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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 25 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश किए गए पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी प्रस्ताव पर कुल 10 संशोधन पेश किए गए हैं. विधानसभा सचिवालय ने इन संशोधनों की सूची जारी की है. इनमें कई संशोधनों के जरिए मूल प्रस्ताव का दायरा बढ़ाने और अनुच्छेद 370, अनुच्छेद 35A, स्वायत्तता तथा 5 अगस्त 2019 से पहले की संवैधानिक स्थिति का संदर्भ जोड़ने की मांग की गई है.
25 सितंबर को उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर को तत्काल और जल्द से जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया था. प्रस्ताव में 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को सदन से पारित पुराने प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया है. इसमें कहा गया है कि प्रस्ताव को भारत सरकार को भेजा जाए.
प्रस्ताव में कहा गया है, 'इस सदन द्वारा 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को पारित प्रस्तावों के अलावा, यह सदन भारत सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा तुरंत और जल्द से जल्द बहाल करने की मांग करता है और यह संकल्प लेता है कि इस प्रस्ताव को भारत सरकार को भेजा जाए.'
उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया था कि नया प्रस्ताव 2000 और 2024 में पारित पुराने प्रस्तावों के अतिरिक्त है, उनकी जगह लेने के लिए नहीं है. उनका कहना था कि मौजूदा प्रस्ताव का मुख्य फोकस जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल कराना है. उन्होंने सभी दलों से प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की थी.
प्रस्ताव पर पेश किए गए 10 संशोधनों में कई में अनुच्छेद 370 और 35A को शामिल करने की मांग की गई है. कुछ संशोधनों में 5 अगस्त 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति बहाल करने और स्वायत्तता से जुड़े प्रावधानों का भी उल्लेख है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई विधायकों के अलावा PDP और अन्य विधायकों ने भी ऐसे संशोधन पेश किए हैं.
इन संशोधनों के बाद विधानसभा में प्रस्ताव के दायरे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. हालांकि, मूल प्रस्ताव में सीधे तौर पर अनुच्छेद 370 या 35A की बहाली की मांग नहीं की गई थी.

विधानसभा में 2000 के प्रस्ताव के संदर्भ और नए संशोधनों को लेकर बीजेपी विधायकों ने विरोध किया. बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य के दर्जे की मांग के साथ पुराने स्वायत्तता और विशेष दर्जे से जुड़े मुद्दों को भी आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.
PDP विधायक वहीद उर रहमान पारा ने भी प्रस्ताव में अनुच्छेद 370, 35A और स्वायत्तता से जुड़े मुद्दों को शामिल करने की मांग वाला संशोधन पेश किया है. वहीं, कांग्रेस समेत कुछ अन्य दलों ने जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग का समर्थन किया है.