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विमल पान मसाला विज्ञापन विवाद में अब नए घटनाक्रम सामने आए हैं. खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढ़े ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है. कमिश्नर मुंढ़े के अनुसार, जब विवाद में नाम सामने आए, तो संबंधित लोगों को FDA की ओर से नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था. जिन तीन प्रमुख हस्तियों को नोटिस भेजे गए थे, उन्होंने अपनी बात रखी और प्रक्रिया के तहत कुछ अतिरिक्त समय की मांग की थी. इसके बाद, सक्षम अधिकारी (असिस्टेंट कमिश्नर) ने सभी पक्षों की बात सुनते हुए अपनी स्तर की कार्यवाही और सुनवाई पूरी कर ली है.
असिस्टेंट कमिश्नर द्वारा जांच और सुनवाई की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद, फाइल को अंतिम निर्णय के लिए जॉइंट कमिश्नर को सौंप दिया गया है. जॉइंट कमिश्नर ही इस मामले में आगे का फैसला लेने के लिए अधिकृत सक्षम अधिकारी हैं. इस पूरे घटनाक्रम के बीच, अभिनेता अजय देवगन ने महाराष्ट्र हाई कोर्ट का रुख किया है. हालांकि, FDA कमिश्नर का कहना है कि किसी पक्ष के अदालत जाने के बावजूद विभाग अपनी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई बिना रुके जारी रखे हुए है. यह पूरा मामला मशहूर अभिनेताओं द्वारा पान मसाला के विज्ञापनों में शामिल होने और उससे जुड़े नियमों के उल्लंघन को लेकर बना हुआ है, जिस पर विभाग सख्त कदम उठा रहा है.
वहीं विमल पान मसाला विवाद पर FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने बताया, 'जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें से एक, अजय देवगन ने हाई कोर्ट का रुख किया है. हालांकि, हम इस मामले में अपनी कार्रवाई जारी रखे हुए हैं. हमने कार्रवाई शुरू की थी और नोटिस जारी किए थे; तीनों व्यक्तियों ने जवाब दिया और समय मांगा. सक्षम अधिकारी, असिस्टेंट कमिश्नर ने कार्यवाही पूरी कर ली है और सुनवाई बंद कर दी है. अब इन मामलों को जॉइंट कमिश्नर के पास भेज दिया गया है, जो इस मामले में फैसला लेने के लिए सक्षम अधिकारी हैं. इनमें से एक व्यक्ति, अजय देवगन ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.'
उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ रोकने के लिए महाराष्ट्र FDA पहली बार 'एक्सपायर, रिटर्न एंड डैमेज प्रोडक्ट नियमावली' लेकर आया है. अब बड़ी कंपनियों को अपने खराब, एक्सपायर या वापस आए प्रोडक्ट्स के निपटान (डिस्पोजल) की पूरी और सटीक जानकारी देनी होगी. इस सख्त कदम की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि कई बार कंपनियां कागजों पर किसी थर्ड पार्टी को टेंडर देकर यह दावा कर देती थीं कि एक्सपायर माल को नष्ट कर दिया गया है. लेकिन असलियत में वही एक्सपायर सामान बाजार में नई तारीखों और नई पैकिंग के साथ दोबारा बिकने पहुंच जाता था.
FDA ने साफ कर दिया है कि खराब प्रोडक्ट्स को सही तरीके से नष्ट करना सीधे तौर पर निर्माता कंपनी की जिम्मेदारी होगी. कोई भी कंपनी थर्ड पार्टी का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती. हाल ही में भिवंडी, अंबरनाथ और पुणे में इस तरह के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है, जहां लाखों रुपये के एक्सपायर प्रोडक्ट्स जब्त किए गए. इन मामलों में सीधे कंपनियों के मालिकों पर गाज गिरी है और 2 एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं.
उपभोक्ताओं तक शुद्ध खाद्य तेल पहुंचाने के लिए FDA ने पूरे राज्य में एक व्यापक चेकिंग अभियान चलाया. 1 अप्रैल से 29 अक्टूबर 2026 के बीच निर्माताओं, री-पैकिंग करने वालों, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई.
निरीक्षण और नमूने: राज्यभर में कुल 1,089 निरीक्षण किए गए और लैब जांच के लिए खाद्य तेल के 1,660 सैंपल लिए गए.
भारी मात्रा में जब्ती: जांच के दौरान 28,753 क्विंटल खाद्य तेल जब्त किया गया, जिसकी कुल बाजार कीमत करीब 18.95 करोड़ रुपये है.
लैब रिपोर्ट की स्थिति: अब तक आई जांच रिपोर्टों में से 462 नमूने मानक के अनुरूप पाए गए. हालांकि, 40 नमूने घटिया गुणवत्ता के, 18 नमूने पूरी तरह असुरक्षित और 5 नमूने गलत लेबलिंग वाले पाए गए हैं. अभी 1,171 नमूनों की जांच रिपोर्ट आना बाकी है.
लापरवाही और मिलावटखोरी करने वाले खाद्य कारोबारियों पर नकेल कसते हुए FDA ने राज्यभर में 80 खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं.
छत्रपति संभाजीनगर: 27
पुणे: 22
मुंबई: 8
कोंकण: 6
नागपुर: 6
नासिक: 6
अमरावती: 5
खाद्य तेल की सबसे बड़ी जब्ती पुणे मंडल में देखने को मिली, जहां अकेले 19,551.83 क्विंटल तेल जब्त किया गया. वहीं, छत्रपति संभाजीनगर मंडल में 5,736.27 क्विंटल खाद्य तेल जब्त हुआ, जिसकी कीमत 834.03 लाख रुपये दर्ज की गई है. महाराष्ट्र FDA का यह सख्त रुख साफ संदेश देता है कि आम जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले किसी भी कारोबारी या बड़ी कंपनी को बख्शा नहीं जाएगा.