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भारत सरकार ने केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख प्रशासन के परामर्श से इलाके के 28 स्थानों और भौगोलिक संरचनाओं को मानचित्र पर मानक नामों के साथ दर्ज कराया है. गृहमंत्रालय की ओर से सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन से सलाह लेने के बाद इन जगहों को पहचान दी है. इसका उद्देश्य इन सभी जगहों को सही तरीके से पहचान की जा सके और आम लोगों को उनके बार में सही जानकारी मिल सके.
दरअसल, इस लिस्ट में चोटियां, पहाड़, दर्रे, ग्लेशियर, एक घाटी, एक नदी, एक झील, एक जलाशय और जमीन के कई हिस्से शामिल हैं. जानकारी के अनुसार, जिन चोटियों के नाम रखे गए हैं, उनमें गिरि, ज़ोरावर पीक, रिंचेन ज़ंगपो, साक्यश्री गिरि, मारपा लोत्सावा री, मिलारेपा कांगरी, अतिशा गिरी, कनिष्क पीक, मार्तंड, शिव री और महेश्वर री जैसे इलाके शामिल हैं.
वहीं, लिस्ट में शामिल पहाड़ों में करुण पीर, ड्रैक कार्पो और जोल्मोरी हैं. दर्रों में चैपचिंगल दर्रा और शचमिर्क दर्रा शामिल है. बता दें कि ग्लेशियरों में पारपिक और स्कमरी शामिल हैं. बता दें कि जमीन के जिन हिस्सों के नाम तय किए गए हैं, उनमें गोगरा और हॉट स्प्रिंग शामिल हैं.
बता दें कि साल 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों जगहों भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव का कारण रही हैं. पूर्वी लद्दाख में LAC पर बड़ी संख्या में भारतीय और चीनी सेनाएं तैनात हैं. हालांकि, इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि पिछले कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के बाद कुछ जगहों पर सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया हुई है.
Breaking: India has formally identified 28 places & features in Ladakh by standard names on official Survey of India maps; The step is seen as countering China’s territorial claims/ renaming in Eastern Ladakh pic.twitter.com/YtyP6HHcSY
— Sidhant Sibal (@sidhant) October 2, 2026
गृह मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में चीन या सीमा विवाद का जिक्र नहीं किया गया है. आदेश में केवल इतना लिखा गया है कि सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे पर औपचारिक पहचाना का उद्देश्य सही पहचान और जन-जागरुकता है. इस कदम से पूर्वी लद्दाख में नई दिल्ली की मौपिंग से जुड़ी स्थिति मजबीत होगी.
बता दें कि हाल के ही कुछ वर्षों में चीन ने अरुणाचल प्रदेश की कई जगहों के लिए स्टैंडर्ड चीनी नाम जारी किए हैं. भारतीय इलाके पर अपना दावा भी जताया है. हालांकि, भारत ने इसको भ्रामक करार दिया. भारत ने बीजिंग के नाम बदलने और दावों को खारिज कर दिया है और फिर से कहा है कि यह पूर्वी राज्य उसके इलाके का अभिन्न अंग है.
गौरतलब है कि जिन नामों को औपचारिक रूप दिया गया है, उनमें कई नाम लद्दाख में प्रचलित बौद्ध, ऐतिहासिक या स्थानीय संदर्भों पर आधारित हैं. इनमें विद्वान रिंचेन जंगपो जैसी हस्तियां शामिल हैं. वहीं, जोरावर पीक जैसी अन्य जगहों के नाम 19वीं सदी के डोगरा जनरल की याद भी ताजा होती है. आपको जानना चाहिए कि 'सर्वे ऑफ इंडिया' देश की मैपिंग करने वाली एजेंसी है.