'ब्लैक डे' से 'जश्न के उत्सव' तक... BJP ने कैसे विलय की वर्षगांठ को 'नए कश्मीर' के जश्न में बदला?
जम्मू-कश्मीर विलय दिवस हर साल 26 अक्टूबर को मनाया जाता है. ऐसे में इस खास दिन को बीजेपी ने गर्व और राष्ट्रीय उत्सव के दिन के रूप मनाया. पूरे जम्मू-कश्मीर में BJP के सभी दफ्तरों के बाहर खास जश्न देखने को मिला.
Jammu and Kashmir News: दशकों तक, अलगाववादियों, आतंकवादियों और उनके वैचारिक सहयोगियों ने 26 अक्टूबर को कश्मीर में एक ब्लैक डे (काला दिन) के रूप में मनाया, एक ऐसा दिन जब 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' (विलय पत्र) पर शोक मनाया जाता था, लेकिन आज बीजेपी ने पूरी तरह से पासा पलट दिया और जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय की 79वीं वर्षगांठ को पूरे केंद्र शासित प्रदेश में जीत, गर्व और राष्ट्रीय उत्सव के दिन के रूप में मनाया.
दरअसल, 1947 में इसी दिन, महाराजा हरि सिंह ने 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे यह रियासत औपचारिक रूप से भारत का हिस्सा बन गई. इसके अगले दिन, 27 अक्टूबर को पाकिस्तान की ओर से हुए कबायली हमले को रोकने के लिए भारतीय सेना श्रीनगर पहुंची. जिसे अलगाववादी लंबे समय से एक त्रासदी के रूप में पेश करते रहे, उसे अब BJP कश्मीर और भारत के बीच एक अटूट बंधन की शुरुआत के रूप में पेश कर रहे हैं.एक ऐसा बंधन जो अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद पूरी तरह से मजबूत हो गया.
BJP ने मनाया जोरदार जश्न
पूरे जम्मू-कश्मीर में BJP के दफ्तरों में जोरदार जश्न मनाया गया. श्रीनगर स्थित BJP मुख्यालय में नेताओं और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ ने तिरंगा और पार्टी के झंडे फहराए, पूरे जोश के साथ 'भारत माता की जय' के नारे लगाए और मिठाइयां बांटीं. केंद्र शासित प्रदेश भर में पार्टी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे ही कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां J&K इकाई ने इस मौके को ईद, होली या दिवाली जैसे त्योहारों के उत्साह के साथ मनाया.
बीजेपी प्रवक्ता ने क्या कहा?
BJP के जम्मू-कश्मीर प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा में महाराजा हरि सिंह के फैसले को 'दो-राष्ट्र सिद्धांत' (टू-नेशन थ्योरी) को खारिज करने वाला और भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक दूरदर्शी कदम मानता हूं. ठाकुर ने कहा कि यह हमारे लिए ईद, होली और दिवाली जैसा दिन है. हम भारत के साथ जुड़ गए हैं, जो लोकतंत्र की जननी है. हमें भारतीय होने पर गर्व है. उन्होंने कहा कि 1947 के विलय को 2019 के संवैधानिक बदलावों (अनुच्छेद 370 को हटाकर) से और मजबूती मिली, जिससे यह विलय पूरी तरह से और हर मायने में मुकम्मल हो गया.
विपक्ष पर बीजेपी का निशाना
ठाकुर ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर भी निशाना साधा. उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और उनकी पार्टी पर आरोप लगाया कि वे बार-बार अपने कुशासन के रिकॉर्ड को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं और अभी भी अतीत के खून-खराबे से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं.
उन्होंने कहा कि फारूक को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए जो उन्होंने पाकिस्तान के हक में बयान दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को शांति और विकास की नई कहानी के बजाय, खुद को 'पीड़ित' बताने वाले पुराने नैरेटिव में ही ज्यादा सहजता महसूस होती है.
खरगे पर साधा निशाना
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हाल ही में की गई टिप्पणियों के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की भी आलोचना की. उन्होंने इन टिप्पणियों को एक ऐसी पार्टी की हताशा बताया जो चुनावों में हारने में रिकॉर्ड बना चुकी है और अब तक 100 बार हर चुकी है और घोषणा की कि बीजेपी कांग्रेस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आह्वान करने जा रही है.
ये जश्न ऐसे समय में हो रहे हैं जब फारूक अब्दुल्ला की हालिया टिप्पणियों के बाद तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई है. फारूक ने कहा था कि कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार पक्ष रखना, क्षेत्र के हितों की रक्षा करता है. ठाकुर और जम्मू-कश्मीर इकाई के अनी बीजेपी नेताओं ने इन बयानों को 'राष्ट्र-विरोधी' करार दिया है और जवाबदेही की मांग की है.
बीजेपी के लिए क्यों है यह खास पल
बीजेपी के लिए, 'एक्सेशन डे' (विलय दिवस) अब कोई विवादित दिन नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़े दावे को पेश करने का मंच बन गया है: कि 2019 के बाद की व्यवस्था ने कश्मीर का एक नया अध्याय लिखा है. पार्टी इस दिन को इस बात के सबूत के तौर पर पेश करती है कि महाराजा का फैसला आखिरकार पूरी तरह से साकार हो गया है, एक संविधान, एक झंडा, एक नागरिकता. साथ ही, घाटी के युवा अब शिकायतों की राजनीति के बजाय विकास और अवसरों की ओर बढ़ रहे हैं.
एक समय था जब अलगाववादियों द्वारा बुलाए गए 'ब्लैक डे' (काला दिवस) का बोलबाला हुआ करता था, लेकिन अब श्रीनगर में ही केसरिया झंडे, तिरंगा रैलियां और विलय दिवस का खुला जश्न दिखाई देता है. बीजेपी यह सुनिश्चित काना चाहती है कि यह बदलाव साफ तौर पर नजर आए.
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