'मेरे राज में होता तो IAS को मिनटों में बाहर भेज देता...' महिला अफसर के अपमान पर आगबबूला हुए फारूक अब्दुल्ला
जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला ने IAS अधिकारी कुमार राजीव रंजन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि अपने जूनियर के साथ तू-तड़ाक करने वाले अफसर के लिए जम्मू कश्मीर में कोई जगह नहीं है. ऐसे अफसर को बर्खास्त किया जाना चाहिए.
जम्मू कश्मीर में महिला KAS अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार से प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भड़क गए हैं. उन्होंने घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए IAS अधिकारी कुमार राजीव रंजन के जम्मू-कश्मीर से बाहर ट्रांसफर और सेवा से बर्खास्त किए जाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि महिला अधिकारी के साथ इस तरह का अभद्र बर्ताव करने वाले अफसर की प्रदेश में कोई जगह नहीं है. उस अधिकारी को केंद्र शासित प्रदेश से हटाया जाना चाहिए. साथ ही, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी सुनिश्चित होनी चाहिए.
'उन्हें जम्मू-कश्मीर से बाहर फेंक दिया जाना चाहिए'
घटना पर बोलते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, 'उन्होंने (IAS अधिकारी कुमार राजीव रंजन) जिस भाषा का इस्तेमाल किया, वह बहुत गलत है. इससे पता चलता है कि उनमें वह तौर-तरीके नहीं हैं, जो एक अधिकारी में होने चाहिए. गाली देना और गेट आउट, गेट आउट कहना गलत है. उन्हें जम्मू-कश्मीर से बाहर फेंक दिया जाना चाहिए. चाहे कोई अधिकारी हो या मंत्री, वे यहां लोगों की सेवा करने के लिए हैं.'
उन्होंने आगे कहा, 'यदि यह मामला मेरे कार्यकाल में हुआ होता, तो उस अधिकारी को केवल अटैच नहीं किया जाता, बल्कि पूरी तरह से निष्कासित कर दिया जाता. अगर मैं उस समय वहां होता और ऐसा हुआ होता, तो वह राज्य में कुछ मिनट से ज्यादा नहीं रहता. मैं उसे वापस विमान में बैठाकर भेज देता. यह घटना संकेत दे रही है कि 2019 के बाद क्या हो रहा है.'
दिल्ली में कॉकरोचों को फारूक ने दिया समर्थन
सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर फारूक अब्दुल्ला ने अपनी खुशी जताई. उन्होंने विरोध-प्रदर्शनों को अपना समर्थन देते हुए कहा कि यह एक सकारात्मक पहल है. पूर्व मुख्यमंत्री बोले, 'मुझे लगता है कि वे बहुत अच्छे हैं. यह तानाशाही के खिलाफ, हिटलर के तौर-तरीकों के खिलाफ विरोध शुरू करने का एक नया तरीका है.'
पश्चिम एशिया में चल रहे सैन्य तनाव पर फारूक ने टिप्पणी करते हुए कहा, 'हां, यह एक त्रासदी है. मुझे उम्मीद है कि ट्रंप को यह एहसास होगा कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि बातचीत ही समाधान है. आप युद्ध नहीं जीतेंगे, आप केवल लोगों को मारेंगे और निर्दोष लोग मारे जाएंगे.'
IAS अधिकारी कुमार राजीव रंजन की जांच शुरू
उधर, मामले के तूल पकड़ने के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने IAS अधिकारी कुमार राजीव रंजन के कथित दुराचार की जांच के आदेश दिए हैं. सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, आवास और शहरी विकास विभाग की आयुक्त/सचिव IAS मंदीप कौर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है. उनसे JKAS अधिकारी बीनिश वानी से जुड़े दुराचार के आरोपों की गहन जांच कर 15 दिन में रिपोर्ट मांगी गई है. सरकार ने इस मामले में सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव JKAS अमित वर्माणी को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी भी नियुक्त किया है.
JKAS एसोसिएशन ने बुलाई कलम बंद हड़ताल
उधर घटना के विरोध में, JKAS एसोसिएशन ने एक दिन की 'पेन-डाउन' हड़ताल बुलाई है. इसके साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच और बदले की कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है. एसोसिएशन ने एक बयान में कहा कि JKAS एसोसिएशन ने एक महिला अधिकारी के कथित अपमान के विरोध में एक दिन की 'पेन-डाउन' (काम बंद) हड़ताल का आह्वान किया है.
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बताते चलें कि कुमार राजीव रंजन 2010 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. वे फिलहाल श्रम और रोजगार विभाग के प्रशासनिक सचिव हैं. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वे अधीनस्थ अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे. तभी गांदरबल की सहायक निदेशक बीनिश वानी से जुड़े कथित भ्रष्टाचार को लेकर वे उन पर बुरी तरह भड़क गए. उन्होंने उनके लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कई बार गेट आउट कहा. उनकी इस हरकत को सभी अधिकारियों ने ऑनलाइन देखा, जो जल्द ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
सोशल मीडिया पर लोग जता रहे अपना गुस्सा
इसके बाद से जम्मू कश्मीर के राजनेता समेत आम लोग काफी आक्रोशित हैं और वे कुमार राजीव रंजन के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. प्रदेश की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने भी उनकी भाषा शैली पर आपत्ति जताते हुए तुरंत सेवा से हटाए जाने की मांग की. सोशल मीडिया पर कुमार राजीव रंजन के खिलाफ लोग अपना गुस्सा जता रहे हैं. जनता के दबाव में उमर अब्दुल्ला सरकार ने उनके व्यवहार के खिलाफ जांच का आदेश जारी कर अब 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है.