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नेताजी के लिए टाल दी शादी: घर से सीधे 300 KM दूर रैली में पहुंचा, आगा रुहुल्लाह की दीवानगी में दूल्हे का अनोखा फैसला

जम्मू कश्मीर की सियासत से एक दिलचस्प तस्वीर निकल कर आई है. जहां एक शख्स ने अपने नेता की दीवानगी में किश्तवाड़ से बडगाम तक की लंबी दूरी नापकर अपनी शादी की तारीख आगे बढ़ा दी. दूल्हे मियां का कहना है कि आगा रुहुल्लाह मेहदी अपनी बात पर कायम रहने वाले नेता हैं. चूंकि रैली की तारीख नहीं टल सकती थी, इसलिए मैं अपनी शादी टालने का फैसला करते हुए उन्हें अपना समर्थन देने चला आया.

Written By Khalid Hussain Edited By Shwetank Ratnamber
Published: Nov 03, 2026, 01:23 PM IST | Updated: Nov 03, 2026, 02:04 PM IST
Image Credit: (Zee Media)
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जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में एक युवक ने अपनी शादी टाल दी, ताकि वह नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी की इस्तीफा रैली में शामिल हो सके. युवक ने इसके लिए करीब 300 किलोमीटर का सफर भी तय किया और चिनाब घाटी से निकलकर सीधे बडगाम पहुंच गया. अबरार अहमद नाम के इस युवक की शादी उसी दिन तय थी, जिस दिन आगा रुहुल्लाह ने औपचारिक रूप से अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया था. इसी दिन रुहुल्लाह के पिता की पुण्यतिथि भी थी. अबरार ने शादी की तारीख आगे बढ़ाने का फैसला किया और रैली में शामिल होने के लिए बडगाम पहुंच गए.

नेताजी के लिए दीवानगी

कार्यक्रम के दौरान जी न्यूज से बातचीत में अबरार ने कहा कि आगा रुहुल्लाह उन्हें जम्मू-कश्मीर के दूसरे राजनीतिक नेताओं से अलग नजर आते हैं. उनके मुताबिक, रुहुल्लाह सत्ता से ज्यादा अपनी कही हुई बात को अहमियत देते हैं.

अबरार ने कहा, 'वे सत्ता से ज्यादा अपनी जुबान की अहमियत समझते हैं. वे जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं और इसी के लिए उन्होंने अपना पद छोड़ दिया.'

अपनी शादी टालने के फैसले पर उन्होंने कहा, 'रैली को टाला नहीं जा सकता था, इसलिए मैंने अपनी शादी टाल दी.'

अबरार का यह फैसला आगा रुहुल्लाह के प्रति उनके व्यक्तिगत जुड़ाव और समर्थन को दिखाता है. शादी जैसे अहम मौके पर करीब 300 किलोमीटर का सफर तय करके रैली में पहुंचना इस बात का संकेत है कि उनके लिए यह कार्यक्रम कितना मायने रखता था.

मेहदी की रैली?

आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने यह रैली मुख्य रूप से नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और उसके नेतृत्व से वैचारिक मतभेद के चलते इस्तीफे का ऐलान करने के लिए रखी थी. 3 नवंबर उनके पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं पुण्यतिथि है. रुहुल्लाह ने इसी तारीख को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और श्रीनगर लोकसभा सीट छोड़ने का ऐलान करने के लिए चुना था.

मेहदी का बड़ा बयान

रुहुल्लाह ने यह भी साफ किया था कि वो खरीद-फरोख्त या किसी निर्वाचित सरकार को गिराने की राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहते. उन्होंने ये भी कहा था कि उमर अब्दुल्ला सरकार को अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने देना चाहिए. उनका संघर्ष पार्टी नेतृत्व की नीतियों और चुनावी वादों को लेकर है.

उमर अबदुल्ला की सरकार के मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद एनसी के अंदरखाने मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. 20 असंतुष्ट नेताओं ने सीएम उमर अब्दुल्ला के पिता फारुक अब्दुल्ला को खत लिखकर पार्टी के अंदरखाने मचे असंतोष की स्थिति को टालने के लिए मैटर में दखल देने की अपील की थी.

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About the Author

सैयद खालिद हुसैन जम्मू-कश्मीर के एक पुरस्कार विजेता पत्रकार हैं, जिन्हें 24 वर्षों से अधिक का अनुभव है. साल 2014 से 'ज़ी न्यूज़' में चीफ  स्पेशल कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम कर रहे हैं.जी मीडिया से पहले हुसैन ने न्यूज़ 18 में नौ साल तक सीनियर कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम किया. हुसैन ने अपने करियर की शुरुआत डीडी न्यूज से की थी. हुसैन ने अपनी तालीम श्रीनगर के पब्लिक स्कूल और डीएवी हाई स्कूल से हासिल की. फिर ग्रेजुएशन तक का सफ़र एस.पी हायर सेकेंडरी स्कूल और अमर सिंह कॉलेज से पूरा किया. उसके बाद मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के लिए दिल्ली के सर अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पूरी की. इसके अलावा हुसैन लेखक फ़िल्म/ वीडियो कैमरा का स्पेशल कोर्स एफटीआई पुणे से कर चुके हैं.  मुंबई और दिल्ली में कई साल काम करने के बाद 2004 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में काम करना शुरू किया. डीडी न्यूज़, डीडी कश्मीर, BAG फ़िल्म्स में फ्रीलांस काम किया. हुसैन पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों को बेहतरीन तरीके से कवर कर रहे हैं. लद्दाख से लेकर मुंबई तक हुसैन भारत के कई शहरों से रिपोर्टिंग कर चुके हैं.
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