UN में अल्पसंख्यकों पर उपदेश दे रहा था पाक, भारत ने जमकर लताड़ा, कहा- कारगिल में सैनिकों के शव तक नहीं लिए
'अल्पसंख्यकों के अधिकार' मुद्दे पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को जमकर लताड़ा. भारतीय सचिव भाविका मंगलानंदन ने कहा कि अल्पसंख्यकों पर वह देश उपदेश दे रहा है, जिसके देश में अल्पसंख्यकों की संख्या लगातार खत्म हो रही है.
'100 चूहे खाकर, बिल्ली हज को चली...' यह कहावत पाकिस्तान पर एकदम सटीक बैठती है. पड़ोसी मुल्क को अपने देश के अल्पसंख्यकों का दर्द दिखाई नहीं देता है, लेकिन UN में भारत के मुसलमानों का हितैषी बनने की कोशिश कर रहा था. हालांकि, इस कारगुजारी पर भारत ने ना सिर्फ उसे जमकर लताड़ लगाई, बल्कि पूरी दुनिया के आगे उसकी पोल भी खोलकर रख दी. दरअसल, पाकिस्तान ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र के मंच का गलत इस्तेमाल करते हुए कश्मीर का मुद्दा उठाया. उसने आरोप लगाया कि कश्मीर में मुसलमानों पर बड़ा जुल्म किया जा रहा है. उसकी इस बात पर भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन भड़क गईं और उन्होंने पाकिस्तान को जमकर लताड़ा.
अल्पसंख्यकों पर पाक हुआ बेनकाब
मंगलानंदन ने साफ कहा कि पाकिस्तान के पास भारत के जम्मू-कश्मीर और उसके आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. उन्होंने पाक की पोल खोलते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों जैसे मुद्दे पर पाकिस्तान का दोहरा मापदंड बेनकार हो चुका है. उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों पर वह देश उपदेश दे रहा है, जिसके देश में अल्पसंख्यकों की संख्या लगातार खत्म हो रही है. उन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान पाकिस्तान के सिंध प्रांत की ओर करते हुए कहा कि वहां पर अल्पसंख्यक लड़कियों के जबरन धर्मांतरण, अपहरण और विवाह से जुड़ी घटनाएं अक्सर सामने आती हैं.
आतंकवाद पर भी खूब लताड़ा
पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए मंगलानंदन ने कहा कि पड़ोसी देश में आतंकवादी खुलेआम घूमते हैं और जब भारत ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाई को अंजाम देता है, तो उसमें मारे गए आतंकियों के जनाजे में पाक सेना के उच्चाधिकारी शामिल होते हैं. मंगलानंदन ने आगे कहा कि यह बड़ी अजीब विडंबना है कि पाकिस्तान में आतंकियों के जनाजे निकाले जाते हैं, लेकिन सैनिकों के शव नहीं अपनाए जाते. उन्होंने कारगिल का किस्सा याद दिलाते हुए कहा कि 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने अपने ही सैनिकों के शव लेने से इनकार कर दिया था. इसके बाद भारत ने सैन्य सम्मान और मुस्लिम रीति-रिवाज के साथ पाक सैनिकों का अंतिम संस्कार किया था.
भारत विरोधियों को चेतावनी दी
भाविका मंगलानंदन ने मानवाधिकारों के नाम पर भारत विरोधी एजेंडा चलाने वालों को भी दो टूक जवाब दिया. उन्होंने कहा कि मानवीय पीड़ा का इस्तेमाल राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए नहीं किया जाना चाहिए और धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन की रिपोर्टिंग में अधिक निष्पक्ष दृष्टिकोण रखना चाहिए.
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