.
लीगल असिस्ट नाम की एक वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, अगर कोई भी शख्स अपने शहर या गांव में स्पा सेंटर खोलने की सोच रहा है, तो उसको कुछ नियमों का पालना करना होगा. देश में कोई एक स्पा एक्ट न होने के कारण ऐसे सेंटर खोलने वालों को कई लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन लेने होते हैं. इसमें स्वास्थ्य, सुरक्षा, टैक्स और लेबर कानूनों से जुड़ी अनुमति होती है.
अगर आप देश के किसी भी हिस्से में स्पा या मसाज सेंटर खोलने की कोशिश कर रहे हैं, तो आपके पास केवल लाइसेंस होना काफी नहीं है, बल्कि उच्च पेशेवर और नैतिक मानकों का अनुपालन भी जरूरी होता है. स्पा या मसाज सेंटर में किसी प्रकार की अवैध गतिविधियों की अनुमति नहीं होती है. पिछले कुछ समय में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां पर स्पा की आड़ में वैश्यावृत्ति के मामले पकड़े गए. ऐसी गैर-कानूनी गतिविधियां पाए जाने की स्थिति में लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है. ऐसी स्थिति में कानून काफी सख्त है.

इसके अलावा उम्र संबंधी प्रतिबंधों का भी प्रतिष्ठानों को विशेष ध्यान रखना जरूरी हो जाता है. स्पा या मसाज सेंटर में काम करने वालों की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए. नाबालिगों को काम पर रखना श्रम कानूनों का उल्लंघन है. इसके अलावा कार्य के दौरान सभी कर्मचारियों को पहचान पत्र पहनना भी अनिर्वाय किया जाता है. बता दें कि इनमें से अधिकांश कानून दिल्ली में लागू हैं. देश के अलग-अलग राज्यों में कुछ कानून भिन्न हो सकते हैं.
नियमों के अनुसार, स्पा को मसाज और वेलनेस बिजनेस के तौर पर चलाना वैध माना जाता है, लेकिन उसके भीतर किसी भी प्रकार की गैर-कानूनी गतिविधियों को जगह नहीं दी जा सकती है. कई बार स्पा सेंटर्स में वैश्यावृत्ति जैसे मामले में भी सामने आए हैं. ऐसी स्थिति में सेंटर का लाइसेंस रद्द किया जाता है. बता दें कि न केवल स्पा सेंटर का लाइसेंस रद्द किया जाता है, बल्कि कई स्थिति में आपराधिक मुकदमा भी संचालक पर किया जा सकता है.
किसी भी स्पा में मसाज रूम के दरवाजे को लेकर भी अलग-अलग शहरों में भिन्न नियम निर्धारित किए गए हैं. स्वच्छता बनाए रखने और स्पा सुविधाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए विशिष्ट परिचालन दिशानिर्देश निर्धारित किए गए हैं. दरवाजों के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं. जैसे थेरेपी रूम के दरवाजों में अंदर से कोई ताला नहीं होना चाहिए. उन्हें खुला या पारदर्शी होना चाहिए. इससे अवैध गतिविधियों का संदेह नहीं रहता है.
इसके साथ ही सेंटर के प्रवेश द्वार खुले और आसान होने चाहिए. इसके साथ ही संबंधित अधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना के भी स्पा सेंटर की जांच कर सकते हैं और इसका विरोध नहीं किया जा सकता. सेंटर के प्रवेश द्वार, रिसेप्शन एरिया और गलियारों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाना अनिवर्य हो जाता है. हालांकि, थेरेपी वाले इलाके में निजता के कारण कैमरा नहीं लगाया जा सकता.
कई राज्यों के नियमों के अनुसार, स्पा सेंटर में आने वाले ग्राहकों का रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए. इससे पहचान संबंधी दस्तावेज और फोन नंबर शामिल है. दरअसल, इसका उद्देश्य किसी विवाद या जांच की स्थिति में यह पता लगाया जा सके कि कौन सा व्यक्ति किस दिन और किस समय सेंटर में आया था.