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INDIA गठबंधन नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रतीकात्मक सार्वजनिक महाभियोग (impeachment) में बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा,'CEC ज्ञानेंद्र कुमार, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सीधे निर्देशों पर चुनाव आयोग चला रहे हैं. सात महीने पहले, विपक्ष के 193 सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में CEC को हटाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन हमारे नोटिस खारिज कर दिए गए और उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. इसलिए, आज हम जो प्रस्ताव लाए हैं, उसका मकसद एक संवैधानिक संस्था की गरिमा की रक्षा करना है. CEC के खिलाफ हमारी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है. हमारा मकसद यह है कि चुनाव आयोग संविधान की भावना के अनुरूप निष्पक्ष होकर काम करे, ताकि आम आदमी का उस पर भरोसा बना रहे. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कमजोर वर्गों, महिलाओं और युवाओं के वोट देने के अधिकार को दिल्ली में बैठा कोई व्यक्ति चुपके से कंप्यूटर से हटा न दे.'
खड़गे ने आगे कहा, '2014 से सत्ता हथियाने और उसे बनाए रखने के लिए हर मुमकिन साजिश रची गई है. इन्होंने सांसदों को चुराया है, राजनीतिक दलों को तोड़ा है, सरकारों को गिराया है और इलेक्टोरल बॉन्ड, ED और CBI का इस्तेमाल किया है, अब ये वोट चुरा रहे हैं. हमारे पास वोट चोरी के सैकड़ों उदाहरण हैं. ज्ञानेश कुमार इस चोरी को मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' की वजह से अंजाम दे पा रहे हैं. यह कानून दिसंबर 2023 में विपक्ष के 145 सांसदों को निलंबित करके पास किया गया था. यह शर्मनाक और अपमानजनक है. यह कानून चुनाव आयुक्तों को जीवन भर के लिए एक सुरक्षा कवच देता है. एक ऐसा सुरक्षा कवच जो भारत के राष्ट्रपति या भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी हासिल नहीं है.'
खरगे ने कहा,'ECI ने रातों-रात SIR की घोषणा कर दी. इसे पूरे देश में लागू किया गया, जिसका असल मकसद BJP के विरोधियों के वोट हटाना था, मोदी सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बाहरी लोगों और घुसपैठियों का बहाना ले रही है. उनका आरोप है कि हम घुसपैठियों को शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसा बिल्कुल नहीं है; हम तो बस असली और वैध मतदाताओं के नाम बने रहने की वकालत कर रहे हैं. हम ऐसा उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कर रहे हैं.'
खरगे ने कहा,'उदाहरण के लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम या फ्रांस को ही लें. इनमें से कई देशों में, लोकतंत्र की स्थापना के तुरंत बाद महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं दिया गया था, लेकिन भारत एक ऐसा देश है, जिसने अपना संविधान लागू होते ही सभी को यह अधिकार दे दिया. इसने महिलाओं, दलितों, वंचितों और गरीबों को, उनकी पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना यह अधिकार दिया. उस समय भी, RSS ने इस अधिकार पर आपत्ति जताई थी और इसका विरोध किया था.'
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