'सिर्फ माफी मांगने से काम नहीं चलेगा': थाने से गायब हुए सोने पर भड़का हाई कोर्ट, सरकार को दिया भरपाई का आदेश
पुलिस की लापरवाही से जुड़ा यह मामला गुजरात के गांधीधाम का है. मामले की सुनवाई गुजरात हाईकोर्ट में हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने व्यापारी को राहत देते हुए सरकार को नुकसान की भरपाई का आदेश दिया है.
पुलिस की हिफाजत में रखा सोना ही अगर गायब हो जाए, तो फिर किस पर भरोसा किया जाए? गुजरात से एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को चौंका दिया. यहां अदालत से बरी हुए एक व्यापारी का जब्त सोना पुलिस संभाल नहीं पाई, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंच गया. मामले की सुनवाई करते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि राज्य सरकार को गायब हुए सोने की भरपाई ज्वैलर को मुआवजे के रूप में करनी होगी.
यह मामला गुजरात के गांधीधाम का है. यहां एक सर्राफा कारोबारी प्रफुल्ल सोनी की मुश्किलें आपराधिक केस से बरी होने के बाद भी खत्म नहीं हुई हैं. पुलिस ने जो उसके सोने के बिस्किट जब्त किए थे, उन्हें वापस पाने के लिए वह सालों से अदालत के चक्कर काट रहा है. अब गुजरात हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कह दिया है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी अगर सोना नहीं लौटाया गया, तो राज्य सरकार को ज्वैलर को उसकी पूरी कीमत चुकानी पड़ेगी.
क्या है पूरा मामला?
साल 2012-13 में इस मामले की शुरुआत हुई थी, जब एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसने सोनी को करीब 70 हजार रुपये मूल्य के सोने और चांदी के जेवर इस शर्त पर दिए थे कि मांगने पर वे लौटा दिए जाएंगे. महिला की शिकायत पर सोनी के खिलाफ आईपीसी की धारा 406, 420, 506(2) और 114 के तहत FIR दर्ज की गई थी. जांच के दौरान पुलिस ने सोने के बिस्किट जब्त किए थे.
ऐसे मामलों में सामान्य तौर पर जब्त सामान को अदालत में सबमिट कराया जाता है, लेकिन इस केस में पुलिस ने ट्रायल कोर्ट से इजाजत लेकर जब्त सोने के बार्स को थाने में ही रख लिया था. इस केस में ट्रायल के दौरान दोनों पक्षों में समझौता हो गया और शिकायतकर्ता महिला ने 3.5 लाख रुपये लेकर केस खत्म करने पर सहमति जताई.
पुलिस बोली- 'सोना मिल ही नहीं रहा'
इस मामले में अगस्त 2025 में गांधीधाम के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) ने प्रफुल्ल सोनी को सभी आरोपों से बरी किया. कोर्ट ने निर्देश दिया कि जब्त सोना कारोबारी को लौटा दिया जाए, अब यहीं से मामले में नया ट्विस्ट आया. कोर्ट के निर्देश के अगले ही दिन संबंधित पुलिस इंस्पेक्टर को आदेश की कॉपी भी भेज दी गई थी, लेकिन जब प्रफुल्ल अपना सोना लेने थाने पहुंचे तो पुलिस ने एक हलफनामा दाखिल कर कहा कि थाने में तलाश करने के बावजूद सोना नहीं मिल रहा. इसके बाद पीड़ित कारोबारी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
'सिर्फ माफी मांगने से नहीं चलेगा काम'
इस मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई चली. पुलिस अधिकारी ने बिना शर्त माफी मांगी और मामला खत्म करने की गुहार लगाई, लेकिन याचिकाकर्ता सोनी ने इसका विरोध किया और कहा कि सिर्फ माफी मांग लेना कोर्ट के आदेश के पालन का विकल्प नहीं हो सकता. व्यापारी ने एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर सोने के मौजूदा बाजार भाव और सरकार द्वारा देय रकम का ब्योरा पेश किया है.
इस मामले की सुनवाई जस्टिस एन. एस. संजय गौड़ा और जस्टिस जे. एल. ओडेदरा की बेंच ने की. हाई कोर्ट ने शुक्रवार 9 अक्टूबर को आदेश देते हुए कहा, पुलिस ने कारोबारी से जो सोना जब्त किया था, उसकी भरपाई राज्य सरकार को ही करनी होगी.
28 अक्टूबर को अगली सुनवाई
सरकारी वकील ने सरकार से राय लेने के लिए थोड़ा वक्त मांगा, जिसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई 28 अक्टूबर तय कर दी. अदालत ने अभी मुआवजे की आखिरी रकम तय नहीं की है, लेकिन यह साफ कर दिया है कि पुलिस की इस लापरवाही का हर्जाना अब राज्य सरकार को ही भुगतना पड़ेगा.
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