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हाल ही में मिली खुफिया चेतावनियों के सच साबित होने का एक बड़ा उदाहरण सामने आया है. उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में केरान सेक्टर के जुमगुंड इलाके में, नियंत्रण रेखा (LoC) पर चल रहे एक भीषण ऑपरेशन के दौरान दो आतंकवादी मारे गए. इन आतंकवादियों ने बर्फ में छिपने के लिए सेना जैसी सफेद वर्दी (कैमफ्लाज) पहन रखी थी. भारी बर्फबारी के बीच, सुरक्षाबल इस ऊंचाई वाले इलाके में अभी भी तलाशी अभियान चला रहे हैं. एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के अनुसार, भारतीय सेना के सतर्क जवानों ने बर्फ से ढके जुमगुंड सेक्टर में कुछ संदिग्ध हलचल देखी, जिसके बाद तड़के करीब 3 बजे मुठभेड़ शुरू हो गई. जवानों ने घुसपैठियों को ललकारा, लेकिन आत्मसमर्पण करने के बजाय वे भागने की कोशिश करने लगे और जवानों पर गोलीबारी शुरू कर दी.
'स्नो कैमफ्लेज' की चाल नाकाम
सेना ने सटीक जवाबी कार्रवाई की, जिससे दोनों आतंकवादी मारे गए. अधिकारियों ने बताया कि तीन से चार लोगों की हलचल देखी गई थी, और दुर्गम इलाके में अभी भी तलाशी अभियान जारी है. सबसे ज्यादा ध्यान घुसपैठियों के कपड़ों पर गया है. जमीनी रिपोर्टों से पता चलता है कि आतंकवादी सफेद वर्दी पहने हुए थे यह बिल्कुल वैसा ही विशेष 'स्नो कैमफ्लेज' गियर है, जिसका इस्तेमाल ऊंचाई वाले बर्फीले इलाकों में तैनात नियमित सैनिक करते हैं. ये सफेद सूट दो कामों में आते हैं. पहला- ये बर्फ से ढके माहौल में पूरी तरह घुल-मिल जाते हैं, जिससे प्रशिक्षित लोगों या निगरानी प्रणालियों के लिए भी इन्हें देख पाना बेहद मुश्किल हो जाता है. दूसरा- ये कड़ाके की ठंड से बचाते हैं, जो हाल ही में हुई भारी बर्फबारी के बाद जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले बर्फीले इलाकों में देखने को मिल रही है.
भारतीय जवानों को नहीं दे पाए चकमा
इस तरह के मिलिट्री-ग्रेड सफेद कपड़ों का इस्तेमाल काफी अहम है, क्योंकि यह आतंकवादियों का आम पहनावा नहीं है. सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि ऐसी विशेष वर्दी आमतौर पर सेना के जवानों को बर्फीले इलाकों में सर्दियों के दौरान ऑपरेशन के लिए दी जाती है. इससे साफ संकेत मिलता है कि इन घुसपैठियों को सीमा पार से सीधा लॉजिस्टिक सपोर्ट और निर्देश मिले थे. इसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के पास के इलाकों में सक्रिय पाकिस्तानी सेना या रेंजर्स के यूनिट भी शामिल हो सकती हैं. अधिकारियों ने बताया कि शवों और बरामद सामान की विस्तृत जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी, लेकिन शुरुआती आकलन से पता चलता है कि यह घुसपैठ की एक सोची-समझी कोशिश थी, जिसमें बाहरी मदद भी शामिल थी. इसका मकसद खराब मौसम भारी बर्फबारी और कम दृश्यता का फायदा उठाना था.
घुसपैठ को लेकर हाई अलर्ट
जुमगुंड सेक्टर, LoC के एक दूरदराज और अधिक ऊंचाई वाले इलाके में स्थित है, जहां साल के इस समय पहुंचना बहुत मुश्किल होता है. दो दिन पहले ही यहां भारी बर्फबारी हुई थी, जिससे छिपने के लिए अनुकूल हालात बन गए और निगरानी प्रणालियों की प्रभावशीलता भी कम हो गई. इन चुनौतियों के बावजूद, मौके पर तैनात सैनिकों की सतर्कता के कारण, घुसपैठियों का यह समूह भारतीय क्षेत्र में पूरी तरह दाखिल होने से पहले ही रोक दिया गया. यह ऑपरेशन ऐसे समय में हुआ है जब खुफिया एजेंसियों के रिपोर्ट के बाद पूरी LoC और उसके आसपास के इलाकों को 'हाई अलर्ट' पर रखा गया है. ताजा खुफिया रिपोर्टों के बाद, PoK से सर्दियों के दौरान घुसपैठ की बड़ी कोशिशों की चेतावनी के बाद, सुरक्षाबलों को नियंत्रण रेखा पर हाई अलर्ट पर रखा गया है.
PoK में फिर सक्रिय हुए टेरर कैंप
रिपोर्टों में कहा गया है कि सीमा पार PoK में आतंकी 'लॉन्च पैड' फिर से सक्रिय हो गए हैं. खुफिया जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान की ISI और रेंजर्स ने PoK में लगभग 9-10 लॉन्च पैड फिर से सक्रिय कर दिए हैं. यहां करीब 500 प्रशिक्षित आतंकवादी मौजूद हैं, जिनमें से 150 से अधिक आतंकवादी LoC के पास बने अग्रिम शिविरों में पहुंच चुके हैं. आतंकी समूह सर्दियों की भारी बर्फबारी से पहाड़ी रास्ते बंद होने से पहले, प्रशिक्षित आतंकवादियों को LoC के पार जम्मू-कश्मीर में भेजने की कोशिश कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि छोटे-छोटे मोबाइल समूह निगरानी और ड्रोन से बचने के लिए सुरंगों, बर्फ से ढके घने जंगलों सफेद छलावरण वाली वर्दी पहनकर और नदी के रास्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं.
पुंछ में हुई थी घुसपैठ की कोशिश
कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर के जुमगुंड इलाके में चल रही मुठभेड़, खुफिया जानकारी के सही होने की पुष्टि करती है. यहां सतर्क सुरक्षाबलों ने LoC के पास आतंकवादियों के एक समूह की गतिविधि को तब रोका, जब वे छल से घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे. इससे पहले की पुंछ में घुसपैठ की कोशिश नाकाम हुई थी. उस वक्त एक बारूदी सुरंग विस्फोट में LoC के उस पार एक संदिग्ध आतंकवादी मारा गया था. इसके बाद से ही उत्तरी कश्मीर और जम्मू संभाग के LoC इलाकों में संयुक्त घेराबंदी और तलाशी अभियान तेज कर दिए गए थे. पुंछ, राजौरी, कुपवाड़ा, उरी, गुरेज, केरन, माछेल और तंगधार जैसे सेक्टरों में गश्त दोगुनी कर दी गई है.
ठंड में घुसपैठ का खतरा बढ़ा
भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियों से मिलकर बने सुरक्षाबलों ने LoC से लेकर भीतरी इलाकों, कस्बों और शहरों तक कई स्तरों पर तैनाती कर रखी है, ताकि सीमा पार बैठे आतंकी आकाओं की किसी भी साजिश को नाकाम किया जा सके. मौजूदा ऑपरेशन में सेना जैसी सफेद कैमफ्लाज वाली वर्दी का इस्तेमाल, खुफिया एजेंसियों द्वारा बताए गए उस पैटर्न से बिल्कुल मेल खाता है, जिसमें छोटे और गतिशील समूह बर्फ की आड़ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं. इसके लिए वे खास तरह के कपड़ों का सहारा लेते हैं, जो न केवल उनकी गतिविधियों को छिपाते हैं, बल्कि कड़ाके की ठंड से भी बचाते हैं. सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की रणनीति से पता चलता है कि वे आतंकी पूरी तरह तैयार हैं और उन्हें बाहर से किस तरह का समर्थन मिल रहा है.
बर्फ से ढके जुमगुण्ड इलाके में ऑपरेशन अभी भी जारी है, इस बारे में और जानकारी का इंतजार है. इलाके में अगर उस समूह के बचे हुए कुछ आतंकवादियों हैं उनको भी ख़त्म करने के लिए ऑपरेशन जारी है. जुमगुंड में यह सफलतापूर्वक ऑपरेशन यह दिखाता है कि LoC के सबसे मुश्किल हिस्सों में भी तैनात हमारे जवान कितनी उच्च स्तर की सतर्कता और तैयारी के साथ मुस्तैद हैं.