SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

गांवों में खतरे का अलार्म था 'मुरासु', अब तमिलनाडु के इस 'ड्रम' पर कैसे पड़ा चक्रवाती तूफान का नाम

चक्रवाती तूफान 'मुरासु' के कल बुधवार ( 3 नवंबर 2026) तड़के लैंडफॉल होने की संभावना है. क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस साइक्लोन का नाम 'मुरासु' कैसे पड़ा और इसका तमिलनाडु के इतिहास से क्या कनेक्शन है?

Written By Shruti Kaul
Published: Nov 02, 2026, 02:44 PM IST | Updated: Nov 02, 2026, 02:55 PM IST
Join

Murasu Cyclone: चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के बाद अब एक और साइक्लोन ने दस्तक दे दी है. बंगाल की खाड़ी में एक और चक्रवाती तूफान मुरासु बन रहा है, जिसके कल ( 3 नवंबर 2026) की तड़के लैंडफॉल होने की संभावना है. इसके खतरे को देखते हुए मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश समेत कई इलाकों में अलर्ट जारी किया है. क्या आपने सोचा है कि साइक्लोन 'मुरासु' का नाम आखिर कहां से लिया गया है?  

बता दें कि 'मुरासु' एक पारंपरिक तमिल वाद्य यंत्र है, जिसका इस्तेमाल कभी गांवों और राज्यों में जरूरी संदेश पहुंचाने के लिए किया जाता था. इसे बजाकर लोगों को प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी भी दी जाती थी.

कैसे पड़ा 'मुरासु' नाम? 


चक्रवाती तूफान का 'मुरासु' नाम भारत ने रीजनल साइक्लोन नेमिंग सिस्टम के हिस्से के तौर पर रखा है. यह नाम नॉर्थ इंडियन ओशन में बनने वाले साइक्लोन के लिए मंजूर नामों की लिस्ट में है, जिसमें बंगाल की खाड़ी और अरब सागर शामिल हैं.

 वर्ल्ड मेटेरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) ने नेमिंग लिस्ट में भारत के योगदान में 'मुरासु' को भी शामिल किया है. 'मुरासु' का नाम संगीत से जुड़ने से ज्यादा अधिक इसका ऐतिहासिक महत्व है.

संदेश पहुंचाने के लिए होता था मुरासु का इस्तेमाल 


पहले के समय में बातचीत के लिए ड्रम को जरूरी हिस्सा माना जाता था. साल 2023 में टजर्नल ऑफ विजुअल एंड परफॉर्मिंग आर्ट्सट नाम के रिसर्च डिक्शनरी में छपे एक रिसर्च पेपर, 'द रिदम ऑफ रिचुअल्स ऑफ तमिलनाडु: ए डिस्क्रिप्टिव स्टडी' में बताया गया कि 'मुरासु' को  बेरीगई भी कहा जाता है और इसका इस्तेमाल शाही समारोहों के दौरान पब्लिक अनाउंसमेंट के लिए किया जाता था. इसके अलावा टैक्स, जुलूस और कई अन्य अनाउंसमेंट के लिए भी 'मुरासु' का काफी इस्तेमाल होता था.

 'मुरासु' का इस्तेमाल जंग के लिए सैनिकों को बुलाने और लड़ाई शुरू होने पर लोगों को अलर्ट करने के लिए भी किया जाता था. 'शांलैक्स इंटरनेशनल जर्नल ऑफ तमिल रिसर्च' में छपी एक और स्टडी में पुराने युद्ध के मैदानों में 'मुरासु' और दूसरे पारंपरिक तमिल इंस्ट्रूमेंट्स के इस्तेमाल का जिक्र किया गया है.  

तूफान को कैसे मिला यह नाम?


बता दें कि 'मुरासु' उन नामों में से एक था, जिसे भारत ने अप्रैल 2020 में अपनाई गई रिवाइज्ड लिस्ट के हिस्से के तौर पर ट्रॉपिकल साइक्लोन्स पर WMO/ESCAP पैनल को भेजा था. इस लिस्ट में 13 सदस्य देशों की ओर से दिए गए 169 नाम हैं, जिसमें हर देश ने 13 नाम पेश किए हैं.

 IMD अपने रीजनल स्पेशलाइज्ड मेटियोरोलॉजिकल सेंटर के जरिए बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के ऊपर बनने वाले साइक्लोन के नाम रखने के लिए जिम्मेदार है. ये नाम अप्रूव्ड रीजनल लिस्ट से पहले से तय सीक्वेंस में दिए जाते हैं, इसलिए 'मुरासु' नाम साइक्लोन की तेजी या उसके असर का जिक्र नहीं है, बल्कि यह चेतावनी देने और लोगों को खतरे के बारे में बताने के लिए है. यह इतिहास में मौसम के सिस्टम से जुड़े एक खास कनेक्शन को दर्शाता है.    
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

ज़ी न्यूज में सब एडिटर. वनस्थली विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, राजस्थान से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन. ये राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुद्दो से जुड़े विषयों पर लिखती हैं. लिखने के अलावा श्रुति को नई जगहों पर घूमना, संगीत सुनना, फिल्में देखना और फूड एक्सप्लोर करने का बेहद शौक है. 
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES