पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में 2021 विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा का एक पुराना मामला फिर सामने आया है. अदालत के आदेश पर बीजेपी कार्यकर्ता आस्तिक चंद्र दास के कंकाल अवशेष कब्र से बाहर निकाले गए हैं. इन्हें पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए अस्पताल भेजा गया है. परिवार का कहना है कि जांच से उनकी मौत की असली वजह सामने आ सकती है.
आस्तिक चंद्र दास संदेशखाली के झांझनिया गांव के रहने वाले थे. चुनाव नतीजों के बाद हुई हिंसा के दौरान उनकी मौत हो गई थी. अब अदालत के आदेश के बाद उनके दफनाए गए अवशेष बाहर निकाले गए हैं. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, कंकाल निकालने की कार्रवाई मजिस्ट्रेट और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में की गई. पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई. इसके बाद अवशेषों को पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए अस्पताल भेज दिया गया.
परिवार ने लगाया हमला और शव दफनाने का आरोप
परिवार का आरोप है कि 2021 विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के दिन इलाके में तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने विजय जुलूस निकाला था. इसी दौरान आस्तिक चंद्र दास पर हमला किया गया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए. उनके बेटे सुब्रत दास का आरोप है कि पिता को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने से रोका गया. इसके बाद घर पर ही उनकी मौत हो गई. परिवार का यह भी दावा है कि घटना के बाद उनके घर के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई थी और बिना पोस्टमार्टम कराए शव दफनाने के लिए मजबूर किया गया.
परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया
राज्य में प्रशासनिक बदलाव के बाद परिवार ने इस मामले को लेकर अदालत का रुख किया. अदालत के आदेश के बाद अब करीब पांच साल पुराने मामले में दोबारा जांच की प्रक्रिया शुरू हुई है. परिवार चाहता है कि फॉरेंसिक जांच के जरिए मौत की परिस्थितियों का पता लगाया जाए. साथ ही जरूरत पड़ने पर मामले की जांच सीबीआई से कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है.
बीजेपी ने उठाए सवाल
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इस मामले को 2021 के चुनाव बाद हुई हिंसा से जोड़ते हुए राज्य प्रशासन पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यह घटना उस दौर में बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ हुए अत्याचारों का उदाहरण है. उनका आरोप है कि उस समय पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की. भट्टाचार्य ने कहा कि बीजेपी को न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी. कंकाल अवशेष निकाले जाने के बाद संदेशखाली के इस पुराने मामले ने एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है. अब पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट से यह साफ होने की उम्मीद है कि आस्तिक चंद्र दास की मौत किन परिस्थितियों में हुई थी.