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दीपोत्सव से बदली हजारों परिवारों की तकदीर, अयोध्या में 30 लाख दीयों से बनेगा नया विश्व रिकॉर्ड

अयोध्या में 10वें दीपोत्सव को लेकर भव्य तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. राम की पैड़ी के 56 घाटों पर 30 लाख से ज्यादा दीये जलाए जाएंगे. दीपोत्सव से अयोध्या की धार्मिक पहचान के साथ स्थानीय कारीगरों, कुम्हारों, ग्रामीण महिलाओं और छोटे दुकानदारों को भी रोजगार मिल रहा है.

दीपोत्सव से बदली हजारों परिवारों की तकदीर, अयोध्या में 30 लाख दीयों से बनेगा नया विश्व रिकॉर्ड
Image Credit: प्रतिकात्मक तस्वीर (AI Photo)

राम की नगरी अयोध्या में होने वाला दीपोत्सव केवल दीप जलाने का आयोजन नहीं, बल्कि इस शहर की संस्कृति का उत्सव बन चुका है. पिछले 10 वर्षों से यहां दीपोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. हर साल इस उत्सव का हिस्सा बनने के लिए देश-विदेश से लाखों लोग अयोध्या पहुंचते हैं. छोटी दीपावली के मौके पर होने वाले दीपोत्सव के लिए इस बार भी अयोध्या धाम को पूरी तरह सजा दिया गया है. सरयू नदी के सभी 56 घाटों पर दीपों की सजावट की गई है. अयोध्या रोशनी से जगमगा उठी है. यहां 3D स्क्रीन पर रामायण के प्रमुख दृश्यों को दिखाया जा रहा है. आज के दीपोत्सव में शामिल होने के लिए देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन अयोध्या पहुंच रहे हैं. वहीं, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस दौरान मौजूद रहेंगे. रामनगरी में इस बार दीपोत्सव पर नया रिकॉर्ड बनने जा रहा है. राम की पैड़ी के 56 घाटों पर 30 लाख से ज्यादा दीये जलाए जाएंगे. अयोध्या में भव्य दीपोत्सव की शुरुआत 2017 में हुई थी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयोजित इस दीपोत्सव ने कई बार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है. इस साल आयोजन में लगभग 10 लाख लोगों के पहुंचने की संभावना है.

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2017 से 2026 तक 15 गुना बढ़ी दीयों की संख्या

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में योगी सरकार बनने के बाद पहली बार 1.71 लाख दीयों के साथ भव्य दीपोत्सव की शुरुआत हुई थी. अगले वर्षों में दीयों की संख्या लगातार बढ़ती गई. वर्ष 2019 में 4.04 लाख और 2020 में 6.06 लाख दीये जलाए गए. इसके बाद 2021 में 9.41 लाख दीयों से सरयू नदी के घाट जगमगा उठे. इसी तरह हर साल दीयों की संख्या बढ़ती चली गई. वर्ष 2022 में 15.76 लाख और 2023 में 22.23 लाख दीये जलाए गए. वर्ष 2024 का दीपोत्सव बेहद खास था, क्योंकि इसी साल रामलला के भव्य मंदिर का उद्घाटन हुआ था और करीब 500 वर्षों के बाद रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए थे. उस साल दीपोत्सव में 25 लाख से ज्यादा दीये जलाए गए और एक नया विश्व रिकॉर्ड बना. वहीं, वर्ष 2025 में एक साथ 26 लाख 17 हजार 215 दीये जलाए गए, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया. इसके अलावा सरयू तट पर एक साथ 2,100 लोगों ने महाआरती कर विश्व रिकॉर्ड बनाया. इस साल दीयों की कुल संख्या बढ़कर 30 लाख से ज्यादा हो गई है. देखा जाए तो वर्ष 2017 के मुकाबले दीपोत्सव में दीयों की संख्या करीब 15 गुना बढ़ गई है.

30 लाख दीयों से जगमगाएंगे रामनगरी के 56 घाट

रामनगरी में इस बार दीपोत्सव पर एक और नया रिकॉर्ड बनने जा रहा है. राम की पैड़ी के 56 घाटों पर 30 लाख से ज्यादा दीये जलाए जाएंगे. सरयू तट पर 2,100 बटुक महाआरती करेंगे. वहीं, 2,100 ड्रोन की मदद से रामायण पर आधारित विशेष शो का आयोजन होगा. आकर्षक रोशनी और रामायण के प्रसंगों से सजी प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या 10वें दीपोत्सव के भव्य आयोजन के लिए तैयार है.

दीपोत्सव से कुम्हारों और ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार

दीपोत्सव की शुरुआत से अयोध्या और उसके आसपास के लोगों को रोजगार का एक नया साधन मिला है. माटी कला से जुड़े कारीगरों और कुम्हारों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है. ये केवल मिट्टी के दीये नहीं हैं, बल्कि उन कारीगरों की उम्मीदों के प्रतीक हैं, जो कभी आर्थिक तंगी और मजबूरी का सामना कर रहे थे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2017 में शुरू हुए दीपोत्सव ने उन्हें एक नया बाजार दिया है. आज माटी कला से जुड़े हजारों परिवारों के लिए यह आयोजन आर्थिक मजबूती का बड़ा आधार बन गया है. दीये मिट्टी से बनते हैं, लेकिन उन्हें जलाने के लिए बाती और तेल की भी जरूरत होती है. यहीं से रोजगार का एक बड़ा तंत्र विकसित होता है, जिसमें ग्रामीण महिलाएं अहम भूमिका निभाती हैं. लाखों दीयों के लिए रुई की बातियां तैयार करने का काम स्थानीय स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं द्वारा किया जाता है. इससे होने वाली कमाई उनके स्वावलंबन और आत्मसम्मान का प्रतीक है. इसी तरह लाखों दीयों में डालने के लिए सरसों के तेल की जरूरत होती है. इससे स्थानीय कोल्हुओं और तेल मिलों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलता है, जिससे वहां काम करने वाले मजदूरों की आजीविका को सहारा मिलता है.

दीपोत्सव से बढ़ी छोटे दुकानदारों की कमाई

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नव्य, भव्य और दिव्य अयोध्या में आयोजित हो रहे दीपोत्सव ने स्थानीय कारोबार को भी नई ऊर्जा दी है. इस आयोजन में शामिल होने के लिए लाखों लोग अयोध्या पहुंचते हैं, जिससे छोटे दुकानदारों की कमाई बढ़ जाती है. दीपोत्सव की तैयारियां देखने राम की पैड़ी और घाटों पर पहुंच रहे लोग चाय की चुस्की ले रहे हैं, समोसे का स्वाद चख रहे हैं और झालमुड़ी का आनंद उठा रहे हैं. इसका सीधा फायदा घाटों पर रेहड़ी लगाने वाले छोटे दुकानदारों को मिल रहा है. सामान्य दिनों में 800 से 1,000 रुपये प्रतिदिन कमाने वाले दुकानदारों की आमदनी इन दिनों बढ़कर 2,800 से 3,200 रुपये तक पहुंच गई है. यानी दीपोत्सव की तैयारियों ने उनकी रोजाना कमाई को करीब तीन गुना कर दिया है.

अयोध्या की पहचान को मिली देश-दुनिया में नई ऊंचाई

स्थानीय लोगों का कहना है कि दीपोत्सव ने अयोध्या की पहचान को देश-दुनिया में एक नई ऊंचाई दी है. पहले भी अयोध्या धार्मिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध थी, लेकिन अब दीपोत्सव के दौरान यहां देश के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं. इससे स्थानीय दुकानदारों, होटल कारोबारियों और छोटे व्यापारियों को भी फायदा मिलता है. अयोध्या के निवासी होने के नाते हमें इस आयोजन पर गर्व है.

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दीपोत्सव की भव्यता देख गदगद हुए महिपाल

बम रसिया व नगाड़ा पार्टी के सदस्य महिपाल ने कहा कि वह श्रीकृष्ण की जन्मभूमि से चलकर भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या पहुंचे हैं. यहां विकास के साथ-साथ दीपोत्सव की भव्य तैयारियां देखकर वह बेहद खुश हैं. उन्होंने कहा कि अयोध्या में चारों तरफ प्रकाश ही प्रकाश दिखाई दे रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से दीपोत्सव को इतना भव्य और आकर्षक बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जितनी सराहना की जाए, वह कम है.

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झांकी ने बढ़ाया दीपोत्सव का उल्लास

दीपोत्सव के शुभ अवसर पर साकेत महाविद्यालय से सियाराम की भव्य झांकी निकाली गई, जिसे उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. ढोल-नगाड़ों की गूंज और कलाकारों के पारंपरिक नृत्य के साथ निकली इस शोभायात्रा ने पूरे शहर में दीपावली के उल्लास को चार चांद लगा दिए. इस भव्य आयोजन के दौरान उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि अयोध्या एक बार फिर इतिहास रचने की कगार पर है. दीपोत्सव को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. उन्होंने कहा कि झांकियां निकाली जा रही हैं और अयोध्या एक बार फिर इतिहास रचेगी.

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Rupak Kumar

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रुपक कुमार मिश्रा zee bihar Jharkhand की डिजिटल टीम में बतौर Sub-editor के तौर पर कार्यरत है. वे राजनीति, क्राइम, यूटिलिटी और रुटीन खबरों पर काम करते हैं. इसके अलावा, टेक्नोसिस मीडिया में इन्हें एक साल काम करने का अनुभव है. शिक्षा की बात करें तो राजर्षि टंडन ओपन यूनिवर्सिटी से इन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है.
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