App

कौन हैं वनटांगिया? जिनके साथ हर साल दिवाली मनाते हैं सीएम योगी

सीएम योगी वनटांगिया समुदाय के बीच दीवाली मनाते हैं. इस बार भी सीएम योगी वनटांगिया समुदाय के बीच रहेंगे. हर साल सीएम योगी इन्हीं समुदाय के साथ दिवाली मनाते हैं. आइए जानते हैं इस समुदाय के बारे में....

कौन हैं वनटांगिया? जिनके साथ हर साल दिवाली मनाते हैं सीएम योगी
Image Credit: File Photo

सीएम योगी हर साल की तरह इस बार भी दिवाली मानने गोरखपुर जाएंगे. यहां जंगल तिकोनिया नंबर तीन के लोग बेसब्री से दीपावली का इंतजार कर रहे हैं. सीएम योगी वनटांगिया गांव के लोगों को 82.41 करोड़ रुपये की सौगात भी देंगे. इन पैसों से वनटांगिया गांव की बाहरी कनेक्विटिी के लिए इंटरलॉकिंग सड़क, कुसम्ही जंगल में ईको पार्क और पिपराइच में वैश्विक नगर बाजार का निर्माण किया जाएगा. ऐसे में आइए जानते हैं कौन हैं वनटांगिया? जिसके साथ सीएम योगी दिवाली मनाएंगे.

गोरखपुर में वनटांगिया समुदाय  

गोरखपुर मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर कुसम्ही जंगल के बीच वनटांगिया समुदाय के लोग रहते हैं. गोरक्षपीठ का उत्तराधिकारी बनने के बाद से सीएम योगी लगातार यहां दिवाली मनाते चले आ रहे हैं. इस बार भी सीएम योगी वनटांगिया समुदाय के लोगों के साथ ही दिवाली मनाएंगे. इसको लेकर गोरखपुर जिला प्रशासन तैयारियों में जुट गया है. गांव में साफ सफाई का काम किया जा रहा है. दिवाली पर सीएम योगी वनटांगिया समुदाय के लोगों को 82.41 करोड़ रुपये की 52 विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे.

कौन हैं वनटांगिया समुदाय?

वनटांगिया समुदाय का जीवन जंगलों के साथ जुड़ा रहा है. वनटांगिया समुदाय को ब्रिटिश शासन के दौरान जंगलों में पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए बसाया गया था. इनका ठिकाना जंगल में होता था. जंगल की देखभाल करके परिवार का भरण पोषण करते हैं. वनटांगिया समुदाय के बच्चों को शिक्षा के जरिए उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ. हालांकि, बाद में गोरक्षनाथ हिंदू विद्यापीठ के नाम से गांव में स्कूल बना. आज वनटांगिया समुदाय के बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं.

वनटांगिया कैसे पड़ा नाम?  

वनटांगिया शब्द का संबंध जंगल तैयार करने की एक विशेष पद्धति से है, जिसे टांगिया पद्धति कहा जाता है. आसान भाषा में समझें तो टांगिया पद्धति में नए पेड़ लगाए जाते थे. साथ ही खाली जमीनों में खेती की जाती थी. इससे एक तरफ पेड़ उगाए जाते थे. वहीं, खाली जमीन पर खेती कर फसल उगाई जाती थी. एक तरह का ये रोजगार का भी साधन था. इस व्यवस्था के तहत जंगलों में बसाए गए मजदूरों और उनके परिवारों को आगे चलकर वनटांगिया कहा जाने लगा.

अंग्रेजों ने क्यों बसाया था वनटांगिया समुदाय?

बता दें कि अंग्रेजों के शासन में रेलवे का तेजी से विस्तार हो रहा था. देश के अलग-अलग हिस्सों में रेल पटरियां बिछाई जा रही थीं, उस समय रेलवे लाइन के नीचे इस्तेमाल होने वाले लकड़ी के स्लीपर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर मजबूत लकड़ी की जरूरत पड़ती थी. इसके लिए जंगलों में साखू के पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई की गई. लगातार कटाई के कारण जंगलों का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हुआ और लकड़ी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए नए पेड़ लगाने की जरूरत महसूस हुई. इसी जरूरत को पूरा करने के लिए अंग्रेजों ने वन प्रबंधन की टांगिया पद्धति का इस्तेमाल किया.
 

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Amitesh Pandey

Amitesh Pandey

अमितेश कुमार पांडेय डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सीनियर सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले अमितेश को मीडिया जगत में 8 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.अमितेश के पास डेस्क एडिटिंग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी व्यावहारिक अनुभव है. अमितेश ने उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों- लखनऊ, प्रयागराज और गाज़ियाबाद में जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है. स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ पेपर अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान में काम करने का अनुभव है. अमितेश ने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रयागराज से की है.अमितेश पांडेय से आप amitesh.pandey@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप अमितेश से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
Read More