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केरलम को 'भगवामय' करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है. संघ के स्वयंसेवक राज्य के गांव-गांव तक पहुंच चुके हैं और अपनी विचारधारा को बड़ी तेजी से विस्तार दे रहे हैं. संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने इसकी जानकारी दी है. इंदौर की धरती से हुंकार भरते हुए दत्तात्रेय होसबले ने बताया कि अपने कई कार्यकर्ताओं को गंवाने के बाद केरलम में संघ ने अपनी पकड़ मजबूत करने में कामयाबी हासिल की है. उन्होंने कहा कि जहां हिंदुओं की संख्या नगण्य है, वहां भी आज संघ की शाखा चल रही है. उन्होंने कहा कि केरलम में हमारे कई कार्यकर्ताओं की हत्या हुई, लेकिन आज साउथ केरलम के सभी गाव में संघ की शाखाएं लग रही हैं.
'केरलम के गांव-गांव तक पहुंची शाखा'
उन्होंने बताया कि केरल के 444 मंडलों के सभी गावों में हमारी शाखा है. उन्होंने कहा कि कुछ जगहों को फोकस करके हम प्रयत्न कर रहे हैं कि वहां मंडल के हर गांव में हमारी शाखा हो. होसबले ने बताया कि पहले बंगाल में संघ का काफी विरोध होता था. वहां संघ के कार्यकर्ताओं को टारगेट करके हत्याएं होती थीं और संघ की शाखा लगने का विरोध किया जाता था. आज वहां 150 गुणा हमारी शाखाएं बढ़ गई हैं. केरलम में भी काफी संघर्ष हुआ है और हमारे कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुई हैं. होसबले के बयान से जाहिर है कि केरलम में संघ बंगाल की तर्ज पर काम कर रहा है.
RSS ने उखाड़ फेंकी वामपंथी सरकार!
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केरलम में संघ की रोजाना 4500 से ज्यादा शाखाएं लगाती है. यह आंकड़ा भारत के अन्य राज्यों से कहीं अधिक है. रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में संघ ने तालुका से होते हुए गांव और मोहल्ले तक अपनी पहुंच बनाई है और इसकी सदस्यता लगातार बढ़ रही है. सियासी जानकारों के मुताबिक, ग्राउंड लेवल पर संघ की मेहनत के कारण ही इस साल हुए विधानसभा चुनाव में वामपंथियों के हाथों से सत्ता फिसल गई. बीजेपी को भले ही सत्ता हासिल ना हुई हो, लेकिन विधानसभा में उसकी संख्या तीन हो गई है. बीजेपी खुद इसे बड़ी कामयाबी मानती है.
संघ के बढ़ते दायरे का मतलब क्या?
सियासी जानकारों के मुताबिक, राज्य में बीजेपी को तीन सीटें हासिल होना बड़ी बात है, क्योंकि यहां 45 प्रतिशत आबादी मुसलमानों और ईसाइयों की है. वहीं, 55 फीसदी हिंदू कई धड़ों और विचारधाराओं में बंटे हुए हैं. हिंदुओं को एकजुट करने के लिए संघ काफी प्रयास कर रहा है. हालांकि, राज्य की बड़ी आबादी संघ को सामाजिक संगठन के तौर पर ही देखता है. यही वजह है कि बीजेपी अभी तक सत्ता से दूर है.