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कश्मीर में बुराई पर अच्छाई की जीत: श्रीनगर में सैकड़ों की भीड़ के बीच हुआ रावण दहन, मुस्लिम कारीगरों ने बनाए थे पुतले

श्रीनगर ने मंगलवार को विजयादशमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया. 'शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम' में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया.

कश्मीर में बुराई पर अच्छाई की जीत: श्रीनगर में सैकड़ों की भीड़ के बीच हुआ रावण दहन, मुस्लिम कारीगरों ने बनाए थे पुतले
Image Credit: 'शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम' में रावण दहन किया गया.

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा आज पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है. कश्मीर में इस बार का दशहरा बेहद खास और यादगार रहा. श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में जब रावण के 50 फीट ऊंचे पुतले में आग लगाई गई, तो करीब 10 हजार लोगों की भीड़ ने तालियों और नारों के साथ इसका स्वागत किया. कई सालों बाद यहां बड़ी तादाद में लोग विजयादशमी का जश्न मनाने जुटे थे. सबसे खूबसूरत बात यह रही कि हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों ने मिलकर यह त्योहार मनाया. रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों को स्थानीय मुस्लिम कारीगरों ने तैयार किया था.

इस कार्यक्रम में अलग-अलग समुदायों के हजारों लोग, सुरक्षा बल के जवान और दूर-दूर से आए सैलानी जुटे, जिन्होंने बुराई पर अच्छाई की जीत का शानदार नजारा देखा. आयोजकों ने साफ किया कि इस कार्यक्रम का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था, सभी को न्योता दिया गया था.

दरअसल, 1990 में कश्मीरी पंडितों के पलायन और आतंक के दौर के बाद घाटी में दशहरे की रौनक खत्म सी हो गई थी. हिंदू समुदाय के लिए खुलेआम त्योहार मनाना नामुमकिन सा था और पूजा-पाठ सिर्फ घरों तक सिमट गया था, लेकिन अब स्थानीय लोगों का मानना है कि सालों बाद कश्मीर की तस्वीर बदली है. घाटी में सुरक्षा और हालात बेहतर होने से इस बार उत्सवों ने धमाकेदार वापसी की. इस बार सालों पहले घर छोड़ने वाले कई कश्मीरी पंडित भी रावण दहन देखने श्रीनगर पहुंचे.

आयोजन समिति ने क्या कहा?

रावण दहन का आयोजन 'कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति' ने किया था. समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू ने कहा, 'दशहरा सिर्फ पुतले जलाने का त्योहार नहीं है, यह हर व्यक्ति के लिए एक मौका है कि वह सोचे कि उसने अपनी किन बुराइयों पर काबू पाया है और इस तरह अपने जीवन के असली मकसद को पूरा करे. ऐसे कुछ संकेत मिल रहे हैं कि कश्मीर अच्छाई की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इतिहास हमें याद दिलाता है कि इस इलाके में हर 50 से 60 साल में बड़े बदलाव या उथल-पुथल होती रही है. हमारे राजनेताओं को यह समझना चाहिए कि एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने से कोई फायदा नहीं होता.'

जैसे रावण जला, वैसे ही खत्म हो ड्रग माफिया'

कश्मीर में दशहरा उत्सव फिर से शुरू कराने में अहम भूमिका निभाने वाले संजय सर्राफ ने कहा, 'आज का दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. मैं दुआ करता हूं कि हमारे समाज की बुराइयां भी खत्म हो जाएं. खास तौर पर, मैं चाहता हूं कि समाज में जड़ें जमा चुके ड्रग माफिया का खात्मा हो, बिल्कुल वैसे ही जैसे हम रावण का पुतला फूंकते हैं, ताकि यह बुराई जड़ से मिट सके. जब हमने 2007 में इसकी शुरुआत की थी, तब बहुत कम लोग इसके बारे में जानते थे, लेकिन आज हालात यह हैं कि लोग बेसब्री से दशहरे का इंतजार करते हैं. यह एक बड़ा संदेश है और समाज में आए एक अच्छे बदलाव को दिखाता है.'

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About the Author

Khalid Hussain

Khalid Hussain

सैयद खालिद हुसैन जम्मू-कश्मीर के एक पुरस्कार विजेता पत्रकार हैं, जिन्हें 24 वर्षों से अधिक का अनुभव है. साल 2014 से 'ज़ी न्यूज़' में चीफ  स्पेशल कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम कर रहे हैं.जी मीडिया से पहले हुसैन ने न्यूज़ 18 में नौ साल तक सीनियर कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम किया. हुसैन ने अपने करियर की शुरुआत डीडी न्यूज से की थी. हुसैन ने अपनी तालीम श्रीनगर के पब्लिक स्कूल और डीएवी हाई स्कूल से हासिल की. फिर ग्रेजुएशन तक का सफ़र एस.पी हायर सेकेंडरी स्कूल और अमर सिंह कॉलेज से पूरा किया. उसके बाद मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के लिए दिल्ली के सर अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पूरी की. इसके अलावा हुसैन लेखक फ़िल्म/ वीडियो कैमरा का स्पेशल कोर्स एफटीआई पुणे से कर चुके हैं.  मुंबई और दिल्ली में कई साल काम करने के बाद 2004 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में काम करना शुरू किया. डीडी न्यूज़, डीडी कश्मीर, BAG फ़िल्म्स में फ्रीलांस काम किया. हुसैन पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों को बेहतरीन तरीके से कवर कर रहे हैं. लद्दाख से लेकर मुंबई तक हुसैन भारत के कई शहरों से रिपोर्टिंग कर चुके हैं.
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