'न्याय में दखल की ढाल नहीं बनेगी बोलने की आजादी': CJI सूर्यकांत पर विवादित पोस्ट को लेकर SC ने केरल कांग्रेस को भेजा नोटिस
यह नोटिस वकील विनीत जिंदल की उस शिकायत के आधार पर जारी हुआ है, जिसे 30 अक्टूबर को याचिका के रूप में दर्ज किया गया था. इस शिकायत में 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में राहुल गांधी और अन्य नेताओं की मौजूदगी में हुए प्रदर्शन और नारेबाजी की जांच कराने की मांग भी शामिल है.
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत पर सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक पोस्ट की गई थी. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केरल कांग्रेस को अदालत की अवमानना (कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट) का नोटिस भेजा है. शीर्ष अदालत ने पूछा है कि पार्टी के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट की गई एक सामग्री को लेकर उनके खिलाफ अदालत की अवमानना (क्रिमिनल या सिविल) की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए?
अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि बोलने की आजादी का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि कोई अदालत के सम्मान को ठेस पहुंचाए या उसके काम में दखल दे. कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि ऐसी हरकतों से सख्ती से निपटा जाएगा, क्योंकि देश में संविधान ही सबसे ऊपर है और कोई भी पार्टी या नेता उससे बड़ा नहीं हो सकता.
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) को जारी किए गए अवमानना का नोटिस में अदालत ने साफ कहा कि अदालती फैसलों की आलोचना हमेशा की जा सकती है, लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल न्याय प्रशासन के कामकाज में दखल देने के लिए ढाल के रूप में नहीं किया जा सकता, चाहे वह व्यक्ति या संगठन कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो.'
'संविधान से बड़ा कोई नहीं'
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा, 'अदालत के अधिकार और गरिमा को कमतर आंकने की किसी भी कोशिश से बेहद सख्ती से निपटा जाएगा.' संविधान की सर्वोच्चता पर जोर देते हुए पीठ ने टिप्पणी की कि देश में संविधान ही सबसे ऊपर है और कोई भी व्यक्ति या राजनीतिक दल इससे बड़ा नहीं हो सकता.
वकील की शिकायत पर एक्शन
यह पूरा मामला वकील विनीत जिंदल की उस शिकायत से शुरू हुआ, जो उन्होंने 13 अक्टूबर को चीफ जस्टिस को भेजी थी. सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक, 30 अक्टूबर को इस शिकायत को एक रिट याचिका के तौर पर दर्ज कर लिया गया. इसी याचिका पर संज्ञान लेते हुए अब कोर्ट ने अदालत की अवमानना (कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट) की यह कार्रवाई शुरू की है.
कोर्ट परिसर में प्रदर्शन की जांच की मांग
इस शिकायत में अदालत से इस बात की भी जांच कराने की मांग की गई है कि क्या 12 अक्टूबर 2026 की शाम को सुप्रीम कोर्ट परिसर में राहुल गांधी और अन्य राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी में हुआ राजनीतिक प्रदर्शन और नारेबाजी बिना किसी वैध अनुमति के की गई थी? साथ ही यह भी पता लगाने की अपील की गई है कि क्या इस विरोध प्रदर्शन के कारण वकीलों, मुकदमों से जुड़े पक्षकारों, न्यायिक अधिकारियों या अदालत के कर्मचारियों के आवागमन में कोई बाधा उत्पन्न हुई थी?
विवाद बढ़ा तो पोस्ट डिलीट
दरअसल, 12 अक्टूबर को 'कांग्रेस केरल' के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स से सीजेआई को लेकर एक पोस्ट शेयर किया गया था, जिसके सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई थीं. भारी आलोचना के बाद पार्टी ने इसे तुरंत डिलीट कर दिया था. इसके साथ ही विवादित पोस्ट डालने वाले जिम्मेदार व्यक्ति को भी जिम्मेदारी से हटा दिया गया.
केरल कांग्रेस ने दी सफाई
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने इस पूरे मामले को स्पष्ट करते हुए एक बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि पार्टी के आधिकारिक हैंडल से विवादित संदेश पोस्ट करने वाले व्यक्ति को पद से हटा दिया गया है. यह पोस्ट केपीसीसी नेतृत्व की जानकारी, सहमति या सलाह-मशविरे के बिना की गई थी. उन्होंने यह भी दोहराया कि न्यायपालिका की निष्पक्षता और सम्मान को लेकर कांग्रेस पार्टी के मन में कोई मतभेद या संशय नहीं है.
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