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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आज उस वक्त ज़बरदस्त हंगामा हो गया, जब सीएम उमर अब्दुल्ला ने पूर्ण राज्य के दर्जे वाला प्रस्ताव पेश किया. राज्य के दर्जे पर तो सब ठीक था, लेकिन प्रस्ताव में जैसे ही पुरानी 'स्वायत्तता' यानी ऑटोनॉमी का ज़िक्र आया, बीजेपी विधायक भड़क गए. उन्होंने सदन के वेल में आकर जमकर नारेबाजी की और प्रस्ताव के कागज़ तक फाड़ डाले. शोर-शराबा इतना बढ़ा कि सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी.
दरअसल, यह हंगामा प्रश्नकाल खत्म होते ही शुरू हुआ. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सदन में एक नया प्रस्ताव रखा, जिसमें कहा गया '26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को पास हुए प्रस्तावों के अलावा, यह सदन भारत सरकार से मांग करता है कि जम्मू-कश्मीर को फौरन पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिया जाए, साथ ही सदन यह फैसला लेता है कि इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजा जाए.'
#WATCH | Srinagar | Jammu & Kashmir Assembly adjourned till 28th September following ruckus in the House as BJP MLAs raised slogans against the ruling side pic.twitter.com/w2tTqd5EQN
— ANI (@ANI) September 25, 2026
यहां आपको ये भी जानना जरूरी है कि 26 जून 2000 को फारूक अब्दुल्ला सरकार ने जो प्रस्ताव पास किया था, उसमें 1953 से पहले जैसी ज्यादा स्वायत्तता यानी ऑटोनॉमी मांगी गई थी. वहीं, 6 नवंबर 2024 के प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे और संवैधानिक अधिकारों को वापस लौटाने की मांग रखी गई थी.
प्रस्ताव रखते हुए उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार को उसके तीन चरणों वाले वादे की याद दिलाई, पहले परिसीमन, फिर चुनाव और आखिर में पूर्ण राज्य का दर्जा. उन्होंने कहा 'इस क्षेत्र के लोगों से तीन चरणों वाली प्रक्रिया का वादा किया गया था. परिसीमन, चुनाव और फिर राज्य का दर्जा.' उन्होंने आगे कहा कि पहले दो चरण जनता की भारी हिस्सेदारी के साथ पूरे हो चुके हैं, लेकिन तीसरा चरण अब भी बाकी है. पीएम मोदी के वादे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सदन केंद्र सरकार को याद दिलाना चाहता है कि "मोदी के वादे" पर अमल करने का वक्त आ गया है.
Jammu, Jammu & Kashmir: Ruckus erupts in the Jammu & Kashmir Assembly as BJP protests over statehood and self autonomy pic.twitter.com/qpSt9TEFmY
— IANS (@ians_india) September 25, 2026
सत्तापक्ष ने मेजें थपथपाकर इस प्रस्ताव का स्वागत किया, लेकिन जैसे ही 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव का नाम आया, सदन में हंगामा मच गया. बीजेपी विधायकों ने साफ कहा 'हम सदन में स्वायत्तता के मुद्दे पर चर्चा नहीं होने देंगे'. इसके बाद बीजेपी विधायक वेल में उतर आए और कुछ तो कुर्सियों पर भी चढ़ गए. विधायकों ने सरकार और प्रस्ताव के विरोध में जमकर नारे लगाए और प्रस्ताव की कॉपियां फाड़कर हवा में उड़ा दीं. दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक को देखते हुए स्पीकर ने कार्यवाही को 30 मिनट के लिए रोक दिया.
सोमवार तक कार्यवाही स्थगित होने के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए प्रस्ताव लाने के अपने कदम का बचाव किया.
Jammu, Jammu & Kashmir: On the statehood resolutions, J&K CM Omar Abdullah says, “If we had not mentioned the 2000 resolution and the 2024 resolution at the beginning, perhaps some friends would have said that we have now left the rest and come down only to statehood. So, we are… pic.twitter.com/xPzWizn1H8
— IANS (@ians_india) September 25, 2026
उमर अब्दुल्ला ने कहा 'मैंने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया. इस प्रस्ताव को लाने का मकसद बिल्कुल साफ है. यहां चुनाव हुए लगभग दो साल पूरे होने वाले हैं. जम्मू-कश्मीर के लोगों से राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया गया था. वह वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है. इसके उलट, राज्य का दर्जा फिर से बहाल न हो, इसके लिए विपक्ष के नेता मीडिया के जरिए एक के बाद एक बयान देते रहते हैं. एक के बाद एक बहाना बनाते हैं. इसलिए आज हमने सोचा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों का प्रतिनिधित्व जम्मू-कश्मीर की विधानसभा करती है. हम चाहते थे कि यहां से एक प्रस्ताव पास करके भारत सरकार को भेजा जाए कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा तुरंत बहाल किया जाए, लेकिन आपने देखा कि बीजेपी ने इस पर कैसी प्रतिक्रिया दी, क्योंकि वे राज्य के दर्जे पर बिल्कुल भी वोट नहीं करना चाहते.
उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा 'आज हम सिर्फ और सिर्फ बीजेपी से राज्य के दर्जे पर वोट करने के लिए कह रहे हैं और वे राज्य के दर्जे पर वोट करने को तैयार नहीं हैं. हम उम्मीद करेंगे कि सदन इस प्रस्ताव पर वोट करेगा और हम इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजेंगे.'
सीएम उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा 'इसमें देश-विरोधी क्या है? हमने स्वायत्तता पर प्रस्ताव कहां पेश किया? वह तो सदन से पहले ही पास हो चुका है. आज हम राज्य के दर्जे पर एक अलग प्रस्ताव ला रहे हैं, राज्य के दर्जे वाले इस प्रस्ताव से पुराने प्रस्ताव कमजोर नहीं होंगे. अब अगर बीजेपी चाहती है कि उन प्रस्तावों को बदला जाए, तो उन्हें इसी बहस में उन प्रस्तावों को खारिज करने या उन्हें खत्म करने का प्रस्ताव लाना चाहिए. अगर उन्हें वोट मिल जाते हैं, तो मैं आपत्ति करने वाला कौन होता हूं? लोकतंत्र की यही मांग है.'
Massive ruckus inside the #Jammu and #Kashmir assembly after Bhartiya Janata Party MLA’s protest following the moving of a National Conference govt resolution demanding immediate return of statehood. #BJP lawmakers raised slogans and tore the resolution. pic.twitter.com/fv5XaHLiL2
— Azaan Javaid (@AzaanJavaid) September 25, 2026
उमर अब्दुल्ला ने कहा, हमने जो प्रस्ताव पेश किया, उसमें एक भी शब्द देश-विरोधी या संविधान-विरोधी नहीं था. असल बात यह है कि BJP के विपक्ष के नेता (LoP) राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर वोट नहीं करना चाहते. BJP जो कुछ भी कह रही है, वह सिर्फ बहाना है, क्योंकि वे विधानसभा के अंदर लोगों के सामने अपना असली चेहरा नहीं दिखाना चाहते. सच तो यह है कि विपक्ष के नेता जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिए जाने के सख्त खिलाफ हैं. आज अगर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलने में कोई दुश्मन या विरोधी है, तो वे BJP के ये 29 विधायक ही हैं जो इसमें रुकावट डाल रहे हैं.'
विपक्ष के नेता और BJP विधायक सुनील शर्मा ने भी अपना रुख साफ किया और सदन में किए गए विरोध को सही ठहराते हुए कहा कि हंगामे के बाद, BJP पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने पर बहस के लिए तैयार है, लेकिन अनुच्छेद 370 या 2000 के स्वायत्तता (ऑटोनॉमी) प्रस्ताव पर किसी भी चर्चा का विरोध करेगी. उन्होंने नए प्रस्ताव में 2000 के प्रस्ताव को शामिल करने पर सवाल उठाया और कहा कि जब वह प्रस्ताव मूल रूप से पारित हुआ था, तब BJP ने उसे खारिज कर दिया था, तो अब उसका जिक्र क्यों किया जा रहा है. शर्मा ने कांग्रेस नेतृत्व से स्वायत्तता प्रस्ताव और अनुच्छेद 370 पर उनकी स्थिति के बारे में भी स्पष्टीकरण मांगा है.
BJP विधायक सुनील शर्मा ने कहा 'आज उमर अब्दुल्ला साहब ने जो प्रस्ताव पेश किया, वह विवादास्पद और विवादित था. इस प्रस्ताव में तथाकथित स्वायत्तता प्रस्ताव (जिसे भारतीय जनता पार्टी ने खारिज कर दिया था) और 2024 के तथाकथित विशेष दर्जे के प्रस्ताव का जिक्र किया गया है. इसने इसे पूरी तरह से विवादास्पद, अस्वीकार्य और भारत-विरोधी प्रस्ताव बना दिया है. भारतीय जनता पार्टी इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगी. अगर आप राज्य के दर्जे पर चर्चा करना चाहते हैं, तो हम आपको चुनौती देते हैं. भारतीय जनता पार्टी का हर एक कार्यकर्ता और हर एक विधायक आपके साथ राज्य के दर्जे पर चर्चा करने के लिए तैयार है, लेकिन क्या आप कश्मीरियों को बेवकूफ बनाना चाहते हैं? राज्य के दर्जे के नाम पर, आप सदन में ऐसी बातें लाकर राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया को लंबा खींचना चाहते हैं.'
सुनील शर्मा ने तीन सवाल पूछे. उन्होंने कहा 'मैं अपनी बात तीन बातें कहकर खत्म करता हूं. पहली बात, कांग्रेस पार्टी को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि वह अनुच्छेद 370 और स्वायत्तता के इस प्रस्ताव के साथ है या सरकार के साथ? दूसरी बात, जब भारतीय जनता पार्टी ने स्वायत्तता के इस प्रस्ताव को फाड़कर खारिज कर दिया था, तो क्या उस समय उमर अब्दुल्ला साहब NDA में मंत्री नहीं थे? क्या वे उस समय NDA के साथ बने नहीं रहे थे? तीसरी बात, ऐसी भाषा का इस्तेमाल करके क्या उमर अब्दुल्ला साहब जम्मू-कश्मीर को मिलने वाले राज्य के दर्जे में देरी नहीं करना चाहते? भारतीय जनता पार्टी इन सवालों के जवाब चाहती है और तब तक हम विरोध करते रहेंगे.'
NC सरकार को बाहर से समर्थन देने वाली कांग्रेस पार्टी आज सुबह से ही विरोध प्रदर्शन कर रही थी और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की अपनी मांग पर जोर दे रही थी. इसके साथ ही, पार्टी ने इस प्रस्ताव का पूरा समर्थन किया, क्योंकि कांग्रेस हमेशा से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करती रही है.
वागूरा-क्रेरी से कांग्रेस विधायक इरफान हफीज लोन ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा 'प्रस्ताव को पढ़ें; यह साफ है. आज उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल करने का विरोध किया है, वे महाराजा हरि सिंह का नाम लेकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं, लेकिन असल में उन्होंने ही राज्य को तोड़ा था और अब वे इसे बहाल करने का विरोध कर रहे हैं. उनके पास अब कोई बहाना नहीं बचा है. उनकी असलियत सामने आ गई है. हम लड़ेंगे, एक दिन हम जरूर जीतेंगे और कांग्रेस पार्टी इस प्रस्ताव का समर्थन करती है.'
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) लंबे समय से राज्य का दर्जा बहाल करने के साथ-साथ विशेष दर्जे (अनुच्छेद 370 और 35A) की बहाली को प्राथमिकता देती रही है. PDP नेताओं ने सदन के भीतर इस प्रस्ताव का समर्थन तो किया, लेकिन यह भी कहा कि हमें यह देखना होगा कि 2000 के प्रस्ताव को क्यों और किस संदर्भ में शामिल किया गया है. इसके अलावा CPIM और अन्य छोटी पार्टियों ने भी उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव का समर्थन किया.
(इनपुट: खालिद हुसैन, जम्मू कश्मीर)