ISRO ने बढ़ाई बाहुबली रॉकेट की ताकत: CE20 इंजन का 220 kN पर सफल टेस्ट, जानिए क्या होगा फायदा
ISRO ने LVM3 रॉकेट के CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 kN थ्रस्ट पर सफल परीक्षण कर लिया है. इस बड़ी कामयाबी से गगनयान मिशन और भारी अंतरिक्ष अभियानों के लिए अंतरिक्ष में भारी-भरकम सैटेलाइट भेजने की राह बेहद आसान हो जाएगी.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO ने अंतरिक्ष बड़ी छलांग लगाते हुए अपने बाहुबली रॉकेट LVM3 की ताकत को और बढ़ा दिया है. अंतरिक्ष एजेंसी ने गगनयान मिशन और भविष्य के भारी भरकम स्पेश मिशन को मजबूती देने के लिए CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 kN (किलो न्यूटन) के बढ़े हुए थ्रस्ट पर सफल फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट पूरा कर लिया है. इससे भारत के स्पेस सेक्टर में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जिससे आने वाले समय में अंतरिक्ष में भारी-भरकम सैटेलाइट भेजने और इंसानों को अंतरिक्ष तक पहुंचाने जैसे गगनयान मिशन में मजबूती मिलेगी.
ISRO ने अपने CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 kN थ्रस्ट की बढ़ी हुई क्षमता पर टेस्ट पास कर लिया है. इस टेस्ट के बाद LVM3 रॉकेट की पेलोड क्षमता बढ़ाने की दिशा में ISRO को बड़ी कामयाबी मिली है. इस तकनीक का इस्तेमाल आगे चलकर गगनयान जैसे बड़े मिशन में किया जाएगा. ISRO के अनुसार यह फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट 9 सितंबर 2026 को तमिलनाडु के महेंद्रगिरी स्थित ISRO Propulsion Complex में किया गया. यह CE20 इंजन आने वाले LVM3 मिशन के C32 अपर स्टेज के लिए तैयार किया गया है.
220 kN थ्रस्ट पर हुआ टेस्ट
ISRO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए बताया कि 220 kN की बढ़ी हुई थ्रस्ट क्षमता पर CE20 इंजन का सफल हॉट टेस्ट किया गया. इस टेस्ट का मकसद इंजन को भविष्य के LVM3 मिशन में इस्तेमाल के लिए मंजूरी देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है.
CE20 इंजन LVM3 रॉकेट के ऊपरी क्रायोजेनिक स्टेज को ताकत देता है. ISRO भविष्य के LVM3 मिशन में अपग्रेड किए गए C32 स्टेज का इस्तेमाल करना चाहता है. इससे रॉकेट की पेलोड क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी.
गगनयान मिन के लिए भी अहम
इस टेस्ट के दौरान LOX Tank Pressurisation Module यानी LTPM की क्षमता का भी सफल प्रदर्शन किया गया. यह मॉड्यूल गगनयान मिशन के C32 स्टेज में इस्तेमाल किया जाना है. ISRO इससे पहले मार्च में भी CE20 इंजन का महेंद्रगिरी में 220 kN थ्रस्ट स्तर पर समुद्र तल पर हॉट टेस्ट कर चुका है. उस समय इंजन का 165 सेकंड तक टेस्ट किया गया था और इंजन और टेस्ट सुविधा ने उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन किया था.
समुद्र तल पर इंजन टेस्ट करना था चुनौतीपूर्ण
CE20 इंजन में हाई एरिया रेशियो वाला नोजल इस्तेमाल किया गया है. इसकी वजह से समुद्र तल पर इसका टेस्ट करना काफी मुश्किल होता है. कम एग्जिट प्रेशर के कारण नोजल के अंदर फ्लो सेपरेशन हो सकता है. इससे तेज कंपन और थर्मल स्ट्रेस पैदा होने का खतरा रहता है, जो नोजल की संरचना को नुकसान पहुंचा सकता है.
मार्च में किए गए टेस्ट का उद्देश्य इंजन को ज्यादा थ्रस्ट स्तर पर समुद्र तल परीक्षण के लिए योग्य बनाना था. अब 9 सितंबर का सफल फ्लाइट एक्सेप्टेंस टेस्ट अपग्रेडेड C32 स्टेज को भविष्य के LVM3 मिशन में इस्तेमाल करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है.
5 सितंबर को ISRO ने लॉन्च किया EOS-05
यह उपलब्धि ऐसे समय पर सामने आई है जब ISRO ने हाल ही में GSLV-F17 रॉकेट के जरिए एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट-05 (EOS-05) को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था. यह लॉन्च 5 सितंबर को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया था.
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ISRO चेयरमैन वी नारायणन ने इस मिशन को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया था. 2,367 किलोग्राम वजन वाले सैटेलाइट को उसकी तय कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया. ऑपरेशनल होने के बाद यह जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत का पहला समर्पित इमेजिंग सैटेलाइट बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
इनपुट-ANI
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