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Jammu and Kashmir News: अक्टूबर 2024 में सत्ता संभालने के बाद, उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर सरकार ने मंगलवार को अपना पहला बड़ा विस्तार और फेरबदल किया. इस दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के चार वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया. श्रीनगर के लोक भवन ऑडिटोरियम में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेताओं, अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कालू को कैबिनेट में शामिल किया गया, जिससे केंद्र शासित प्रदेश की सरकार में खाली पड़े मंत्री पद भर गए. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपनी मंत्रिपरिषद के सदस्यों के साथ समारोह स्थल पर पहुंचे.
जानकारी दें कि जम्मू क्षेत्र से केवल सुरेंद्र चौधरी (उपमुख्यमंत्री) ही कैबिनेट में बने रहे; वे राजौरी जिले के नौशेरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. जावेद अहमद राणा, जो जम्मू के पुंछ जिले के मेंढर (ST) विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, वे भी कैबिनेट में बने रहे. सकीना इट्टू, जो कुलगाम जिले के दमाल हांजी पोरा से विधायक हैं, वे भी कैबिनेट में बनी रहीं. बारामूला के रफियाबाद से विधायक जावेद अहमद डार भी कैबिनेट में बने रहे. वहीं, जम्मू के छंब विधानसभा क्षेत्र से आने वाले निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा, जो पिछली कैबिनेट में मंत्री थे, इस समारोह में शामिल नहीं हुए. ऐसा लगता है कि उन्हें कैबिनेट से हटा दिया गया है.
इस कदम को सरकार के राजनीतिक और प्रशासनिक कामकाज को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि सरकार को सत्ता में आए दो साल से अधिक समय हो चुका है. ऐसी खबरें थीं कि इस फेरबदल में मौजूदा मंत्रिपरिषद में बदलाव हो सकते हैं, जिसमें एक या दो मंत्रियों का हटना और विभागों का पुनर्वितरण शामिल हो सकता है.
कैबिनेट में शामिल किए गए नए नेताओं के पास विधायी और प्रशासनिक कार्यों का काफी अनुभव है. सागर नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक अनुभवी नेता और पूर्व मंत्री हैं, जबकि शमीमा फिरदौस के शामिल होने से वे सकीना इट्टू के बाद मंत्रिपरिषद में दूसरी महिला मंत्री बन गई हैं.
सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा नहीं की थी. शपथ ग्रहण समारोह के समय विभागों का बंटवारा किया गया. विभागों के इस औपचारिक वितरण से नए मंत्रियों और मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों की जिम्मेदारियां स्पष्ट हो जाएंगी.
इस विस्तार से नेशनल कॉन्फ्रेंस की सहयोगी पार्टी, कांग्रेस का रुख भी सामने आया है. पार्टी ने मंत्रिमंडल से बाहर रहने का फैसला किया है. उनका कहना है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा उपाय वापस नहीं मिल जाते, तब तक वे सरकार में शामिल नहीं होंगे.
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे बाहर से नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देना जारी रखेंगे, लेकिन सरकार में मंत्री पद तभी लिया जाएगा जब राज्य का दर्जा बहाल हो जाएगा. अक्टूबर 2024 में सरकार के गठन के बाद से ही कांग्रेस मंत्रिपरिषद से दूर रही है.
मंत्रिमंडल का यह विस्तार ऐसे समय में हुआ है, जब जम्मू-कश्मीर की राजनीति में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना एक मुख्य मांग बनी हुई है. उमर अब्दुल्ला की सरकार अभी भी केंद्र शासित प्रदेश के मौजूदा ढांचे के भीतर ही काम कर रही है, जबकि सत्ताधारी गठबंधन अधिक संवैधानिक और प्रशासनिक शक्तियों की मांग कर रहा है.