UN Remark On Delhi Detention: दिल्ली में बीते दिन CEC के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होना था. हालांकि, प्रदर्शन से पहले ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों और इसे लीड करने वाले CJP के मेंबर्स को डीटेन कर दिया. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने पर चिंता जताई. इसपर प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने इसे देश के आंतरिक मामलों में बेवजह दखल बताया. भारत ने शनिवार ( 11 अक्टूबर 2026) को यूनाइटेड नेशंस हाई कमिश्नर फॉर ह्यूमन राइट्स (OHCHR) की दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की बड़े पैमाने पर हिरासत को लेकर जताई गई चिंता को अनुचित और गुमराह करने वाला बताया.
भारत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X'पर अपने इंडिया एट UN अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि OHCHR की चिंताएं निराधार हैं और UN बॉडी को अपना ध्यान दूसरी जगहों पर बड़े पैमाने में हो रहे प्रदर्शन पर लगाना चाहिए.
इंडिया एट UN ने अपनी पोस्ट में लिखा,' भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां शांतिपूर्ण सभा का अधिकार हमारे संविधान में दिया गया है और सशक्त संस्थाओं, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया की ओर से संरक्षित है. हर लोकतंत्र की तरह, भारतीय नागरिक सार्वजनिक व्यवस्था के हित में उचित प्रतिबंधों के अधीन इस अधिकार का इस्तेमाल करते हैं. अधिकारी अपनी ओर से कानून के मुताबिक काम करते हैं और हमारी अदालतें सभी के लिए किसी भी शिकायत के दूर करने के लिए उपलब्ध है.'
We have seen the OHCHR’s remarks about today’s events in New Delhi. India is the world’s largest democracy, where the right to peaceful assembly is guaranteed by our Constitution and safeguarded by robust institutions, an independent judiciary and a free media. As in every democracy, Indian citizens exercise this right subject to reasonable restrictions in the interest of public order. The authorities, for their part, act in accordance with the law, and our courts remain available to all for redressal of any grievances. The OHCHR’s concerns are therefore misplaced and constitute an unwarranted interference in the internal affairs of India. In this context, OHCHR would also do well to devote comparable attention to large-scale protests elsewhere, consistent with its mandate of impartiality and non-selectivity. @MEAIndia @IndianDiplomacy @PMOIndia @DrSJaishankar @abagchimea
— India at UN, Geneva (@IndiaUNGeneva) October 10, 2026
दिल्ली पुलिस ने शनिवार ( 10 अक्टूबर 2026) को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर धरने पर बैठने के लिए जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे 3,000 लोगों को हिरासत में लिया. इनमें कई नेता, समर्थक और विपक्षी नेता शामिल थे. इस दौरान पुलिस ने दिल्ली मेट्रो, बसों और रेलवे समेत इंटरनेट और ट्रांसपोर्ट सर्विस पर भी बैन लगा दिया था.
#India: We are concerned by reports of mass detentions of demonstrators, protest leaders, members of civil society organisations, lawyers and journalists, before and during today’s large-scale demonstrations in Delhi. We call on the authorities to ensure that the right to peaceful assembly is fully respected and fulfilled. https://t.co/tqrQyZoXBJ
— UN Human Rights (@UNHumanRights) October 10, 2026
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रवक्ता थामीन अल-खीतान ने कहा कि UN दिल्ली में आज के बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों से पहले और उसके दौरान भारत में प्रदर्शनकारियों, विरोधी नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों की सामूहिक हिरासत की खबरों से चिंतित है.
UN ने कहा कि हम अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने के अधिकार का पूरा सम्मान किया जाए और उसे पूरा किया जाए. अल-खीतान ने नई दिल्ली से आग्रह किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते समय कानून प्रवर्तन कर्मी संयम बरतें. उन्होंने अधिकारियों को चिंताओं को दूर करने के लिए बातचीत में शामिल होने की भी सलाह दी. बता दें कि दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति के लिए CJP के आवेदन को खारिज कर दिया था. शनिवार सुबह इस प्रेशर ग्रुप के अभिजीत दिपके और 2 अन्य नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली फ्लाइट उतरने के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया गया.