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गांधी जयंती से देश में बंद होंगे मीट के विज्ञापन? PETA इंडिया ने केंद्र सरकार से की बड़ी मांग, लेटर में क्या-क्या लिखा?

'पेटा इंडिया' ने मांग की है कि 2 अक्टूबर से टीवी, इंटरनेट, होर्डिंग्स और बाकी जगहों पर मीट के विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए. संस्था ने यह मांग क्यों की? पेटा आखिर क्या है? आइए जान लेते हैं...

Written By Bhoopendra Rai
Published: Sep 28, 2026, 05:02 PM IST | Updated: Sep 28, 2026, 06:08 PM IST
Image Credit: अक्टूबर से टीवी, इंटरनेट, होर्डिंग्स और बाकी जगहों पर मीट के विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक की मांग.
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क्या 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से देश में मीट के विज्ञापनों पर ताला लगने वाला है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि पशु अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था 'पेटा इंडिया' ने केंद्र सरकार से एक बड़ी अपील की है. 28 सितंबर को खबर आई है कि पेटा ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें 2 अक्टूबर से टीवी, होर्डिंग्स और इंटरनेट पर दिखने वाले मांस के सभी विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाने की अपील की गई है.

'पेटा इंडिया' का कहना है कि भारत हमेशा से दुनिया को शाकाहार और करुणा की सीख देता रहा है. ऐसे में बापू की अहिंसा का सम्मान करते हुए इन विज्ञापनों को तुरंत बंद किया जाना चाहिए, जिससे न सिर्फ बेजुबानों पर क्रूरता थमेगी, बल्कि पर्यावरण और इंसानी सेहत को भी बड़ा फायदा होगा. पेटा इंडिया की सीनियर मैनेजर डॉ. किरण आहूजा ने कहा कि देश में मीट के विज्ञापनों पर रोक लगनी चाहिए. भारत हमेशा से दुनिया को दयालु, सेहतमंद और शाकाहारी खान-पान की सीख देता रहा है. ऐसे में इन विज्ञापनों को बंद करना ही गांधीजी की अहिंसा की सोच को असली सम्मान देना होगा.

यूरोपीय शहरों और ब्रिक्स सम्मेलन का दिया हवाला

पेटा ने अपने लेटर में यूरोप के कई बड़े शहरों का एग्जाम्पल दिया है. संस्था ने बताया कि एम्स्टर्डम, हार्लेम, यूट्रेक्ट और निजमेगेन जैसे शहरों में पर्यावरण को बचाने के लिए मांस के विज्ञापनों पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है. पेटा ने ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का भी जिक्र करते हुए याद दिलाया कि इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब दुनिया भर के दिग्गज नेताओं की मेजबानी की थी, तब उन्हें पूरी तरह शाकाहारी खाना ही परोसा गया था.

पेटा इंडिया ने अपनी जांच का हवाला देते हुए स्लॉटर हाउस और जानवरों को ढोने के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. संस्था का आरोप है कि कसाईखानों में मुर्गियों को होश में रहते हुए ही काट दिया जाता है. गाड़ियों में क्षमता से कहीं ज्यादा मवेशी और भैंसें ठूंसकर ले जाए जाते हैं, जबकि बकरियों, भेड़ों और सूअरों के साथ भी बेहद बेदर्दी से पेश आया जाता है.

गंभीर बीमारियों को लेकर आगाह किया

पेटा ने अपने पत्र में बीमारियों के बड़े खतरे को लेकर भी आगाह किया. संस्था का कहना है कि जिस तरह से पोल्ट्री फार्मों में मुर्गियों और जानवरों को रखा जाता है, उससे H5N1 बर्ड फ्लू जैसी महामारियां और संक्रामक बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं. एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और खराब खान-पान से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है.

2050 तक भारत में गंभीर परिणाम की चेतावनी

पेटा ने दुनिया भर के आंकड़ों का हवाला देते हुए एक गंभीर चेतावनी भी दी है. संस्था के मुताबिक, दुनिया की करीब 73 फीसदी एंटीमाइक्रोबियल (एंटीबायोटिक) दवाएं इंसानों को नहीं, बल्कि खाने के लिए पाले जाने वाले जानवरों को दी जा रही हैं. जानवरों में इन दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस बढ़ रहा है, जिसकी वजह से साल 2050 तक अकेले भारत में करीब 20 लाख लोगों की जान जा सकती है.

पेटा इंडिया ने अपने पत्र में यह भी याद दिलाया कि भारत सदियों से अहिंसा और शाकाहार की परंपरा पर चलता आया है और दुनिया में सबसे ज्यादा शाकाहारी लोग यहीं रहते हैं. इसीलिए 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से ही इस प्रतिबंध को लागू कर दिया जाए, ताकि टीवी, होर्डिंग्स और सोशल मीडिया पर दिखने वाले मांस के सभी विज्ञापनों पर पूरी तरह ताला लग सके.

पेटा ने 2 अक्टूबर की ही तारीख क्यों चुनी?

इसकी सबसे बड़ी वजह हैं महात्मा गांधी. 2 अक्टूबर को बापू की जयंती है, जिन्होंने पूरी दुनिया को अहिंसा का पाठ पढ़ाया. गांधीजी हमेशा कहते थे कि अहिंसा सिर्फ इंसानों के लिए नहीं, बल्कि हर बेजुबान जानवर के लिए भी होनी चाहिए. पेटा का मानना है कि भारत में मीट के विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए गांधी जयंती से बेहतर कोई दिन हो ही नहीं सकता. संस्था का कहना है कि अगर सरकार 2 अक्टूबर से इन विज्ञापनों पर ताला लगाती है, तो यह बापू के अहिंसा के सपने और देश की पुरानी शाकाहारी परंपरा को सबसे बड़ा और सच्चा सम्मान होगा.

पेटा क्या है?

पेटा (PETA) जानवरों के हक के लिए आवाज उठाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी संस्था है. इसकी शुरुआत साल 1980 में हुई थी और इसका मुख्यालय अमेरिका के वर्जीनिया में है. यह संगठन दुनिया भर में बेजुबान जानवरों पर होने वाले जुल्म को रोकने के लिए काम करता है. पेटा का मानना है कि जानवर इंसानों के मतलब के लिए नहीं हैं, न उन्हें खाने के लिए, न पहनने के लिए और न ही उन पर अत्याचार करने के लिए. इंसानों की तरह उन्हें भी बिना दर्द के जीने का पूरा हक है. 

पेटा इंडिया इसी संस्था की भारतीय शाखा है, जो खास तौर पर भारत में जानवरों के हक और उनकी सुरक्षा के लिए काम करती है. यह संगठन देश की अहिंसा और शाकाहारी परंपरा को बढ़ावा देता है, ताकि बेजुबानों पर होने वाले अत्याचार को रोका जा सके.

पेटा का उद्देश्य क्या है?

पेटा का मकसद एक ऐसी दुनिया बनाना है, जहां जानवरों पर किसी भी तरह का जुल्म न हो. यह संस्था लोगों को समझाती है कि जानवरों को खाने, उनके चमड़े पहनने या मनोरंजन के लिए उन्हें तड़पाना बंद होना चाहिए. इंसान बिना किसी बेजुबान को दर्द दिए भी एक अच्छी और बेहतर जिंदगी जी सकता है.

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About the Author

पत्रकारिता में 9 साल से सक्रिय भूपेंद्र कुमार राय Zee News में सीनियर सब एडिटर के तौर पर न्यूज टीम का हिस्सा हैं, देश विदेशी की खबरें कवर करते हैं. 2017 में ETV Bharat (हैदराबाद) से करियर की शुरुआत करने के बाद वे 2020 में Zee News पहुंचे, जहां 2022 तक काम किया. 2023 में News24 की स्पोर्ट्स टीम को लीड करने का मौका मिला. इसके बाद India Daily Live में बतौर चीफ सब एडिटर स्पोर्ट्स टीम के साथ जुड़े. 2024 में दोबारा News24 लौटे और नई स्पोर्ट्स वेबसाइट लॉन्चिंग का अहम हिस्सा रहे. अक्टूबर 2025 में News24 से अलविदा लेकर एक बार फिर Zee News पहुंचे हैं. खेलों में गहरी रुचि रखते हैं और क्रिकेट वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स, ओलंपिक गेम्स, हॉकी वर्ल्ड कप समेत बड़े खेल इवेंट को कवर करने का अनुभव है. ब्रेकिंग न्यूज, क्रिकेट एनालिसिस और किस्से-कहानियों पर अच्छी पकड़ है. जी न्यूज में खेल से जुड़ी खबरों के बाद अब न्यूज टीम के साथ रियलटाइम न्यूज पर काम कर रहे हैं. एक्सप्लेनर और किसी भी मुद्दे पर रिसर्च के साथ उसे आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं. आप Bhoopendra.Rai@zeemedia.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facebook से जुड़ सकते हैं.
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