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देश की पहली स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन B28 को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. ट्रेन ने आज (रविवार, 01 नवंबर) अपनी पहली परीक्षा पास कर ली है. दरअसल, ट्रेन को पटरियों पर उतारने के लिए कई टेस्ट से गुजरना होगा. इसी कड़ी में आज स्क्वीज टेस्ट किया गया. यह टेस्ट बेंगलुरु में BEML की प्रोडक्शन यूनिट में किया गया. इस दौरान ट्रेन के मॉडल को 275 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया गया. स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन के मॉडल ने इस टेस्ट को सफलतापूर्वक पास कर लिया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव इस खास पल के गवाह बने. जब ट्रेन का स्क्वीज टेस्ट किया जा रहा था, तब रेल मंत्री वहीं पर मौजूद थे. इस दौरान रेल मंत्री वहां मौजूद इंजीनियरों और अधिकारियों से बातचीत करते नजर आए.
स्क्वीज टेस्ट क्या होता है?
यह वाहन के जांच की एक प्रक्रिया है. जब किसी वाहन का निर्माण किया जाता है, तो उसे सेवा में लाने से पहले स्क्वीज टेस्ट से गुजरना होता है. इस टेस्ट के दौरान वाहन की मजबूती को चेक करने के लिए उसकी भिड़ंत कराई जाती है. इससे यह पता लगाया जाता है कि टक्कर या दुर्घटना की स्थिति में वाहन की बॉडी को कितना नुकसान पहुंच सकता है. एक्सीडेंट होने से अंदर बैठे लोगों को होने वाले नुकसान का भी आंकलन किया जाता है. टेस्ट के दौरान चेक किया जाता है कि बिना किसी बड़े नुकसान या ढांचे के टूटे, बाहरी दबाव और भारी ताकतों को बॉडी झेल सकती है या नहीं. पहली स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन B28 ने इसी टेस्ट को पास कर लिया है.
जापानी तकनीक को पीछे छोड़ेगा भारत
इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि 'स्क्वीज टेस्ट' बहुत जरूरी है, क्योंकि ये ट्रेनें बहुत तेज गति से चलेगी, इसलिए किसी टक्कर या दुर्घटना की स्थिति में इनको कितना नुकसान होगा, यह जानना बेहद जरूरी है. टेस्ट से जुड़े एक एक अधिकारी ने मीडिया को बताया कि इस टेस्ट के सफलतापूर्वक पूरे होने के बाद मॉडल के अनुसार 6 महीने से भी कम समय में ट्रेन तैयार हो जाने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि B28 ट्रेन को जापानी शिंकानसेन तकनीक पर नहीं बनाया जा रहा है, इसलिए इसके निर्माण की प्रक्रिया में ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए.
अगले साल तक शुरू हो जाएगा ट्रायल
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, अगले साल तक अहमदाबाद-मुंबई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के 100 किलोमीटर लंबे सूरत-वापी सेक्शन पर B28 ट्रेनों का ट्रायल रन शुरू कर दिया जाएगा. इस हिस्से पर कमर्शियल परिचालन अगस्त 2027 से शुरू करने का लक्ष्य है. उन्होंने बताया था कि ट्रायल शुरू होने के दो से चार महीने बाद इस आम यात्रियों के लिए खोल दिया जाएगा. उन्होंने बताया था कि यह प्रोजेक्ट ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन के तहत तैयार किया जा रहा है और वडोदरा और मुंबई के बीच यात्रा समय को काफी कम करेगा.