SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

समंदर में भारत तैनात करेगा 'ब्रह्मास्त्र', 53,866 करोड़ से देश में बनेंगे 8 नए वॉरशिप; चीन-पाकिस्तान की उड़ेगी नींद

रक्षा मंत्रालय ने GRSE और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) के साथ 53,866.50 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किया है. नए अनुबंध के अनुसार, GRSE पांच और GSL तीन युद्धपोतों का निर्माण करेगा. इन युद्धपोतों की मदद से समुद्री सुरक्षा और बेहतर हो सकेगी.

Written By abhinav tripathi
Published: Nov 02, 2026, 01:19 PM IST | Updated: Nov 02, 2026, 01:53 PM IST
Image Credit: अब समंदर पर राज करेगा भारत (फोटो- एआई)
Join

रक्षा मंत्रालय ने आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक अहम कदम उठाया है. रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 8 नेक्स्ट जेनरेशन युद्धपोत बनाने को लेकर गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) के साथ 53,866.50 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर साइन किए हैं.

नए अनुबंधों के तहत GRSE पांच और GSL तीन युद्धपोतों का निर्माण करेगा. बताया जाता है कि इन युद्धपोतों में आधुनिक मिसाइल, अत्याधुनिक सेंसर और हथियार लगाए जाएंगे, जिससे समुद्री सुरक्षा और बेहतर हो सकेगी. नए युद्धपोतों के कमिशन होने के बाद दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने में आसानी होगी और समुद्री व्यापार मार्गों की निगरानी करने की क्षमता भी बढ़ेगी.

क्यों खास है ये परियोजना?

नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में यह समझैता हुआ है, जिसके तहत GRSE पांच कॉर्वेट बनाएगा और GSL तीन का निर्माण करेगा. सबसे खास बात है कि यह परियोजना स्वदेशी डिजाइन क्षमका और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निर्माण क्षमता को मजबूत करती है. नौसेना की ओर से पहली बार किए गए डिजाइन को  चुने गए डीपीएसयू इसे बनाएंगे.

रिपोर्ट्स के अनुसार, अगली पीढ़ी के कॉर्वेट आधुनिक मिसाइल,सेंसर सिस्टम और हथियार से लैस होंगे. ये हवा, समुद्र की सतह और पानी के नीचे सभी क्षेत्रों में मिशन कर पाएंगे. इनके नौसेना में शामिल होने के बाद समंदर में भारतीय नेवी की ताकत में इजाफा होगा. इसके अलावा समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, एंटी-सरफेस और एंटी-सबमरीन वारफेयर, तटीय रक्षा जैसे काम भी आसान होंगे.

मेक इन इंडिया प्रोग्राम को बढ़ावा मिलेगा

बता दें कि इस परियोजना के बाद स्वदेशी उद्योग को भारी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि  डीपीएसयू, निजी शिपयार्ड और एमएसएमई सहित भारतीय उद्योग भागीदीरों के बीच सहयोग भी बढ़ेगा. बताया गया कि अगले 10 साल में शिपयार्ड में करीब 72 लाख व्यक्ति-दिन और सहायक उद्योगों व एमएसएमई में 460 लाख व्यक्ति-दिन रोजगार पैदा होने की उम्मीद है. 

यह भी पढ़ें: 8000 करोड़ से इजरायल बनाएगा आसमानी 'पेट्रोल पंप', भारत को मिलेंगे 6 नए रीफ्यूलिंग विमान, पाक-चीन हलकान

यह भी पढ़ें: साइबर अटैक और ड्रोन का 'काल' बनेगा CISF का नया चक्रव्यूह: 1 नवंबर से 6 सुपर स्पेशलाइज्ड सेक्टर्स ने संभाला मोर्चा, जानिए क्या है नया मॉडल?
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES