CEC विवाद के बीच एक्शन में मोदी सरकार, देश में 4 नए राज्यपालों की नियुक्ति; दो गवर्नर के बदले गए कार्यक्षेत्र
New Governors Appointments: राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने 4 नए राज्यपालों की नियुक्ति के साथ ही मौजूदा 2 राज्यपालों के कार्यक्षेत्र में बदलाव भी किया है. हरियाणा में बीजेपी नेत्री रहीं डॉक्टर सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया है.
President Droupadi Murmu appointed Four New Governors: देश में 4 नए राज्यपालों की नियुक्ति के साथ ही दो राज्यपालों के कार्यक्षेत्र में फेरबदल किया गया है. राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने सोमवार देर शाम इस फेरबदल से जुड़े आदेश जारी किए. राजभवन की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, सिक्किम के गवर्नर ओम प्रकाश माथुर को अब केरलम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. उनकी जगह पर दुष्यंत गौतम को अब सिक्किम का नया राज्यपाल बनाया गया है.
आर्लेकर को सौंपी गई तमिलनाडु की कमान
वहीं केरलम के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर का ट्रांसफर तमिलनाडु में किया गया है. आरएन रवि के पश्चिम बंगाल तबादले के बाद से तमिलनाडु में राज्यपाल का पद खाली था और आर्लेकर कार्यवाहक गवर्नर के रूप में वहां का पदभार संभाल रहे थे.
डॉक्टर सुधा यादव कर्नाटक की गवर्नर नियुक्त
इन दो तबादलों के अलावा राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने 4 राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति भी की. बृज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल बनाया गया है. वहीं डॉक्टर सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. डॉक्टर ढाल सिंह बिसेन उत्तराखंड और दुष्यंत गौतम को सिक्किम का गवर्नर बनाया गया गया है. राष्ट्रपति के आदेश के बाद अब चारों राज्यपाल अपने संबंधित राज्यों में जाकर शपथ लेंगे. इसके साथ ही उनका 5 साल का कार्यकाल शुरू हो जाएगा.
बताते चलें कि राज्यपालों का अधिकतम कार्यकाल 5 वर्ष या राष्ट्रपति की अनुकंपा तक रहता है. केंद्र सरकार जब चाहे राष्ट्रपति को सिफारिश भेजकर किसी भी राज्यपाल का दूसरे राज्य में तबादला कर सकती है या फिर समयावधि से पहले उनकी सेवा समाप्त कर सकती है. केंद्र के इस फैसले को किसी भी कोर्ट में चैलेंज नहीं किया जा सकता.
राज्यपाल के रूप में कौन हो सकते हैं नियुक्त?
राज्यपाल पद के लिए संवैधानिक रूप से कोई खास नियम शर्तें नहीं बताई गई है. केंद्र सरकार जिसे भी उपयुक्त समझे, उसे इस पद पर तैनात कर सकती है. आमतौर पर राज्यपालों की तैनाती में सत्तारूढ़ पार्टी के रिटायर्ड राजनेताओं को तरजीह दी जाती है. लेकिन राज्य की जरूरत के अनुसार रिटायर्ड सेना या पुलिस अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी या चर्चित शख्सियतों को भी इस पद पर तैनात किया जा सकता है.
नियुक्ति के बाद राज्यपालों को केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है. वह केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक पुल की तरह काम करता है. राज्य का संवैधानिक मुखिया होने के बावजूद उसके पास कोई कार्यकारी शक्ति नहीं होती और वह राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली अनुशंसाओं के आधार पर कामकाज चलाता है.