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जम्मू-कश्मीर: उमर अब्दुल्ला कैबिनेट में बड़ा फेरबदल, 4 नए चेहरों की एंट्री; कांग्रेस को नहीं मिली जगह

जम्मू-कश्मीर सरकार के मंत्रिमंडल का आज विस्तार किया गया. उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में चार नए चेहरे शामिल हुए हैं. मंत्रिमंडल विस्तार से पहले कई कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब सभी अटकलों पर ब्रेक लग गया है. उमर कैबिनेट में शामिल होने वाले चेहरे अनुभवी और दिग्गज हैं.

Written By Khalid Hussain
Published: Oct 27, 2026, 11:42 AM IST | Updated: Oct 27, 2026, 11:57 AM IST
Image Credit: जम्मू-कश्मीर सरकार में चार नए मंत्री शामिल. (फोटो- खालिद हुसैन)
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Jammu and Kashmir News: अक्टूबर 2024 में सत्ता संभालने के बाद, उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर सरकार ने मंगलवार को अपना पहला बड़ा विस्तार और फेरबदल किया. इस दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के चार वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया. श्रीनगर के लोक भवन ऑडिटोरियम में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेताओं, अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कालू को कैबिनेट में शामिल किया गया, जिससे केंद्र शासित प्रदेश की सरकार में खाली पड़े मंत्री पद भर गए. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपनी मंत्रिपरिषद के सदस्यों के साथ समारोह स्थल पर पहुंचे.

इन चेहरों को मिली कैबिनेट में जगह 

मंत्रिमंडल में बने रहे ये नेता

जानकारी दें कि जम्मू क्षेत्र से केवल सुरेंद्र चौधरी (उपमुख्यमंत्री) ही कैबिनेट में बने रहे; वे राजौरी जिले के नौशेरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. जावेद अहमद राणा, जो जम्मू के पुंछ जिले के मेंढर (ST) विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, वे भी कैबिनेट में बने रहे. सकीना इट्टू, जो कुलगाम जिले के दमाल हांजी पोरा से विधायक हैं, वे भी कैबिनेट में बनी रहीं. बारामूला के रफियाबाद से विधायक जावेद अहमद डार भी कैबिनेट में बने रहे. वहीं, जम्मू के छंब विधानसभा क्षेत्र से आने वाले निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा, जो पिछली कैबिनेट में मंत्री थे, इस समारोह में शामिल नहीं हुए. ऐसा लगता है कि उन्हें कैबिनेट से हटा दिया गया है.

क्यों अहम है मंत्रिमंडल का विस्तार?

इस कदम को सरकार के राजनीतिक और प्रशासनिक कामकाज को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि सरकार को सत्ता में आए दो साल से अधिक समय हो चुका है. ऐसी खबरें थीं कि इस फेरबदल में मौजूदा मंत्रिपरिषद में बदलाव हो सकते हैं, जिसमें एक या दो मंत्रियों का हटना और विभागों का पुनर्वितरण शामिल हो सकता है.

कैबिनेट में शामिल किए गए नए नेताओं के पास विधायी और प्रशासनिक कार्यों का काफी अनुभव है. सागर नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक अनुभवी नेता और पूर्व मंत्री हैं, जबकि शमीमा फिरदौस के शामिल होने से वे सकीना इट्टू के बाद मंत्रिपरिषद में दूसरी महिला मंत्री बन गई हैं.

मंत्रियों में विभागों का बंटवारा

सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा नहीं की थी. शपथ ग्रहण समारोह के समय विभागों का बंटवारा किया गया. विभागों के इस औपचारिक वितरण से नए मंत्रियों और मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों की जिम्मेदारियां स्पष्ट हो जाएंगी.

इस विस्तार से नेशनल कॉन्फ्रेंस की सहयोगी पार्टी, कांग्रेस का रुख भी सामने आया है. पार्टी ने मंत्रिमंडल से बाहर रहने का फैसला किया है. उनका कहना है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा उपाय वापस नहीं मिल जाते, तब तक वे सरकार में शामिल नहीं होंगे.

कांग्रेस ने बाहर किया है सरकार का समर्थन

कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे बाहर से नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देना जारी रखेंगे, लेकिन सरकार में मंत्री पद तभी लिया जाएगा जब राज्य का दर्जा बहाल हो जाएगा. अक्टूबर 2024 में सरकार के गठन के बाद से ही कांग्रेस मंत्रिपरिषद से दूर रही है.

मंत्रिमंडल का यह विस्तार ऐसे समय में हुआ है, जब जम्मू-कश्मीर की राजनीति में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना एक मुख्य मांग बनी हुई है. उमर अब्दुल्ला की सरकार अभी भी केंद्र शासित प्रदेश के मौजूदा ढांचे के भीतर ही काम कर रही है, जबकि सत्ताधारी गठबंधन अधिक संवैधानिक और प्रशासनिक शक्तियों की मांग कर रहा है.

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About the Author

सैयद खालिद हुसैन जम्मू-कश्मीर के एक पुरस्कार विजेता पत्रकार हैं, जिन्हें 24 वर्षों से अधिक का अनुभव है. साल 2014 से 'ज़ी न्यूज़' में चीफ  स्पेशल कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम कर रहे हैं.जी मीडिया से पहले हुसैन ने न्यूज़ 18 में नौ साल तक सीनियर कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम किया. हुसैन ने अपने करियर की शुरुआत डीडी न्यूज से की थी. हुसैन ने अपनी तालीम श्रीनगर के पब्लिक स्कूल और डीएवी हाई स्कूल से हासिल की. फिर ग्रेजुएशन तक का सफ़र एस.पी हायर सेकेंडरी स्कूल और अमर सिंह कॉलेज से पूरा किया. उसके बाद मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के लिए दिल्ली के सर अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पूरी की. इसके अलावा हुसैन लेखक फ़िल्म/ वीडियो कैमरा का स्पेशल कोर्स एफटीआई पुणे से कर चुके हैं.  मुंबई और दिल्ली में कई साल काम करने के बाद 2004 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में काम करना शुरू किया. डीडी न्यूज़, डीडी कश्मीर, BAG फ़िल्म्स में फ्रीलांस काम किया. हुसैन पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों को बेहतरीन तरीके से कवर कर रहे हैं. लद्दाख से लेकर मुंबई तक हुसैन भारत के कई शहरों से रिपोर्टिंग कर चुके हैं.
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