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विदेशी हथियारों को बाय-बाय: देश में ही गूंजेगी 'प्रचंड' और 'रुद्र' की स्वदेशी दहाड़, भारत बना रहा पहली गन

भारत के रुद्र और प्रचंड हेलीकॉप्टर्स की ताकत और बढ़ने वाली है, वह भी स्वदेशी सामग्री से. इन जंगी हेलीकॉप्टर्स के लिए 20 मिमी एविएशन गन और टुरेट सिस्टम तैयार किया जाएगा. इसकी जिम्मेदारी दी गई है भारत की ही दो डिफेंस कंपनियों को.

विदेशी हथियारों को बाय-बाय: देश में ही गूंजेगी 'प्रचंड' और 'रुद्र' की स्वदेशी दहाड़, भारत बना रहा पहली गन
Image Credit: रुद्र-प्रचंड से बढ़ेगी सेना की ताकत.

भारतीय सेना के 'पावरबैंक' के दो महारथी प्रचंड और रुद्र हेलीकॉप्टर्स अब और ताकतवर होने वाले हैं. आर्मी और एयरफोर्स के इन कॉम्बैट हेलीकॉप्टरों के लिए 20मिमी एविएशन गन और टुरेट सिस्टम बनाया जाएगा. DRDO की आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट यानी (ARDE) ने इसका जिम्मा भारतीय कंपनियों एसएसएस डिफेंस और कल्याणी ग्रुप को सौंपा गया है.यानी जो भी सामग्री इन हेलीकॉप्टर्स में लगाई जाएगी, वह पूरी तरह से स्वदेशी होगी. इस कदम का मकसद विदेशी हथियार सप्लायर्स पर निर्भरता कम करना है.यह भारत की पहली ऐसी कोशिश होगी, जिसमें मीडियम कैलिबर वाली एविएशन गन को देश के भीतर ही डिजाइन और मैन्युफैक्चर किया जाएगा.

डेवलपमेंट फेज में लगेंगे दो साल

डेवलपमेंट फेज में लगभग दो साल लगने की उम्मीद है, जिसके बाद एक्सेप्टेंस प्रोसिजर को पूरा करके मैन्युफैक्चर के ऑर्डर दिए जाएंगे. लागत के हिसाब से यह ऑर्डर दोनों कंपनियों के बीच बांटा जाएगा. सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी को ऑर्डर का 60% हिस्सा मिलेगा, जबकि दूसरी कंपनी को 40% हिस्सा दिया जाएगा. इस प्रोजेक्ट पर मिलकर काम करने के लिए पिछले साल ARDE और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के बीच एक एमओयू पर दस्तखत किए गए थे।

यह गन HAL के एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर Mk-IV यानी रुद्र और लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) प्रचंड के लिए बनाई जा रही है. इन दोनों हेलीकॉप्टरों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये गन, रॉकेट और मिसाइलों का इस्तेमाल करके जमीनी टारगेट्स को भेदकर फौजियों को मदद दे सकें.

रुद्र में लग सकती है 20मिमी टुरेट गन 

रुद्र में 20मिमी टुरेट गन, 70मिमी रॉकेट पॉड और मिसाइलें लगाई जा सकती हैं. जबकि प्रचंड के हथियारों में 20मिमी गन, रॉकेट और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें शामिल हैं. भारतीय सेना पहले ही LCH की टुरेट गन का दिन और रात के समय फायरिंग टेस्ट कर चुकी है.

फिलहाल, LCH में यूरोपीय डिफेंस कंपनी KNDS की बनाई गई THL20 टुरेट का इस्तेमाल किया जाता है. सितंबर में, KNDS ने ऐलान किया था कि वह भारत के नए LCH बेड़े के लिए 126 नई 20मिमी THL20 टुरेट की सप्लाई करेगी.

इसके अलावा, कंपनी ने इंडियन एयरफोर्स के एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टरों के लिए भी 136 THL20 टुरेट की सप्लाई की है. यह स्वदेशी विकास कार्यक्रम इंपोर्ट सिस्टम का एक ऑप्शन बनेगा.

यह गन प्रोग्राम हेलीकॉप्टर्स के अन्य हथियारों का स्वदेशीकरण करने की कोशिशों के साथ ही चल रहा है. देश में ही बनी और नाग मिसाइल प्रोग्राम के तहत आने वाली HELINA और ध्रुवास्त्र एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल को आर्मी और एयरफोर्स के लिए तैयार किया गया है.

मिले थे 1109 करोड़ के ऑर्डर

जून में, भारत डायनामिक्स लिमिटेड को HAL से HELINA लॉन्चर और उससे जुड़ी लाइन-रिप्लेसेबल यूनिट्स (LRUs) के लिए 1,109 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले थे. इसके अलावा, 238.34 करोड़ रुपये का एक और ऑर्डर 'काउंटरमेजर डिस्पेंसिंग सिस्टम' की 'लाइन-रिप्लेसेबल यूनिट्स' के लिए था. इन कॉन्ट्रैक्ट्स को 24 से 60 महीनों के भीतर पूरा किया जाना है.

भारत, कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स और थेल्स बेल्जियम के सहयोग से देश में ही 70मिमी रॉकेट बनाने की तैयारी कर रहा है. सितंबर में घोषित इस समझौते में थेल्स की टेक्नोलॉजी एक्सपर्टीज और कल्याणी के मैन्युफैक्चरिंग व टेस्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर को एक साथ लाया गया है.

2027 में आने की उम्मीद

भारत में पूरी तरह से तैयार पहला रॉकेट 2027 की शुरुआत में आने की उम्मीद है. इन रॉकेटों को विमानों, जमीनी प्लेटफॉर्म और नेवी सिस्टम से लॉन्च किया जा सकता है.

स्वदेशी गन, मिसाइल और रॉकेट कार्यक्रम रुद्र और प्रचंड वेपन सिस्टम के लिए घरेलू निर्माण को बढ़ावा देंगे. हालांकि, नई गन अभी भी डेवलपमेंट फेज में है, जबकि मिसाइल और रॉकेट कार्यक्रमों की अपनी अलग मैन्युफैक्चरिंग और डिलीवरी डेडलाइन है.

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About the Author

Rachit Kumar

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रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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