SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

Without Fear or Favour: कॉलेजियम की सिफारिश के बाद भी 'गे' वकील सौरभ कृपाल क्यों नहीं बन सके जज?

'कॉलेजियम बनाम सरकार' पर खुलासा करते हुए पूर्व जस्टिस कौल ने ANI से बात करते हुए कहा कि कॉलेजियम की सिफारिशों के बाद भी 'गे' वकील सौरभ कृपाल को जज बनाने पर सरकार ने कभी मंजूरी नहीं दी.

Written By K. Raj Mishra
Published: Oct 28, 2026, 09:56 AM IST | Updated: Oct 28, 2026, 10:29 AM IST
Image Credit: पूर्व जस्टिस संजय किशन कौल (File Photo- ANI)
Join

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस संजय किशन कौल ने अपनी किताब 'विदाउट फियर ऑर फेवर' (Without Fear of Favour) में पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है. किताब में पूर्व सीजेआई को लेकर उनके तमाम खुलासों से न्यायपालिका समेत सियासत तक हिल गई. अब पूर्व जस्टिस कौल ने पूर्व CJI चंद्रचूड़ के साथ अपने संबंधों को लेकर सफाई दी है. न्यूज एजेंसी 'एएनआई' से बात करते हुए पूर्व जस्टिस कौल ने कहा कि पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ के साथ उनके काफी अच्छे संबंध थे. जस्टिस कौल के मुताबिक, उन्होंने जजों की नियुक्ति को लेकर पूर्व सीजेआई के फैसलों की आलोचना की है, ना कि उनके साथ अपने निजी व्यवहार की. जस्टिस कौल ने कहा कि वे (पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़) थोड़े रिजर्व इंसान थे और मैं आसानी से लोगों के साथ घुल-मिल जाता हूं. इसके बाद भी हमारी उनके साथ अच्छी दोस्ती थी.

पूर्व CJI चंद्रचूड़ के साथ कैसा था रिश्ता?

पूर्व जस्टिस कौल ने साफ कहा कि हमारे बीच दोस्ताना रिश्ता था, लेकिन न्यायिक नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान एग्जीक्यूटिव दबाव से निपटने के लिए उनके अलग-अलग तरीके थे. पूर्व जस्टिस कौल ने दिल्ली हाई कोर्ट के जज के रूप में वरिष्ठ वकील सौरभ कृपाल की पदोन्नति को लेकर लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध पर भी खुलकर बात की. 

उन्होंने बताया कि भले ही सार्वजनिक रूप से यह कारण बताया गया था कि कृपाल के विदेशी पार्टनर को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं, लेकिन असल में सरकार की ओर से एक समलैंगिक (Gay) को जज बनाने पर आपत्ति जताई गई थी. उन्होंने इस मामले में कॉलेजियम के भीतर हुई अनौपचारिक चर्चाओं और संस्थागत गतिरोधों पर से पर्दा उठाते हुए इस बात की जानकारी दी.

'कॉलेजियम बनाम सरकार' पर बड़ा खुलासा

'कॉलेजियम बनाम सरकार' पर खुलासा करते हुए पूर्व जस्टिस कौल ने कहा कि अक्टूबर 2017 में दिल्ली हाई कोर्ट कॉलेजियम ने 'गे' वकील सौरभ कृपाल के नाम की सिफारिश की थी. नवंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इसे मंजूरी दे दी थी. इसके बाद भी नवंबर 2022 में केंद्र सरकार ने इसे वापस भेज दिया. 19 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अपनी सिफारिश फिर से सौरभ कृपाल के नाम का सुझाव दिया. 

सौरभ कृपाल क्यों नहीं बन सके जज?

उन्होंने कहा कि सरकार ने कभी इसे मंजूरी नहीं दी और कॉलेजियम ने कभी इसे वापस नहीं लिया, क्योंकि ऐसा करना कॉलेजियम के लिए बहुत शर्मनाक होता. उन्होंने बताया कि अप्रैल 2021 में कानून मंत्रालय के पत्र में विशेष रूप से इस बात का जिक्र था कि कृपाल के पार्टनर स्विस नागरिक हैं और वे LGBTQ+ अधिकारों की वकालत से जुड़े रहे हैं.

ये भी पढ़ें- CJI पर टिप्पणी कर बुरी फंसी कांग्रेस, कानूनी नोटिस के बाद मांगी माफी; विवादित पोस्ट मामले में पदाधिकारी पर गिरी गाज

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES