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जीत के जुलूस में हमला, अस्पताल ले जाने से रोका और... 5 साल बाद संदेशखाली में कब्र से निकला BJP नेता का शव

संदेशखाली में 5 साल पहले जीत के जुलूस के दौरान हुए हमले और लापता होने के मामले में बड़ा मोड़; कब्र से निकाला गया बीजेपी कार्यकर्ता का शव. जानिए पूरे मामले का घटनाक्रम और ताजा अपडेट.

Written ByRavindra Pratap Singh
Published: Sep 14, 2026, 04:56 PM IST|Updated: Sep 14, 2026, 06:43 PM IST
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जीत के जुलूस में हमला, अस्पताल ले जाने से रोका और... 5 साल बाद संदेशखाली में कब्र से निकला BJP नेता का शव

About the Author

    Ravindra Pratap Singh

    Ravindra Pratap Singh

    रवींद्र प्रताप सिंह ने साल 2015 में जागरण.कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा मौजूदा समय वो ज़ी न्यूज डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. अगस्त 2025 में उन्होंने ज़ी न्यूज ज्वाइन किया है. रवींद्र देश और दुनिया की खबरों के अलावा खेलों में क्रिकेट जगत और क्राइम की खबरों पर बेहतरीन पकड़ रखते हैं. इसके पहले रवींद्र रिपब्लिक भारत में इवनिंग शिफ्ट के इंचार्ज रहे और शाम की शिफ्ट संभालते हुए होम पेज की जिम्मेदारी रवींद्र के ऊपर थी. उससे पहले रवींद्र ने जनसत्ता और न्यूज नेशन में भी शाम की शिफ्ट और होम पेज की जिम्मेदारी बखूबी निभाई. इसके पहले रवींद्र ने 5 सालों तक पी7 और लाइव इंडिया जैसे न्यूज चैनलों में काम किया था. रवींद्र आकाशवाणी में काम करने का अनुभव रखते. अवध यूनिवर्सिटी से मॉस कम्युनिकेशन से पोस्ट ग्रेजुएट रवींद्र पिछले डेढ़ दशक से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. आप रवींद्र से जुड़ने के लिए Ravindra.Singh@India.com पर मेल कर सकते हैं या फिर फेसबुक पर संपर्क करने के लिए https://www.facebook.com/pintu.singh.397 और एक्स पर https://x.com/rs66533 रवींद्र से संपर्क किया जा सकता है. 
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    पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में 2021 विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा का एक पुराना मामला फिर सामने आया है. अदालत के आदेश पर बीजेपी कार्यकर्ता आस्तिक चंद्र दास के कंकाल अवशेष कब्र से बाहर निकाले गए हैं. इन्हें पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए अस्पताल भेजा गया है. परिवार का कहना है कि जांच से उनकी मौत की असली वजह सामने आ सकती है.

    आस्तिक चंद्र दास संदेशखाली के झांझनिया गांव के रहने वाले थे. चुनाव नतीजों के बाद हुई हिंसा के दौरान उनकी मौत हो गई थी. अब अदालत के आदेश के बाद उनके दफनाए गए अवशेष बाहर निकाले गए हैं. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, कंकाल निकालने की कार्रवाई मजिस्ट्रेट और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में की गई. पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई. इसके बाद अवशेषों को पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए अस्पताल भेज दिया गया.

    परिवार ने लगाया हमला और शव दफनाने का आरोप

    परिवार का आरोप है कि 2021 विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के दिन इलाके में तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने विजय जुलूस निकाला था. इसी दौरान आस्तिक चंद्र दास पर हमला किया गया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए. उनके बेटे सुब्रत दास का आरोप है कि पिता को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने से रोका गया. इसके बाद घर पर ही उनकी मौत हो गई. परिवार का यह भी दावा है कि घटना के बाद उनके घर के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई थी और बिना पोस्टमार्टम कराए शव दफनाने के लिए मजबूर किया गया.

    परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

    राज्य में प्रशासनिक बदलाव के बाद परिवार ने इस मामले को लेकर अदालत का रुख किया. अदालत के आदेश के बाद अब करीब पांच साल पुराने मामले में दोबारा जांच की प्रक्रिया शुरू हुई है. परिवार चाहता है कि फॉरेंसिक जांच के जरिए मौत की परिस्थितियों का पता लगाया जाए. साथ ही जरूरत पड़ने पर मामले की जांच सीबीआई से कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है.

    बीजेपी ने उठाए सवाल

    बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इस मामले को 2021 के चुनाव बाद हुई हिंसा से जोड़ते हुए राज्य प्रशासन पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यह घटना उस दौर में बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ हुए अत्याचारों का उदाहरण है. उनका आरोप है कि उस समय पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की. भट्टाचार्य ने कहा कि बीजेपी को न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी. कंकाल अवशेष निकाले जाने के बाद संदेशखाली के इस पुराने मामले ने एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है. अब पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट से यह साफ होने की उम्मीद है कि आस्तिक चंद्र दास की मौत किन परिस्थितियों में हुई थी.

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    West Bengal