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न थकेंगे, न रुकेंगे! सीमा पर गश्त से लेकर दुश्मन की निगरानी तक, सेना के काम आएंगे रोबोटिक डॉग; अखनूर में तैनात

भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में रोबोटिक डॉग तैनात किए हैं. ये दुर्गम इलाकों में गश्त, दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और सैनिकों को खतरनाक अभियानों में मदद करेंगे.

Written By Tahir Kamran
Published: Nov 07, 2026, 07:28 PM IST | Updated: Nov 07, 2026, 07:33 PM IST
Image Credit: सेना के जरिए तैनात किए गए रोबोटिक डॉग्स की तस्वीर
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भारतीय सेना में हर दिन तकनीक के लिहाज से नए-नए बदलाव हो रहे हैं. ताजा खबर आई है कि जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में सरहदों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए रोबोटिक डॉग को तैनात किया गया है. इन रोबोटिक डॉग्स में कई खास तकनीक मौजूद हैं, जिनकी मदद से ये जवानों के काम को आसान करेंगे. हाल ही में भारतीय

इन डॉग्स की खासियत यह है कि ये मुश्किल पहाड़ी रास्तों और उन इलाकों में भी काम कर सकते हैं, जहां सैनिकों के लिए लगातार निगरानी करना चुनौतीपूर्ण होता है. इनमें लगे कैमरे और सेंसर आसपास की गतिविधियों की जानकारी रियल टाइम में जवानों को उपलब्ध कराने में मदद करेंगे. सेना इनका इस्तेमाल निगरानी के साथ-साथ एंबुश ऑपरेशन में करेगी.

क्या होता है एंबुश ऑपरेशन?

सीधे शब्दों में कहें तो एंबुश ऑपरेशन का मतलब घात लगाकर हमला करना होता है. सैन्य भाषा में कहें, तो जब फौजी किसी दुश्मन की संभावित आवाजाही वाले रास्ते पर छिपकर उसकी गतिविधियों का इंतजार करते हैं और सही मौका मिलने पर अचानक हमला करते हैं, तो इसे एंबुश यानी घात लगाकर हमला करना कहते हैं.

सामान ढोने में भी आएंगे काम

रोबोटिक डॉग्स की एक खासियत यह भी है कि इनकी मदद से सामान भी ढोया जा सकता है. संसद टीवी की 24 फरवरी 2026 की रिपोर्ट में एक रोबोटिक डॉग का वजन 51 किलोग्राम है और पेलोड क्षमता 10-15 किलोग्राम बताई गई है. ऐसे में जरूरत पड़ने पर इनकी मदद से गोला-बारूद और दूसरे जरूरी सामान को अग्रिम चौकियों तक पहुंचाने में बड़ी मदद मिलेगी.

रोबोटिक म्यूल की खासियतें क्या हैं?

चीन और यूक्रेन भी इस दिशा में आगे

भारत ही नहीं, इस दिशा में दुनिया की अन्य सेनाएं भी तेजी से कदम बढ़ा रही हैं. इनमें सबसे प्रमुख नाम चीन का है. चीन सैन्य अभ्यासों में रोबोटिक डॉग और मानवरहित वाहनों की क्षमताओं को परख रहा है. साथ ही यूक्रेन में इनका इस्तेमाल युद्ध के दौरान गोला-बारूद पहुंचाने और घायल सैनिकों को निकालने में हो रहा है. यूक्रेन में अक्टूबर 2026 में ऐसे रोबोटों ने 31398 मिशन पूरे किए.

यह भी पढ़ें: जहां हवा भी साथ नहीं देती, वहां उतरा भारत का 'गजराज'! चीन सीमा के पास 13,629 फीट पर लैंडिंग के पीछे क्या है बड़ी रणनीति?

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About the Author

Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
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