आसमानी गिद्ध: हवा में 'बवंडर' या रडार पर 'खामोश सिकंदर', राफेल-Su 57 में कौन है फाइटर जेट्स का किंग
फ्रांस का राफेल या फिर रूस का एसयू 57. दोनों ही फाइटर जेट्स अपने-अपने सेगमेंट के मास्टर हैं. लेकिन क्या ऐसी खासियतें हैं, जो उनको एक-दूसरे से अलग बनाती हैं और जंग के मैदान में ज्यादा खूंखार. चलिए समझते हैं.
राफेल और Su-57. आसमान के दो महाबली. दोनों का डिजाइन अलग. बनाने के पीछे सोच अलग. टेक्नीक अलग. फ्रांस ने राफेल को एक मल्टीरोल 4.5-जेनरेशन एयरक्राफ्ट के तौर पर बनाया.इसे डॉगफाइट, स्ट्राइक, टोही और दूसरे मिशनों को अंजाम देने में महारत हासिल है. वहीं, रूस का Su-57 पांचवीं पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो स्टील्थ, एडवांस्ड एवियोनिक्स और एडवांस एयर-डिफेंस सिस्टम के खिलाफ लड़ाई लड़ सकता है.
कोई शक नहीं कि दोनों ही अव्वल एयरक्राफ्ट हैं. लेकिन सिर्फ स्पीड या हथियारों के आधार पर उनकी तुलना करने से पूरी तस्वीर नहीं दिखेगी. राफेल के पास ऑपरेशन का लंबा अनुभव और एक शानदार इलेक्ट्रॉनिक-वॉरफेयर सिस्टम है, जबकि Su-57 को कम विजिबिलिटी, अंदरूनी हथियार रखने की काबिलियत और नई पीढ़ी की कॉम्बैट टेक्नोलॉजी के आधार पर बनाया गया है.
अलग-अलग सोच वाले दो फाइटर
राफेल ने पहली बार 1991 में उड़ान भरी और 2004 में फ्रांसीसी नौसेना में शामिल हुआ, इसके बाद 2006 में फ्रांसीसी वायु सेना में शामिल हुआ. दसॉल्ट इसे एक 'ओमनीरोल' फाइटर बताता है जो एयर सुपीरियॉरिटी, एयर डिफेंस, टोही, जमीनी हमले और एंटी-शिप मिशन को अंजाम देने में सक्षम है.
जबकि Su-57 ने 2010 में अपनी पहली उड़ान भरी और यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन इसे पांचवीं पीढ़ी का मल्टीरोल फ्रंटलाइन एयरक्राफ्ट कहता है. इसे हवा, जमीन और समुद्र में मौजूद लक्ष्यों को निशाना बनाने और खराब मौसम, भारी जैमिंग और एयर-डिफेंस सिस्टम से सुरक्षित माहौल में ऑपरेशन करने के लिए डिजाइन किया गया है.
इनके बीच का अंतर समझना आसान है. राफेल पारंपरिक मल्टीरोल फाइटर कॉन्सेप्ट से तैयार हुआ, जिसमें लगातार एडवांस्ड सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताएं जोड़ी गईं. Su-57 को शुरू से ही पांचवीं पीढ़ी की खासियतों, खासकर कम विजिबिलिटी और इंटीग्रेटेड एवियोनिक्स के आधार पर डिजाइन किया गया था.
स्टील्थ से Su-57 को मिली बढ़त
राफेल के मुकाबले Su-57 का सबसे बड़ा फायदा इसका कम विजिबिलिटी वाला डिजाइन है. इसका आकार, मटेरियल और अंदरूनी हथियार रखने की जगहें इसके रडार सिग्नेचर को कम करने के लिए बनाई गई हैं, जिससे इसका पता लगाना और इस पर हमला करना मुश्किल हो जाता है.
रूसी मैन्युफैक्चरर रोस्टेक का कहना है कि Su-57 दुश्मन के रडार की नजर में कम आता है और यह एयरक्राफ्ट आधुनिक एयर-डिफेंस सिस्टम के खिलाफ ऑपरेशन कर सकता है. दूसरी ओर, राफेल का रडार सिग्नेचर भी कम है. दसॉल्ट का कहना है कि इसका आकार और मटेरियल कम रडार सिग्नेचर में मदद करते हैं, हालांकि सटीक तकनीकी जानकारी गोपनीय रखी गई है. हालांकि, यह पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर नहीं है.
यह अंतर 'बियॉन्ड-विजुअल-रेंज' कॉम्बैट (नजर से दूर की लड़ाई) में सबसे ज्यादा मायने रखता है. जिस एयरक्राफ्ट का पता लगाना मुश्किल होता है, उसे दुश्मन की पहचान करने, उसे ट्रैक करने और उस पर हमला करने के लिए ज्यादा समय मिल सकता है.
राफेल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर पर निर्भर
स्टेल्थ (छिपकर हमला करने की क्षमता) के फायदे का जवाब राफेल के पास उसके एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक-वॉरफेयर और सेंसर सुइट में छिपा है, इस एयरक्राफ्ट में SPECTRA लगा है, जो एक इंटीग्रेटेड सिस्टम है. इसे दुश्मन के रडार, मिसाइल और लेजर जैसे खतरों का पता लगाने, उनकी पहचान करने और उनकी लोकेशन जानने के लिए बनाया गया है. दसॉल्ट का कहना है कि SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग, इन्फ्रारेड और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक डिकॉय (धोखा देने वाले डिवाइस) और बचाव के लिए पैंतरेबाजी के जरिए पायलट की मदद कर सकता है. इसके थ्रेट लाइब्रेरी को ऑपरेटर अपडेट भी कर सकते हैं.
राफेल RBE2 AESA रडार का भी इस्तेमाल करता है, जो मुश्किल जैमिंग वाले माहौल समेत अलग-अलग स्थितियों में कई टारगेट का पता लगा सकता है और उन्हें ट्रैक कर सकता है. इसका फ्रंट सेक्टर ऑप्ट्रोनिक्स सिस्टम पैसिव विजिबल और इन्फ्रारेड डिटेक्शन और ट्रैकिंग की सुविधा देता है.
इससे राफेल को एक मजबूत डिफेंसिव पैकेज मिलता है. हो सकता है कि इसमें Su-57 जैसी स्टेल्थ क्षमता न हो, लेकिन इसे खतरों का पता लगाने, उन्हें समझने और कई सिस्टम के एक साथ काम करने के जरिए उन पर प्रतिक्रिया देने के लिए डिजाइन किया गया है.
सेंसर इंटीग्रेशन का मास्टर है Su-57
Su-57 भी एक इंटीग्रेटेड एवियोनिक्स आर्किटेक्चर का इस्तेमाल करता है. UAC का कहना है कि इसके ऑनबोर्ड सिस्टम ऑटोमेटेड कॉम्बैट फंक्शन में मदद करते हैं और ग्राउंड कमांड सिस्टम और दूसरे एयरक्राफ्ट के साथ रियल-टाइम जानकारी के लेन-देन की सुविधा देते हैं.
इस एयरक्राफ्ट को खुद से (ऑटोनॉमस रूप से) और बाहरी कंट्रोल के तहत काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह जरूरी है क्योंकि एडवांस एयर फाइट तेजी से फाइटर जेट, एयरबोर्न सेंसर और कमांड नेटवर्क के बीच जानकारी साझा करने पर निर्भर करता है. हालांकि, Su-57 की सटीक डिटेक्शन रेंज, रडार परफॉर्मेंस और रडार क्रॉस-सेक्शन के बारे में भरोसेमंद सार्वजनिक जानकारी बहुत कम है. इसलिए, सटीक आंकड़े देने वाले दावों को सावधानी से देखा जाना चाहिए, जब तक कि उनके बारे में आधिकारिक तकनीकी जानकारी न मिले.
कागज पर राफेल ज्यादा तेज
राफेल की बताई गई अधिकतम रफ्तार Mach 1.8 है. दसॉल्ट इसके अधिकतम टेक ऑफ वजन को 24.5 टन, बाहरी लोड क्षमता को 9.5 टन और दो इंजन बताता है जो हर एक 7.5 टन का थ्रस्ट पैदा करते हैं.
Su-57 के लिए पब्लिक स्पेसिफिकेशन अलग-अलग सोर्स और कॉन्फिगरेशन के हिसाब से अलग-अलग होते हैं, इसलिए सीधे संख्यात्मक तुलना सावधानी से की जानी चाहिए. हालांकि, इसके ट्विन-इंजन डिजाइन और एयरोडायनामिक लेआउट को तेज गति और पैंतरेबाजी की क्षमता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था.
रफ्तार किसी एयरक्राफ्ट को लड़ाई वाले इलाके में तेजी से पहुंचने या लड़ाई के दौरान अपनी स्थिति बदलने में मदद कर सकती है. लेकिन एडवांस एयरवॉर में, ज्यादा रफ्तार शायद ही कभी निर्णायक होती है. डिटेक्शन, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सिचुएशनल अवेयरनेस (हालात की समझ) ज्यादा मायने रख सकते हैं.