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देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से बनाए गए नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार (05 नवंबर) को सुनवाई टल गई. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने शीर्ष न्यायालय को बताया कि विवादित यूजीसी नियमों की फिर से समीक्षा की जाएगी. इसके लिए समिति का भी गठन किया जाएगा.
दरअसल, इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए थे. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया कि नियमों की समीक्षा के दौरान सभी वर्गों के छात्रों के हितों का ध्यान रखा जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि किसी भी वर्ग का छात्र खुद को असंतुष्ट, असुरक्षित या डरा हुआ महसूस करने की जरूरत नहीं है.
सॉलीसीटर जनरल की ओर से कहा गया कि यूजीसी नए नियमों पर पुनर्विचार कर रहा है और इसके लिए एक समिति गठित करने पर भी विचार किया जा रहा है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के इन नियमों पर अंतरिम रोक लगाते हुए केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया था. बता दें कि चीफ जस्टिस ने भी कहा कि हर छात्र के हितों की रक्षा करना जरूरी है। नियम बनाते वक़्त देश की युवा पीढ़ी का ध्यान रखा जाना चाहिए.
कोर्ट का मानना था कि इन नियमों की भाषा स्पष्ट नहीं है और इन नियमों का दुरुपयोग हो सकता है. कोर्ट ने सरकार को सुझाव दिया था कि वह इन नियमों पर विचार के लिए एक नई कमेटी का गठन करें.
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर कार्रवाई को लेकर जांच कर रही हाई पावर कमेटी से कहा है कि वो 1 महीने में रिपोर्ट दाखिल करें. कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट के लिए अनिश्चित वक़्त तक इंतजार नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कमेटी की 31 अक्टूबर की रिपोर्ट सिर्फ अब तक किए गए काम की जानकारी देने वाली रिपोर्ट है. इसमें अभी तक आरोपों पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कमेटी अब तक मिले सभी दस्तावेजों और सबूतों की जांच करे, संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब करें. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि कमेटी ख़ुद को सिर्फ पीड़ितों की शिकायत तक सीमित न रखें. पीड़ितों की ओर से वकीलों और दूसरे लोगों से पेश की गई शिकायतो, वीडियो और दूसरे सबूतों पर भी विचार करें. मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी.